कोविड गाइडलाइन: बैंड-बाजा वालों को राहत, शादी में बजा सकेंगे धुन, नियमों का करना होगा पालन
- कोविड गाइडलाइन: बरात निकालने पर रोक, समारोह स्थल परिसर के अंदर ही उचित दूरी पर बजेगा बैंड
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आगरा के जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह और एसएसपी बबलू कुमार ने बैंड-बाजे वालों को राहत देते हुए उनसे प्रतिबंध हटा लिया है। अब सिर्फ 10 बैंड वाले ही उचित दूरी बनाते हुए शादी समारोह में धुन बजा सकेंगे। इन्हें 100 अतिथियों में ही शामिल माना जाएगा। बैंड वालों की संख्या 10 से अधिक होने पर कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने शनिवार को शादी समारोह में 100 अतिथियों की संख्या तय की थी। बैंड-बाजे और डीजे पर रोक लगाई थी। रविवार को बैंड बाजा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्थानीय मंत्री और सांसद से राहत की गुहार लगाई। जनप्रतिनिधियों ने इस संबंध में प्रशासन से वार्ता की।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह और एसएसपी बबलू कुमार ने समीक्षा के बाद बैंड कर्मियों की संख्या तय की। एडीएम सिटी डॉ. प्रभाकांत अवस्थी ने बताया कि बैंड वालों की बुकिंग पहले से हो चुकी थी। इसलिए 10 बैंड वालों को शादी में बजाने की अनुमति दी गई है। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। साउंड सिस्टम, डीजे नहीं बजेगा। सड़क परबैंड नहीं बजेगा। सिर्फ समारोह परिसर के अंदर ही बैंड होगा।
छह फीट की दूरी होना जरूरी
संचालकों ने पूछा कि बैंड वाले मास्क नहीं लगाएंगे। अगर मास्क लगाएंगे तो फिर बैंड कैसे बजाएंगे। इस पर एडीएम सिटी ने बताया कि बैंड कर्मी मास्क लगाकर बैंड नहीं बजा सकते इसलिए उनके बीच छह फीट की दूरी होना जरूरी है। बैंड कर्मियों से संक्रमण फैलने पर आयोजन पक्ष जिम्मेदार होगा। उचित दूरी का पालन नहीं होने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
‘शादी में सौ लोगों के प्रतिबंध पर पुनर्विचार करे प्रशासन’
जिलाधिकारी के शादी समारोह में 100 लोगों की ही अनुमति के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग ‘जागो आगरा’ संस्था के पदाधिकारियों ने की है। संस्थापक मनीष अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि कोरोना बचाव के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराए, जिससे लोग अपनी सुरक्षा करते हुए अनुशासित रहें।
बाजारों में शनिवार व रविवार को शाम छह बजे की बंदी करवाएं। धार्मिक, राजनीतिक सभाओं पर रोक लगाएं। उन्होंने कहा कि विवाहों में पहले से ही लोगों को आमंत्रित किया जा चुका है। ऐसे में इसके लिए कुछ मोहलत देनी चाहिए। मदन गर्ग ने भी फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।