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एससी का बनकर खरीदी जमीन को सामान्य जाति का बनकर बेचा
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कासगंज। जिले में भूमि घोटाले के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। गंगागढ़ भूमि का मामला काफी समय से चल रहा है। अब यह मामला राजस्व परिषद लखनऊ भी पहुंच गया है। राजस्व परिषद के समक्ष पहुंची शिकायत की जांच पड़ताल जिलाधिकारी को करने के निर्देश दिए गए हैं। अब जिलाधिकारी मामले की जांच करेंगे।
नन्नू सिंह वर्मा ने राजस्व परिषद को की गई शिकायत में कहा कि नायब तहसीलदार सोरों ने मौजा गंगागढ़ की पत्रावली सरमुख सिंह बनाम बलवंत सिंह, राकेश कुमार बनाम संतोष सिंह में नियमविरुद्ध आदेश पारित किए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि गंगागढ़ के अनुसूचित जाति के कई व्यक्ति जो भूमिहीन थे उन्हें असिंचित बंजर भूमि पट्टे में प्राप्त हुई थी। वर्ष 1997 में पट्टेदारों को भूमि के संक्रमणीय अधिकार प्राप्त हो गए तो उन्होंने भूमि बिक्री कर दी, लेकिन जिन लोगों ने यह जमीन खरीदी उन्होंने अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन क्रय करने की कोई अनुमति नहीं ली और क्रेता पक्ष ने अपने आप को अनुसूचित जाति का दर्शा दिया। बाद में यही भूमि वर्ष 2012 में अपने आप को सामान्य दर्शा कर राकेश कुमार के हक में कर दिया। शिकायत में कहा गया है कि क्रेता पहले अनुसूचित जाति के बन गए और बाद में सामान्य जाति का बनकर बिक्री कर दी। नायब तहसीलदार ने इस मामले में शिकायतों की अनदेखी करते हुए क्रेता के पक्ष में दाखिल खारिज कर दिया गया। उन्होंने भूमि कब्जा मुक्त कराकर राज्य सरकार में निहित करने की मांग की। इस मामले में उपभूमि व्यवस्था आयुक्त भीष्म लाल वर्मा ने जिलाधिकारी को एक सप्ताह में जांच करने के निर्देश दिए हैं।
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नन्नू सिंह वर्मा ने राजस्व परिषद को की गई शिकायत में कहा कि नायब तहसीलदार सोरों ने मौजा गंगागढ़ की पत्रावली सरमुख सिंह बनाम बलवंत सिंह, राकेश कुमार बनाम संतोष सिंह में नियमविरुद्ध आदेश पारित किए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि गंगागढ़ के अनुसूचित जाति के कई व्यक्ति जो भूमिहीन थे उन्हें असिंचित बंजर भूमि पट्टे में प्राप्त हुई थी। वर्ष 1997 में पट्टेदारों को भूमि के संक्रमणीय अधिकार प्राप्त हो गए तो उन्होंने भूमि बिक्री कर दी, लेकिन जिन लोगों ने यह जमीन खरीदी उन्होंने अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन क्रय करने की कोई अनुमति नहीं ली और क्रेता पक्ष ने अपने आप को अनुसूचित जाति का दर्शा दिया। बाद में यही भूमि वर्ष 2012 में अपने आप को सामान्य दर्शा कर राकेश कुमार के हक में कर दिया। शिकायत में कहा गया है कि क्रेता पहले अनुसूचित जाति के बन गए और बाद में सामान्य जाति का बनकर बिक्री कर दी। नायब तहसीलदार ने इस मामले में शिकायतों की अनदेखी करते हुए क्रेता के पक्ष में दाखिल खारिज कर दिया गया। उन्होंने भूमि कब्जा मुक्त कराकर राज्य सरकार में निहित करने की मांग की। इस मामले में उपभूमि व्यवस्था आयुक्त भीष्म लाल वर्मा ने जिलाधिकारी को एक सप्ताह में जांच करने के निर्देश दिए हैं।
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