आगरा: प्रशासनिक आंकड़ों में हेराफेरी के आरोप, मौत के 20 से 25 दिन बाद दर्ज हुईं 19 मरीजों की मृत्यु रिपोर्ट
पिछले साल भी कोविड पोर्टल पर मरीजों के गलत आंकड़े अपडेट होने पर प्रशासन की फजीहत हो चुकी है। तब एक-एक मरीज के आंकड़े दो बार फीड किए थे। जांच में पकड़े जाने के बाद फिर इन्हें दोबारा अपडेट कर कम किया गया था।
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आगरा प्रशासन के आंकड़ों में भी झोल है। उस पर हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं। जिन मरीजों की मौत अप्रैल के अंतिम सप्ताह में हुई थी उनकी मृत्यु रिपोर्ट शासन के पोर्टल पर 20 से 25 दिन बाद अब दर्ज की गई। पिछले 48 घंटे में प्रशासन ने 19 मौतें दर्ज की हैं जबकि बीते 24 घंटे में एसएन में किसी संक्रमित ने दम नहीं तोड़ा है।
ताजनगरी में 25 से 30 अप्रैल तक ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा रहा। तब 19 मरीजों की मौत हो गई। इनकी रिपोर्ट अब सामने आई हैं। बुधवार को प्रशासन ने नौ मरीज और बृहस्पतिवार को दस मरीजों की मौत बताई है। यानी 48 घंटे में 19 मौतें सार्वजनिक की गई हैं। जबकि पिछले दस दिनों में संक्रमण में जबर्दस्त गिरावट आई है। अस्पतालों में ऑक्सीजन संकट नहीं है। बहुत कम मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जब दूसरी लहर अपने चरम पर थी तब इतनी मौतें नहीं हुई तो अब कैसे हो रही हैं।
पहले भी हो चुकी है गलत फीडिंग
पिछले साल भी कोविड पोर्टल पर मरीजों के गलत आंकड़े अपडेट होने पर प्रशासन की फजीहत हो चुकी है। तब एक-एक मरीज के आंकड़े दो बार फीड किए थे। जांच में पकड़े जाने के बाद फिर इन्हें दोबारा अपडेट कर कम किया गया था।
24 घंटे में नहीं हुई कोई मौत
ये सभी मौतें अप्रैल के अंतिम सप्ताह की है। तब इन्हें कोविड पोर्टल पर दर्ज नहीं किया जा सका था। ऑपरेटर की कमी थी। एक-एक मरीज की डेथ ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद इन्हें पोर्टल पर दर्ज किया है। पिछले 24 घंटे में एसएन में किसी संक्रमित की मृत्यु नहीं हुई है। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी, आगरा
महिला की मौत के 17 दिन आई जांच रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन की लापरवाही की एक नजीर और देखिए। 20 अप्रैल को जिस महिला ने जांच के लिए सैंपल दिए थे। उसकी 22 अप्रैल को मौत हो गई। 17 दिन बाद 9 मई को महिला की जांच रिपोर्ट आई तो पूरा परिवार चौंक गया। स्वास्थ्य विभाग इसे अब लिपिकीय त्रुटि बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।
गढ़ी भदौरिया, शकुंतला नगर निवासी 52 वर्षीय मीरा देवी की तबियत 20 अप्रैल को बिगड़ गई। पुत्र महेंद्र ने बताया कि मैंने घर के नजदीक एक चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने कोरोना टेस्ट कराने को कहा। उसी दिन 20 अप्रैल को आईएसबीटी स्थित बूथ पर जांच कराई तो वहां एंटीजन रिपोर्ट नेगेटिव आई। परंतु मां की तबियत में सुधार नहीं था। फिर एक प्राइवेट अस्पताल में जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव बताकर उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती करने के लिए कहा गया। रातभर भटकने के बाद दूसरे दिन एक छोटे अस्पताल में मैंने परिवार को भर्ती किया। जहां दूसरे दिन 22 अप्रैल को मां की मौत हो गई।
मृतक के पुत्र महेंद्र ने बताया कि मां की मौत के बाद वो लगातार रोजाना अपनी और अपने पिता और मां की आरटीपीसीआर रिपोर्ट को ऑनलाइन सरकारी पोर्टल पर चेक करते रहे। 26 अप्रैल को उनकी और पिता की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन मां मीरा देवी की रिपोर्ट नहीं आई। 19 दिन बाद 9 मई को मां की रिपोर्ट ऑनलाइन दिखी। सेंपल कलेक्शन की डेट 9 मई 2021 लिखी थी। उसी दिन टेस्ट रिपोर्ट जारी की गई। जबकि एक दिन में जांच रिपोर्ट कैसे आ सकती है। अब सवाल उठता है कि मृत महिला ने जो एंटीजन सेंपल 20 अप्रैल को दी थी। उसकी रिपोर्ट 19 दिन बाद कैसे आई। इतने दिन सैंपल कहां था।
लिपिकीय त्रुटि, जांच की जाएगी
ऐसा लगर रहा है कि यह लिपिकीय त्रुटि की वजह से हुआ है, पोर्टल पर रिपोर्ट फीड करने में कोई गलती हुई है। गलती कैसे हुई इसकी जांच की जाएगी। - डॉ. आरसी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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