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यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर को कोर्ट ने बताया नाकाबिल, लगाई ऐसी फटकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 17 Jan 2018 05:10 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : amar ujala
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ऐसा प्रतीत होता है कि आपको विधि का ज्ञान नहीं है...। आगरा के अछनेरा थाना के प्रभारी निरीक्षक पर यह टिप्पणी है कोर्ट की। मामला गैर इरादतन हत्या के मामले में गैरहाजिर चल रहे गवाह को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश न कराने का है।
इंस्पेक्टर ने वारंट तामील कराने के लिए दरोगा के बजाय सिपाही को दे दिया। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
केस राज्य बनाम बुद्धू उर्फ हनीफ खां वर्ष 2013 से लंबित है। कोर्ट से कई बार गवाह को बुलाया गया। वह नहीं आया। उसे सम्मन जारी किए गए। इसके बाद वारंट और फिर गैर जमानती वारंट भी।
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इंस्पेक्टर ने वारंट तामील कराने के लिए दरोगा के बजाय सिपाही को दे दिया। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
केस राज्य बनाम बुद्धू उर्फ हनीफ खां वर्ष 2013 से लंबित है। कोर्ट से कई बार गवाह को बुलाया गया। वह नहीं आया। उसे सम्मन जारी किए गए। इसके बाद वारंट और फिर गैर जमानती वारंट भी।
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इसके बावजूद पुलिस उसे कोर्ट में पेश न करा सकी। वारंट की तामीलात कोर्ट को भेज दी गई। यह सिपाही से तामील कराया गया। इस पर अपर जिला जज शकील उर्रहमान ने अछनेरा थाना के एसएचओ को कार्रवाई नोटिस जारी किया है।
इसमें चेतावनी दी गई है कि वह तीन दिन के भीतर स्वयं कोर्ट में हाजिर होकर स्पष्टीकरण दें कि क्यों न आपके विरुद्ध एसएसपी को लिखा जाए कि आपका थानाध्यक्ष कार्य संपादन करने के योग्य नहीं है।
साथ ही गवाहों को 23 जनवरी तक कोर्ट में आवश्यक रूप से प्रस्तुत करने की हिदायत दी है। उधर, यह पहला मौका नहीं है जब कोर्ट को सख्त रुख अपनाना पड़ा। कई मामलों में तो पुलिसकर्मी खुद ही गवाही के लिए कोर्ट नहीं पहुंच रहे हैं।
इसमें चेतावनी दी गई है कि वह तीन दिन के भीतर स्वयं कोर्ट में हाजिर होकर स्पष्टीकरण दें कि क्यों न आपके विरुद्ध एसएसपी को लिखा जाए कि आपका थानाध्यक्ष कार्य संपादन करने के योग्य नहीं है।
साथ ही गवाहों को 23 जनवरी तक कोर्ट में आवश्यक रूप से प्रस्तुत करने की हिदायत दी है। उधर, यह पहला मौका नहीं है जब कोर्ट को सख्त रुख अपनाना पड़ा। कई मामलों में तो पुलिसकर्मी खुद ही गवाही के लिए कोर्ट नहीं पहुंच रहे हैं।