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एक ही खाते में डाल दी थी 10 लाख रुपये की रकम
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:57 PM IST
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मैनपुरी। जिला सहकारी बैंक में दैवी आपदा राहत राशि के घोटाले में जमकर मनमानी की गई। कई खातों में पांच से लेकर 10 लाख रुपये तक डाल दिए गए। एक ही खाते में इतनी रकम जाने के बाद भी तहसील स्तरीय अधिकारी आंखें मूंदे रहे। खुलासा होने के बाद अब जिला प्रशासन में हड़कंप है। अभी तक की जांच में ऐसे 26 खातों का पता चला है जिनमें घोटाले में शामिल लोगों ने फर्जी तरीके से बड़ी रकम डलवाई है।
फरवरी 2015 में आई आंधी तूफान और ओलावृष्टि ने जिले मेें तबाही मचाई थी। इसमें गेहूं की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई थी। इस पर तत्कालीन सपा सरकार ने किसानों को 15 सौ रुपये प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा देने की घोषणा की थी। इस पर अलग-अलग किस्तों में करोड़ों रुपये की धनराशि जिला सहकारी बैंक को दी गई थी। किसानों को चेकों के माध्यम से पैसा वितरित किया गया था।
तहसील क्षेत्र के हजारों किसान मुुआवजे से वंचित रह गए। मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई। इस पर शासन ने जिला सहकारी बैंक को भेजे गए पैसों की जांच कराई। इस पर बैंक की जांच कारपोरेटिव सेल्स एंव तहसील प्रशासन के बनाए गए चेकों की जांच उपजिलाधिकारी भोगांव ने की थी।
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उपजिलाधिकारी ने किसानों से हजारों रुपये की वसूली करने एवं फर्जी ढंग से चेक बनाने के घोटाले का खुलासा किया था। जिला सहकारी बैंक के उप प्रबंधक नेपाल सिंह ने इस संबंध में आठ बैंक कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट भी कराई थी। पिछले दिनों घोटाले के आरोपियों ने ऊंची पहुंच के चलते उनका स्थानांतरण एटा करा दिया।
इस संबंध में बैंक प्रबंधन अब कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका सिर्फ इतना कहना है कि पूर्व में जो जांच हुई है उसके आधार पर आठ बैंक कर्मियों को निलंबित कर दिया गया। आगे जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अभी तक की जांच में खुलासा हुआ कि कुल 26 खातों में 5936760 रुपये डाले गए। इनमें से अकेले जय सिंह के खाते में 108542 लाख रुपये डाल दिए गए। वहीं खुशीराम के खाते में 892150 रुपये, उमेशचंद्र के खाते में 732424, सत्यपाल के खाते में 614175, प्रदीप कुमार के खाते में 590150, मीनू के खाते में 485396, अभिषेक मिश्रा के खाते में 445848, मनोज कुमार के खाते में 312594, संगीता के खाते में 288692, सरिता के खाते में 290866, रामखिलाड़ी के खाते में 2,48374 रुपये जमा कराए गए। इसके अलावा सुरेश सिंह, अरविंद कुमार, अनिल कुमार, सुषमा देवी आदि के खातों में भी बड़ी संख्या में रुपये अवैध रूप से जमा कराए गए।
फरवरी 2015 में आई आंधी तूफान और ओलावृष्टि ने जिले मेें तबाही मचाई थी। इसमें गेहूं की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई थी। इस पर तत्कालीन सपा सरकार ने किसानों को 15 सौ रुपये प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा देने की घोषणा की थी। इस पर अलग-अलग किस्तों में करोड़ों रुपये की धनराशि जिला सहकारी बैंक को दी गई थी। किसानों को चेकों के माध्यम से पैसा वितरित किया गया था।
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तहसील क्षेत्र के हजारों किसान मुुआवजे से वंचित रह गए। मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई। इस पर शासन ने जिला सहकारी बैंक को भेजे गए पैसों की जांच कराई। इस पर बैंक की जांच कारपोरेटिव सेल्स एंव तहसील प्रशासन के बनाए गए चेकों की जांच उपजिलाधिकारी भोगांव ने की थी।
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उपजिलाधिकारी ने किसानों से हजारों रुपये की वसूली करने एवं फर्जी ढंग से चेक बनाने के घोटाले का खुलासा किया था। जिला सहकारी बैंक के उप प्रबंधक नेपाल सिंह ने इस संबंध में आठ बैंक कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट भी कराई थी। पिछले दिनों घोटाले के आरोपियों ने ऊंची पहुंच के चलते उनका स्थानांतरण एटा करा दिया।
इस संबंध में बैंक प्रबंधन अब कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका सिर्फ इतना कहना है कि पूर्व में जो जांच हुई है उसके आधार पर आठ बैंक कर्मियों को निलंबित कर दिया गया। आगे जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अभी तक की जांच में खुलासा हुआ कि कुल 26 खातों में 5936760 रुपये डाले गए। इनमें से अकेले जय सिंह के खाते में 108542 लाख रुपये डाल दिए गए। वहीं खुशीराम के खाते में 892150 रुपये, उमेशचंद्र के खाते में 732424, सत्यपाल के खाते में 614175, प्रदीप कुमार के खाते में 590150, मीनू के खाते में 485396, अभिषेक मिश्रा के खाते में 445848, मनोज कुमार के खाते में 312594, संगीता के खाते में 288692, सरिता के खाते में 290866, रामखिलाड़ी के खाते में 2,48374 रुपये जमा कराए गए। इसके अलावा सुरेश सिंह, अरविंद कुमार, अनिल कुमार, सुषमा देवी आदि के खातों में भी बड़ी संख्या में रुपये अवैध रूप से जमा कराए गए।