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आर्यावर्त बैंक के लॉकर से 25 लाख के जेवरात चोरी, सेवानिवृत्त बीएसएनएल कर्मचारी ने दर्ज कराया मुकदमा
Thu, 17 Dec 2020 09:50 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 17 Dec 2020 09:50 AM IST
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आर्यावर्त बैंक
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में ताजगंज के कलाल खेरिया स्थित आर्यावर्त बैंक में सेवानिवृत्त बीएसएनएल कर्मी नरायन सिंह के लॉकर से 25 लाख रुपये के जेवरात चोरी होने का मामला सामने आया है। सेवानिवृत्त कर्मी के बेटे श्याम सिंह का कहना है कि उन्हें बैंक से कॉल आने पर घटना की जानकारी हो सकी। 14 दिन बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, लेकिन आज तक जेवरात चोरी करने वाले के बारे में पता नहीं चल सका।
गांव लकावली निवासी नरायन सिंह बीएसएनएल में तैनात थे। उनके बेटे लोको पायलट श्याम सिंह ने बताया कि पिता ने 22 साल पहले आर्यावर्त बैंक में लॉकर खोला था। इसमें अपने पुश्तैनी जेवरात रखे थे। साल में कभीकभार ही लॉकर चेक करने जाते थे। 23 नवंबर को पिता, मां सावित्री देवी और भाई रघुवंश सिंह लॉकर से जेवरात निकालने गए थे। कुछ जेवरात निकालने के बाद घर आ गए।
25 नवंबर की शाम पांच बजे के बाद बैंक के कर्मचारी का कॉल आया। उन्होंने बैंक में बुला लिया। इस पर परिजन पहुंच गए। कर्मचारियों ने बताया कि लॉकर खुला हुआ है। इस पर नरायन सिंह ने लॉकर को चेक किया। उसमें जेवरात नहीं थे। इस पर नरायन सिंह ने बैंक मैनेजर से शिकायत की। थाना ताजगंज के प्रभारी का कहना है कि मुकदमा दर्ज है। विवेचना की जा रही है।
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गांव लकावली निवासी नरायन सिंह बीएसएनएल में तैनात थे। उनके बेटे लोको पायलट श्याम सिंह ने बताया कि पिता ने 22 साल पहले आर्यावर्त बैंक में लॉकर खोला था। इसमें अपने पुश्तैनी जेवरात रखे थे। साल में कभीकभार ही लॉकर चेक करने जाते थे। 23 नवंबर को पिता, मां सावित्री देवी और भाई रघुवंश सिंह लॉकर से जेवरात निकालने गए थे। कुछ जेवरात निकालने के बाद घर आ गए।
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25 नवंबर की शाम पांच बजे के बाद बैंक के कर्मचारी का कॉल आया। उन्होंने बैंक में बुला लिया। इस पर परिजन पहुंच गए। कर्मचारियों ने बताया कि लॉकर खुला हुआ है। इस पर नरायन सिंह ने लॉकर को चेक किया। उसमें जेवरात नहीं थे। इस पर नरायन सिंह ने बैंक मैनेजर से शिकायत की। थाना ताजगंज के प्रभारी का कहना है कि मुकदमा दर्ज है। विवेचना की जा रही है।
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14 दिन बाद दर्ज हुआ मुकदमा
श्याम सिंह ने बताया कि तोरा चौकी पर शिकायत की थी। मगर, कोई सुनवाई नहीं हुई। तहरीर चौकी पर ही पड़ी रही। सात दिसंबर को बैंक के अधिकारियों ने बुलाया। उनसे मुकदमे की कॉपी लाने के लिए कहा। इस पर वो तोरा चौकी पर पता करने आए। तब पता चला कि मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। उन्हें थाने भेज दिया गया। बाद में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस को बैंक अधिकारियों ने बताया कि 24 और 25 नवंबर को एक-एक व्यक्ति लॉकर खोलने आए थे। मगर, लॉकर दो चाबियों से खुलता है। नरायन सिंह का लॉकर खोलने में किसी कर्मचारी की मिलीभगत हो सकती है। उनके जेवरात की कीमत तकरीबन 25 लाख रुपये है।
तहरीर में नहीं खोली रकम
श्याम सिंह ने बताया कि पुलिस मुकदमा चोरी का अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज कर लिया। मगर, इसमें रकम का खुलासा नहीं किया गया। लिखवा लिया कि जेवरात की सूची बाद में दी जाएगी। अगर, रकम का खुलासा हो जाता तो केस की विवेचना ठीक से होती। केस में अभी तक विवेचना भी शुरू नहीं की जा सकी है।
लॉकर में लगती हैं दो चाबियां
बैंक में लॉकर खोलने के लिए किराया लिया जाता है। लॉकर धारक को एक चाबी दे दी जाती है, जबकि दूसरी चाबी बैंक के मैनेजर के पास होती है। इन दोनों चाबियों को लगाने पर ही लॉकर खुलता है। बैंक यह नहीं पूछता है कि लॉकर में कितने जेवरात और कैश रख रहे हैं। नरायन सिंह भी लॉकर से जेवरात लेने के बाद चले गए थे। कर्मचारियों का कहना है कि लॉकर खुला था। अगर, लॉकर खुला था तो कर्मचारियों को दो दिन बाद पता क्यों चला, जबकि लॉकर को चेक किया जाता है।
श्याम सिंह ने बताया कि तोरा चौकी पर शिकायत की थी। मगर, कोई सुनवाई नहीं हुई। तहरीर चौकी पर ही पड़ी रही। सात दिसंबर को बैंक के अधिकारियों ने बुलाया। उनसे मुकदमे की कॉपी लाने के लिए कहा। इस पर वो तोरा चौकी पर पता करने आए। तब पता चला कि मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। उन्हें थाने भेज दिया गया। बाद में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस को बैंक अधिकारियों ने बताया कि 24 और 25 नवंबर को एक-एक व्यक्ति लॉकर खोलने आए थे। मगर, लॉकर दो चाबियों से खुलता है। नरायन सिंह का लॉकर खोलने में किसी कर्मचारी की मिलीभगत हो सकती है। उनके जेवरात की कीमत तकरीबन 25 लाख रुपये है।
तहरीर में नहीं खोली रकम
श्याम सिंह ने बताया कि पुलिस मुकदमा चोरी का अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज कर लिया। मगर, इसमें रकम का खुलासा नहीं किया गया। लिखवा लिया कि जेवरात की सूची बाद में दी जाएगी। अगर, रकम का खुलासा हो जाता तो केस की विवेचना ठीक से होती। केस में अभी तक विवेचना भी शुरू नहीं की जा सकी है।
लॉकर में लगती हैं दो चाबियां
बैंक में लॉकर खोलने के लिए किराया लिया जाता है। लॉकर धारक को एक चाबी दे दी जाती है, जबकि दूसरी चाबी बैंक के मैनेजर के पास होती है। इन दोनों चाबियों को लगाने पर ही लॉकर खुलता है। बैंक यह नहीं पूछता है कि लॉकर में कितने जेवरात और कैश रख रहे हैं। नरायन सिंह भी लॉकर से जेवरात लेने के बाद चले गए थे। कर्मचारियों का कहना है कि लॉकर खुला था। अगर, लॉकर खुला था तो कर्मचारियों को दो दिन बाद पता क्यों चला, जबकि लॉकर को चेक किया जाता है।
पहले भी हो चुकी हैं घटना
शहर में लॉकर से जेवरात चोरी होने के मामले पहले भी आ चुके हैं। वर्ष 2008 में कमला नगर स्थित बैंक के स्ट्रांग रूम बराबर में खाली पड़े प्लाट से एक सुरंग बनाई गई थी। बैंक अधिकारियों ने यह बताया था कि लॉकर सुरक्षित हैं। वहीं नाई की मंडी स्थित बैंक के लॉकर टूट गए थे। इनसे लाखों के जेवरात निकाल लिए गए थे।
मामले की जांच की जा रही है
लॉकर धारक ने 23 नवंबर को लॉकर खोला था। 25 नवंबर को कर्मचारी को लॉकर खुला होने की जानकारी हुई। इस पर धारक को बताया था। मामले की जांच कराई जा रही है। पुलिस की जांच में सहयोग किया जा रहा है। किसी कर्मचारी की लापरवाही होगी तो कार्रवाई की जाएगी। - आनंद प्रकाश, वरिष्ठ प्रबंधक, आर्यावर्त बैंक
शहर में लॉकर से जेवरात चोरी होने के मामले पहले भी आ चुके हैं। वर्ष 2008 में कमला नगर स्थित बैंक के स्ट्रांग रूम बराबर में खाली पड़े प्लाट से एक सुरंग बनाई गई थी। बैंक अधिकारियों ने यह बताया था कि लॉकर सुरक्षित हैं। वहीं नाई की मंडी स्थित बैंक के लॉकर टूट गए थे। इनसे लाखों के जेवरात निकाल लिए गए थे।
मामले की जांच की जा रही है
लॉकर धारक ने 23 नवंबर को लॉकर खोला था। 25 नवंबर को कर्मचारी को लॉकर खुला होने की जानकारी हुई। इस पर धारक को बताया था। मामले की जांच कराई जा रही है। पुलिस की जांच में सहयोग किया जा रहा है। किसी कर्मचारी की लापरवाही होगी तो कार्रवाई की जाएगी। - आनंद प्रकाश, वरिष्ठ प्रबंधक, आर्यावर्त बैंक