{"_id":"597b8bfe4f1c1b8a7a8b45b8","slug":"141501268990-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीसी से आगे निकल गया था कार्ड का खेल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बीसी से आगे निकल गया था कार्ड का खेल
Updated Sat, 29 Jul 2017 12:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। बीसी के साथ-साथ कार्ड के माध्यम से करोड़ों रुपया हर माह एकत्रित होता था। इसी धनराशि को ब्याज पर उठाने का खेल चल रहा था।कार्ड का ड्रा खुलने वाले दिन न सिर्फ दावत मिलती बल्कि महफिलें सजा करती थीं। इसमें शहर के कई चिकित्सक,व्यापारियों के साथ कारखाना संचालक तक शामिल थे। आगरा, मथुरा और अलीगढ़ तक के लोग शामिल होते थे। क्योंकि इन शहरोंमें भी कार्डों के सदस्य बनाए गए हैं।
बीसी के बाद कार्ड का नया खेल सुहागनगरी में शुरू हुआ था। रंग-बिरंगे एवं आकर्षक कार्ड के माध्यम से एक दिन में करोड़ों रुपया एकत्रित हो जाता था। मतलब एक कार्डधारक को तीन हजार रुपया हर माह देना होता था। यदि आप दस कार्ड खरीद लिए तो ऐसे व्यक्ति को विशेष उपहार देने का प्रावधान था। कार्ड के खेल में शामिल सूत्रों की मानें तो एक बार में करीब एक हजार कार्ड निकाले गए थे।
सीधे एक ही दिन में तीन करोड़ रुपया एकत्रित होता था। इसमें जमा करा रहे कार्डधारकों को एक से डेढ़ प्रतिशत तक ब्याज मिलती थी जबकि इसके किसी सदस्य को अधिक पैसे की जरूरत होती तो उसे पांच से छह प्रतिशत मासिक ब्याज पर देने का प्रावधान था। इतना ही नहीं बल्कि यदि किसी ने 20 लाख रुपया लिया तो फिर उससे दो माह की ब्याज व पैसे जमा कराने की किश्त धनराशि देने के दौरान ही काट ली जाती थी।
विज्ञापन
इतना ही नहीं पैसा एक साथ हाथ में आ जाए इसके ही लिए सदस्यता लेने वालों में पुरुषों की तो काकटेल पार्टी भी होटल में हुआ करती थी। यही कारण था कि करोड़ों रुपया उसके ही हाथ में रहता था। कोई सदस्य दूरी नहीं बनाए इसी लिहाज से लकी ड्रा में लग्जरी कार एवं बाइक निकालने का ऑफर रखा जाता था।हर माह बंपर पुरस्कार से नवाजने का प्रावधान था। महंगी कार,बुलेट एवं दोपहिया वाहन तक पुरस्कार में निकाले जाते थे। एक बार में ढाई करोड़ तक के इनाम निकालने का ऑफर रखा जाता था।
ड्रा में ओडी कार निकलने की चर्चा
संजीव गुप्ता के लापता होने के बाद तमाम चर्चाएं बीसी और कार्ड के खेल को लेकर सामने आ रही हैं। चर्चा है कि कार्डों के खेल का एक ड्रा 11 जुलाई को हुआ था। इसमें बड़े इनाम रखे गए थे। पहले लकी ड्रा में ओडी कार थी। जिसकी यह कार निकली उसके द्वारा लगातार दवाब भी बनाया जा रहा था। अपुष्ट सूत्र बताते हैं कि कार्ड के खेल का संचालन करने वाले ने ओडी कार देने में हाथ खडे कर दिए थे।
विज्ञापन
बीसी के बाद कार्ड का नया खेल सुहागनगरी में शुरू हुआ था। रंग-बिरंगे एवं आकर्षक कार्ड के माध्यम से एक दिन में करोड़ों रुपया एकत्रित हो जाता था। मतलब एक कार्डधारक को तीन हजार रुपया हर माह देना होता था। यदि आप दस कार्ड खरीद लिए तो ऐसे व्यक्ति को विशेष उपहार देने का प्रावधान था। कार्ड के खेल में शामिल सूत्रों की मानें तो एक बार में करीब एक हजार कार्ड निकाले गए थे।
विज्ञापन
सीधे एक ही दिन में तीन करोड़ रुपया एकत्रित होता था। इसमें जमा करा रहे कार्डधारकों को एक से डेढ़ प्रतिशत तक ब्याज मिलती थी जबकि इसके किसी सदस्य को अधिक पैसे की जरूरत होती तो उसे पांच से छह प्रतिशत मासिक ब्याज पर देने का प्रावधान था। इतना ही नहीं बल्कि यदि किसी ने 20 लाख रुपया लिया तो फिर उससे दो माह की ब्याज व पैसे जमा कराने की किश्त धनराशि देने के दौरान ही काट ली जाती थी।
विज्ञापन
इतना ही नहीं पैसा एक साथ हाथ में आ जाए इसके ही लिए सदस्यता लेने वालों में पुरुषों की तो काकटेल पार्टी भी होटल में हुआ करती थी। यही कारण था कि करोड़ों रुपया उसके ही हाथ में रहता था। कोई सदस्य दूरी नहीं बनाए इसी लिहाज से लकी ड्रा में लग्जरी कार एवं बाइक निकालने का ऑफर रखा जाता था।हर माह बंपर पुरस्कार से नवाजने का प्रावधान था। महंगी कार,बुलेट एवं दोपहिया वाहन तक पुरस्कार में निकाले जाते थे। एक बार में ढाई करोड़ तक के इनाम निकालने का ऑफर रखा जाता था।
ड्रा में ओडी कार निकलने की चर्चा
संजीव गुप्ता के लापता होने के बाद तमाम चर्चाएं बीसी और कार्ड के खेल को लेकर सामने आ रही हैं। चर्चा है कि कार्डों के खेल का एक ड्रा 11 जुलाई को हुआ था। इसमें बड़े इनाम रखे गए थे। पहले लकी ड्रा में ओडी कार थी। जिसकी यह कार निकली उसके द्वारा लगातार दवाब भी बनाया जा रहा था। अपुष्ट सूत्र बताते हैं कि कार्ड के खेल का संचालन करने वाले ने ओडी कार देने में हाथ खडे कर दिए थे।