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UP: पॉक्सो और दुष्कर्म केस में भी लापरवाही, कोर्ट ने इन एसीपी के खिलाफ कार्रवाई का दिया आदेश
Sun, 31 May 2026 10:08 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sun, 31 May 2026 10:08 AM IST
सार
सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट मामले की विवेचना में लापरवाही को लेकर अदालत ने तत्कालीन एसीपी इमरान अहमद के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने समयसीमा का पालन न करने और विवेचना में गंभीर अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए भविष्य में उन्हें ऐसे मामलों की जांच न देने के निर्देश भी दिए हैं।
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agra police
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और दलित उत्पीड़न मामले की विवेचना में लापरवाही बरतने और विधि के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में विशेष न्यायाधीश एससी/ एसटी एक्ट शिव कुमार ने तत्कालीन एसीपी इमरान अहमद के खिलाफ पुलिस आयुक्त को विभागीय जांच कर आख्या देने के आदेश दिए गए हैं। भविष्य में विवेचना भी न देने के निर्देश दिए हैं।
इरादतनगर थाने में 17 मार्च को सामूहिक दुष्कर्म ,पॉक्सो एक्ट और दलित उत्पीड़न के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विवेचना तत्कालीन एसीपी शमसाबाद इमरान अहमद को सौंपी गई। अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की है कि विधि के अनुसार, ऐसे मामलों में आरोपपत्र या अंतिम रिपोर्ट (एफआर) विवेचना के दो महीने के अंदर प्रस्तुत की जानी चाहिए थी। विवेचक इमरान अहमद ने इस समय सीमा का पालन नहीं किया गया।
अदालत ने विवेचक के इस आचरण को गंभीर माना। लिखा कि ऐसा प्रतीत होता है कि विवेचक अभियुक्तों से मिले हुए हैं और उन्हें अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं। इससे पहले भी इसी विवेचक के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने के लिए विभाग को पत्र प्रेषित किया गया था लेकिन उसके संबंध में आज तक कोई जानकारी नहीं दी गई है।
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इरादतनगर थाने में 17 मार्च को सामूहिक दुष्कर्म ,पॉक्सो एक्ट और दलित उत्पीड़न के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विवेचना तत्कालीन एसीपी शमसाबाद इमरान अहमद को सौंपी गई। अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की है कि विधि के अनुसार, ऐसे मामलों में आरोपपत्र या अंतिम रिपोर्ट (एफआर) विवेचना के दो महीने के अंदर प्रस्तुत की जानी चाहिए थी। विवेचक इमरान अहमद ने इस समय सीमा का पालन नहीं किया गया।
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अदालत ने विवेचक के इस आचरण को गंभीर माना। लिखा कि ऐसा प्रतीत होता है कि विवेचक अभियुक्तों से मिले हुए हैं और उन्हें अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं। इससे पहले भी इसी विवेचक के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने के लिए विभाग को पत्र प्रेषित किया गया था लेकिन उसके संबंध में आज तक कोई जानकारी नहीं दी गई है।
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