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बहू की हत्या में सास को आजीवन कारावास
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मैनपुरी। थाना कुर्रा के गांव खिदरपुर में मार्च 2017 में पति की मौत के बाद बहू की जलाकर हत्या करने वाली सास को जिला जज तेजप्रताप तिवारी ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पाए जाने पर उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जिला कन्नौज के थाना तालग्राम के रनवा निवासी बालकराम ने अपनी पुत्री रेशमा की शादी वर्ष 2000 में सतेंद्र निवासी खिदरपुर थाना कुर्रा के साथ की थी। वर्ष 2005 में सतेंद्र की मार्ग दुर्घटना में मौत हो गई।
पति की मौत केे बाद ससुराल के लोगों ने रेशमा का उत्पीड़न शुरू कर दिया। 29 मार्च 2017 को रेशमा को ससुराल के लोगों ने केरोसिन डालकर जला दिया। चार जुलाई 2017 को उसकी मौत हो गई। रेशमा के पिता ने सास रामबेटी, ससुर रामेश्वर, ननद सविता और परिवार के सदस्य संतोष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी।
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पुलिस ने सास और ससुर के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। ननद और संतोष का नाम पुलिस ने झूठा पाकर निकाल दिया। मुकदमे की सुनवाई जिला जज तेजप्रताप तिवारी की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से वादी, विवेचक, चिकित्सक सहित गवाहों ने रामबेटी केे खिलाफ कोर्ट में गवाही दी। रामबेटी को दोषी पाया गया। डीजीसी वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने कड़ी सजा देने की दलील दी। जिला जज ने रामबेटी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
जेल में रहकर लड़ा पूरा मुकदमा
रामबेटी को पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया। उसकी किसी भी अदालत से जमानत मंजूर नहीं हुई। उसको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। शुक्रवार को निर्णय सुनने के लिए उसको जेल से ही अदालत में लाया गया। सजा होने पर उसको अदालत से ही जेल भेज दिया गया।
मुकदमे के दौरान हुई मौत
डीजीसी वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया रेशमा के ससुर रामेश्वर के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट भेजी थी। उनकी मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। रेशमा ने मृत्यु पूर्व बयान में ननद और संतोष का नाम नहीं लिया। पुलिस ने उनको निर्दोष मानकर नाम निकाल दिया।
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जिला कन्नौज के थाना तालग्राम के रनवा निवासी बालकराम ने अपनी पुत्री रेशमा की शादी वर्ष 2000 में सतेंद्र निवासी खिदरपुर थाना कुर्रा के साथ की थी। वर्ष 2005 में सतेंद्र की मार्ग दुर्घटना में मौत हो गई।
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पति की मौत केे बाद ससुराल के लोगों ने रेशमा का उत्पीड़न शुरू कर दिया। 29 मार्च 2017 को रेशमा को ससुराल के लोगों ने केरोसिन डालकर जला दिया। चार जुलाई 2017 को उसकी मौत हो गई। रेशमा के पिता ने सास रामबेटी, ससुर रामेश्वर, ननद सविता और परिवार के सदस्य संतोष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी।
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पुलिस ने सास और ससुर के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। ननद और संतोष का नाम पुलिस ने झूठा पाकर निकाल दिया। मुकदमे की सुनवाई जिला जज तेजप्रताप तिवारी की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से वादी, विवेचक, चिकित्सक सहित गवाहों ने रामबेटी केे खिलाफ कोर्ट में गवाही दी। रामबेटी को दोषी पाया गया। डीजीसी वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने कड़ी सजा देने की दलील दी। जिला जज ने रामबेटी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
जेल में रहकर लड़ा पूरा मुकदमा
रामबेटी को पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया। उसकी किसी भी अदालत से जमानत मंजूर नहीं हुई। उसको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। शुक्रवार को निर्णय सुनने के लिए उसको जेल से ही अदालत में लाया गया। सजा होने पर उसको अदालत से ही जेल भेज दिया गया।
मुकदमे के दौरान हुई मौत
डीजीसी वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया रेशमा के ससुर रामेश्वर के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट भेजी थी। उनकी मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। रेशमा ने मृत्यु पूर्व बयान में ननद और संतोष का नाम नहीं लिया। पुलिस ने उनको निर्दोष मानकर नाम निकाल दिया।