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असगर अली हत्याकांड में नया मोड़: पुलिस की जांच पर कोर्ट ने उठाए सवाल, अग्रिम विवेचना के दिए आदेश
Fri, 11 Sep 2026 09:56 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 11 Sep 2026 09:56 AM IST
सार
ट्रांसपोर्टर असगर अली हत्याकांड में पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोपी रवि यादव के प्रार्थनापत्र पर सीजेएम ने अग्रिम विवेचना और प्रभावी पर्यवेक्षण के आदेश दिए हैं। अदालत ने घटनास्थल के सीसीटीवी, वाहन के स्वामित्व व वास्तविक उपयोगकर्ता और कथित पुरानी रंजिश समेत कई बिंदुओं की जांच के निर्देश दिए हैं।
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कार की टक्कर से ट्रांसपोर्टर की माैत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
ट्रांसपोर्टर असगर अली हत्याकांड में पुलिस की विवेचना में गंभीर खामियां सामने आई हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शारिब अली ने मामले में अग्रिम विवेचना और प्रभावी पर्यवेक्षण के आदेश दिए हैं। जेल में बंद आरोपी रवि यादव ने आरोपपत्र पर सवाल उठाते हुए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
आरोपी रवि यादव ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने जांच निष्पक्ष रूप से नहीं की। नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी अजय यादव, उनकी जीएसटी अधिकारी पत्नी निवेदिता सिंह और अजय यादव के भाई अरुण यादव को बचाया गया है। रवि यादव के अनुसार, उसे झूठा फंसाया गया है, जबकि घटना परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। उसने अदालत में एक पेन ड्राइव भी प्रस्तुत की है, जिसमें अजय यादव के साथ सिग्नल एप पर हुई बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग और लिखित ट्रांसक्रिप्ट होने का दावा किया गया है।
अदालत ने रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है, लेकिन इसे विवेचना के लिए प्रासंगिक माना है। पुलिस की शुरुआती जांच में ही लीपापोती का आरोप लगा है। शक के घेरे में आए अधिकारियों के नाम विवेचना से हटा दिए गए। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी दरकिनार कर दिया गया। रवि यादव ने कहा है कि घटना वाला वाहन उसका नहीं था और वह उसे नहीं चला रहा था। कोरई टोल प्लाजा और अन्य स्थानों से कार के कई बार निकलने के सीसीटीवी फुटेज को जांच में शामिल नहीं किया गया। उसने ऑडियो रिकॉर्डिंग भी दी थी, जिसे पुलिस ने विवेचना का हिस्सा नहीं बनाया।
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अदालत ने दिए निर्देश
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस आयुक्त को अग्रिम विवेचना का प्रभावी पर्यवेक्षण स्वयं या किसी वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी से कराने के लिए कहा है। अदालत ने कई बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए हैं। इनमें घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का सत्यापन और परीक्षण शामिल है। वाहन के वर्तमान व पूर्व स्वामित्व, हस्तांतरण और वास्तविक उपयोगकर्ता की पुष्टि करने को कहा गया है। मृतक और अजय यादव, निवेदिता सिंह के बीच कथित पुरानी रंजिश की निष्पक्ष जांच के भी निर्देश दिए गए हैं।
यह था मामला
शाहगंज स्थित मल्ल का चबूतरा के पास 4 अप्रैल 2026 की तड़के ट्रांसपोर्टर असगर अली का शव सड़क किनारे मिला था। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि उन्हें एक कार ने टक्कर मारी थी। परिजन ने इसे हत्या बताया लेकिन पुलिस ने शुरुआत में इसे हादसा दर्शाया। बाद में पुलिस ने केस को हत्या में तरमीम किया। परिजन ने निवेदिता सिंह, अजय यादव, रवि यादव, कामरान वारसी और दिनेश सोलंकी पर शक जताया था। रवि यादव को 29 जुलाई से जेल में रखा गया है।
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आरोपी रवि यादव ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने जांच निष्पक्ष रूप से नहीं की। नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी अजय यादव, उनकी जीएसटी अधिकारी पत्नी निवेदिता सिंह और अजय यादव के भाई अरुण यादव को बचाया गया है। रवि यादव के अनुसार, उसे झूठा फंसाया गया है, जबकि घटना परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। उसने अदालत में एक पेन ड्राइव भी प्रस्तुत की है, जिसमें अजय यादव के साथ सिग्नल एप पर हुई बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग और लिखित ट्रांसक्रिप्ट होने का दावा किया गया है।
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अदालत ने रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है, लेकिन इसे विवेचना के लिए प्रासंगिक माना है। पुलिस की शुरुआती जांच में ही लीपापोती का आरोप लगा है। शक के घेरे में आए अधिकारियों के नाम विवेचना से हटा दिए गए। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी दरकिनार कर दिया गया। रवि यादव ने कहा है कि घटना वाला वाहन उसका नहीं था और वह उसे नहीं चला रहा था। कोरई टोल प्लाजा और अन्य स्थानों से कार के कई बार निकलने के सीसीटीवी फुटेज को जांच में शामिल नहीं किया गया। उसने ऑडियो रिकॉर्डिंग भी दी थी, जिसे पुलिस ने विवेचना का हिस्सा नहीं बनाया।
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अदालत ने दिए निर्देश
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस आयुक्त को अग्रिम विवेचना का प्रभावी पर्यवेक्षण स्वयं या किसी वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी से कराने के लिए कहा है। अदालत ने कई बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए हैं। इनमें घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का सत्यापन और परीक्षण शामिल है। वाहन के वर्तमान व पूर्व स्वामित्व, हस्तांतरण और वास्तविक उपयोगकर्ता की पुष्टि करने को कहा गया है। मृतक और अजय यादव, निवेदिता सिंह के बीच कथित पुरानी रंजिश की निष्पक्ष जांच के भी निर्देश दिए गए हैं।
यह था मामला
शाहगंज स्थित मल्ल का चबूतरा के पास 4 अप्रैल 2026 की तड़के ट्रांसपोर्टर असगर अली का शव सड़क किनारे मिला था। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि उन्हें एक कार ने टक्कर मारी थी। परिजन ने इसे हत्या बताया लेकिन पुलिस ने शुरुआत में इसे हादसा दर्शाया। बाद में पुलिस ने केस को हत्या में तरमीम किया। परिजन ने निवेदिता सिंह, अजय यादव, रवि यादव, कामरान वारसी और दिनेश सोलंकी पर शक जताया था। रवि यादव को 29 जुलाई से जेल में रखा गया है।