फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   crime, dress, uniform, comission

कमीशनखोरी के चक्कर में शासन के आदेश ताक पर

Tue, 30 Jul 2019 11:18 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jul 2019 11:18 PM IST
विज्ञापन
crime, dress, uniform, comission
बेसिक स्कूलों में बांटी जाने वाली नि:शुल्क ड्रेस का सैंपल चित्र- अमर उजाला - फोटो : ETAH
एटा। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्ध प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में ड्रेस वितरण के नाम पर फिर कमीशनखोरी का खेल शुरू हो गया है। शासन ने स्कूलों को 300 रुपये में सिलवाकर ड्रेस बांटने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जिले में 250 में रेडीमेड ड्रेस खरीदकर बांटी जा रही है। अधिकारियों की शह पर ठेकेदार पूरे खेल को अंजाम दे रहे हैं।
विज्ञापन

नए वित्तीय वर्ष 2019-20 में शासन ने नि:शुल्क ड्रेस की गुणवत्ता तय करने के लिए राशि में इजाफा किया है। पिछले साल तक 200 रुपये प्रति ड्रेस जगह इस बार 300 रुपये में ड्रेस बांटने के निर्देश दिए थे। स्कूल की प्रबंध समिति को सिलवाकर हर बच्चे को दो सेट देना है। मगर जिले के अधिकारियों ने इसमें कमीशनखोरी शुरू कर दी है। जिले के हर ब्लॉक में ठेकेदार तय कर दिए गए हैं। जिनके जरिए स्कूलों में रेडीमेड ड्रेस पहुंचाई जा रही है। ठेकेदार 250 रुपये में ड्रेस दे रहे हैं। साथ ही अधिकारी स्कूलों में पहुंचकर रेडीमेड ड्रेस का वितरण कर शासन को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर नि:शुल्क यूनिफार्म वितरण मजाक बन गया है।
विज्ञापन

ऐसे चलता है खेल
ठेकेदारों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से सांठ-गांठ कर ली है। अधिकारी जिन स्कूलों में ड्रेस नहीं पहुंचती है, वहां की रिपोर्ट ठेकेदार को देते हैं। इसके बाद स्कूल के प्रधानाध्यापक को ठेकेदार से ड्रेस लेने के लिए कहा जाता है। नाम न छापने की शर्त पर एक प्रधानाध्यापक ने बताया कि अगर ठेकेदार से ड्रेस न लो तो निरीक्षण के नाम पर परेशान किया जाता है। बैठकों में भी शिक्षकों पर दबाव बनाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बदल-बदलकर दौड़ती है गाड़ियां
ठेकेदार जिले के ब्लॉकों में गाड़ियां बदल-बदलकर दौड़ते हैं। गाड़ियों में ड्रेस भरकर स्कूलों में जबरन दे दी जाती हैं। हर रूट के लिए अलग गाड़ी का इंतजाम होता है।
स्वयं सहायता समूह के आदेश नदारद
जिले में पिछले साल स्वयं सहायता समूह से ड्रेस सिलवाकर वितरित कराई गई थीं। लेकिन इस बार स्वयं सहायता समूहों को किनारे कर दिया गया है। ताकि कमीशनखोरी ठीक हो सके।
ये हैं शासन के निर्देश
शासन की अपर प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने पिछले दिनों निर्देश जारी किए थे। जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी अधिकारी शिक्षकों पर ड्रेस खरीदने के लिए दबाव नहीं बनाएगा, लेकिन जिले में निर्देश ताक पर हैं।

ये है कपड़े का मानक
शासन ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कपड़े का मानक बदला है। इस बार 67 फीसदी कॉटन और 33 फीसदी पॉलिस्टर वाला कपड़ा मान्य किया गया है।
फोटो खिंचाकर कोरम पूरा
जिले के तमाम विद्यालयों में ड्रेस वितरण पूरा दिखा दिया गया है, लेकिन अब तक किसी भी स्कूल में आपूर्ति पूरी नहीं हुई है। कपड़े की आपूर्ति नहीं होने से 15-20 ड्रेस बांटकर फोटो खिंचाकर कोरम पूरा किया जा रहा है। विभाग के बड़े अधिकारी भी इसे लेकर मौन हैं।
कहते हैं आंकड़े
1800 से अधिक बेसिक स्कूल हैं जिले में
300 रुपये प्रति ड्रेस करना है खर्च
250 रुपये में बांटी जा रही ड्रेस
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed