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UP News: दरोगा के हत्यारे को आजीवन कारावास की सजा, झगड़े की सूचना पर पहुंचे थे; दिनदहाड़े मारी थी गोली

Thu, 11 Jul 2024 10:01 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 11 Jul 2024 10:01 AM IST
सार

ताजनगरी के खंदौली थाना क्षेत्र के नहर्रा गांव में 24 मार्च 2021 को वारदात हुई थी। भाइयों के बीच झगड़े की सूचना पर दरोगा प्रशांत यादव पहुंचे थे। हत्यारे ने गोली मार दी थी। 

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court sentenced inspector's murderer to life imprisonment in Agra
दरोगा प्रशांत यादव (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में 24 मार्च 2021 को भाइयों के विवाद की सूचना पर पहुंचे दरोगा प्रशांत यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। चर्चित मामले में सोमवार को कोर्ट का फैसला आ गया। जिला जज विवेक संगल ने हत्या में आरोपी विश्वनाथ को दोषी पाया। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 17 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण यह रहा कि जिस भाई ने सूचना दी थी, वह अपने पूर्व के बयान से मुकर गया। इसके बावजूद कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

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घटना खंदौली थाना क्षेत्र के नहर्रा गांव की है। गांव में विजय सिंह के बेटे शिवनाथ और विश्वनाथ के बीच आलू के हिस्से को लेकर विवाद चल रहा था। खेत में आलू की खुदाई चल रही थी। विश्वनाथ तमंचा लेकर पहुंचा था। मजदूरों को धमका रहा था। 24 मार्च 2021 को शिवनाथ की सूचना पर खंदौली थाने के दरोगा प्रशांत यादव और सिपाही चंद्रसेन पहुंचे थे। 

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तमंचा लेकर घूम रहे विश्वनाथ को दरोगा ने पीछा करके पकड़ने का प्रयास किया था। उसने दरोगा पर गोली चला दी थी। दरोगा की गर्दन में गोली लगने से मौत हो गई थी। मामले में सिपाही चंद्रसेन की तहरीर पर हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने 27 मार्च को आरोपी विश्वनाथ को बाह स्थित कमतरी पुल से गिरफ्तार किया था। 
 
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पुलिस ने आरोपी से दो तमंचे बरामद किए थे। मामले में तत्कालीन एसओ अरविंद निर्वाल ने विवेचना की। मामला काफी चर्चित हुआ था। इस पर विवेचना क्राइम ब्रांच में तैनात निरीक्षक राजेश्वर त्यागी को दे दी गई। उन्होंने विश्वनाथ को कस्टडी रिमांड पर लेकर पिस्टल बरामद की थी।
 
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गवाह बना भाई हो गया था पक्षद्रोही

मामले के विचारण के दौरान पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं जिला शासकीय अधिवक्ता बसंत कुमार गुप्ता के तर्क पर जिला जज ने आरोपी को हत्या एवं आयुध अधिनियम के तहत दोषी पाया। इस पर आजीवन कारावास के साथ 17 हजार रुपये के दंड से दंडित किया। कोर्ट ने जानलेवा हमला और सरकारी कार्य में बाधा के आरोप से आरोपी को बरी कर दिया। 
 

जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि 12 गवाह पेश किए गए थे। इसमें चंद्रसेन वादी थे। वह मुख्य गवाह रहे। घटनास्थल पर आरोपी का भाई शिवनाथ भी था। पुलिस ने भाई की गवाही कराई। बाद में भाई पूर्व में दी गई गवाही से मुकर गया। पक्षद्रोही हो गया। आरोपी की ओर से सफाई साक्ष्य के रूप में गवाह पेश किए। इनको कोर्ट ने अविश्वसनीय माना।
 

तीन साल से जेल में निरुद्ध है विश्वनाथ

जानकारी के मुताबिक, आरोपी विश्वनाथ 3 साल से जेल में निरुद्ध है। उसने कोर्ट में कहा था कि वह 53 साल का है। पत्नी और दो बेटे हैं। उसे कम से कम सजा से दंडित किया जाए। परिवार का पालन करने वाला और कोई नहीं है।
 

पहले समझाकर किया था शांत

खंदौली के गांव नहर्रा निवासी विजय सिंह ने अपने खेतों को बंटवारा बेटों शिवनाथ और विश्वनाथ के बीच किया था। 10 बीघा भूमि दी थी। सात बीघा अपने पास रख ली थी। खेतों से आलू निकालने के दौरान विवाद हुआ था। सुबह सूचना पर पुलिस पहुंची थी। मामले को समझाबुझाकर शांत करा दिया। मगर, विश्वनाथ तमंचा लिया था। इसके बाद मजदूरों को धमकाने लगा था।

50 हजार का इनाम किया था घोषित

दरोगा की घटना के बाद लखनऊ तक मामला पहुंचा था। आरोपी की धरपकड़ के लिए 5 टीमें लगाई गई थी। विश्वनाथ की ससुराल हाथरस में है। पुलिस को सूचना मिली थी कि वह ससुराल में छिपा। इस पर एक टीम को वहां भेजा गया। मगर, वो वहां से भाग निकला था। बरहन और खंदौली में कई परिजन को उठाया था। 
 

तत्कालीन एसएसपी बबलू कुमार ने 50 हजार रुपये इनाम की घोषणा की थी। आरोपी की धरपकड़ के लिए मथुरा, फिरोजाबाद में भी टीमें गई थीं। पुलिस की जांच में सामने आया था कि विश्वनाथ भाई को बदमाशों से धमकाना चाहता था। अपनी ससुराल के पास से दो बदमाश बुलाए थे। घटना के दो दिन पहले ही गांव में आए थे।
 

दरोगा की याद में बना था प्रशांत मेमोरियल कक्ष

विश्वनाथ ने दरोगा प्रशांत कुमार की जान ली थी। वह बुलंदशहर के छतारी के रहने वाले थे। वर्ष 2005 में पुलिस में सिपाही भर्ती हुए थे। 10 वर्ष बाद दरोगा बने थे। घटना के बाद पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई थी। होली नहीं खेली गई थी। पुलिस लाइन में एक कक्ष का नाम दरोगा के नाम पर प्रशांत मेमोरियल कक्ष रखा गया था। यह नाम अभी तक है।
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