{"_id":"5e1762808ebc3e87ed670b83","slug":"court-father-son-mainpuri-news-agr4240059134","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटे का झूठ भी पिता को नहीं बचा सका उम्रकैद से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटे का झूठ भी पिता को नहीं बचा सका उम्रकैद से
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। पिता को सजा से बचाने के लिए अदालत में दी गई झूठी गवाही भी काम नहीं आई। अदालत में हुई गवाही के आधार पर पिता को जब आजीवन कारावास की सजा हुई तो बेटे की आंखों से आंसू निकल आए।
थाना कुरावली के गांव तिमनपुर निवासी कश्मीर सिंह ने अपनी मां नारायणी देवी की घर में ही 28 मई 2012 को फावड़े से काटकर हत्या कर दी थी। इस मामले में कश्मीर के 11 वर्षीय पुत्र गजेंद्र ने पुलिस को पिता के खिलाफ गवाही दी थी। पुलिस ने गजेंद्र को भी मुकदमे में चश्मदीद गवाह बनाया था। आठ साल बाद जब अदालत में गवाही हुई तो गजेंद्र 18 साल का हो गया। उसके पिता आठ साल से जेल में बंद थे। गजेंद्र जब भी अदालत आता तो अपने पिता से मिलता। धीरे-धीरे पिता पुत्र के बीच की दूरी मिटने लगी। स्पेशल जज ईसी एक्ट की कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के दौरान गजेंद्र की गवाही हुई तो वह पुलिस को दी गई गवाही से मुकर गया। उसने पुलिस को दी गई गवाही को अदालत में झुठला दिया। पिता को सजा से बचाने के लिए पुत्र द्वारा अदालत में दी गई झूठी गवाही भी काम नहीं आई। पिता को जब सजा हुई तो वह अदालत में ही रोने लगा।
पड़ोसी ने रिपोर्ट लिखाकर दी गवाही
कश्मीर ने जब अपनी मां नारायणी देवी की हत्या की तो उसके 11 साल के पुत्र गजेंद्र और सात साल के पुत्र रमन ने रोते हुए पड़ोसी राकेश कुमार के घर पहुंचकर पूरी बात बताई थी। राकेश ने ही पुलिस को सूचना दी थी। कश्मीर की पत्नी घर पर नहीं थी। राकेश की सूचना और तहरीर पर ही पुलिस ने कश्मीर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। राकेश ने कश्मीर के खिलाफ अदालत में भी गवाही दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
थाना कुरावली के गांव तिमनपुर निवासी कश्मीर सिंह ने अपनी मां नारायणी देवी की घर में ही 28 मई 2012 को फावड़े से काटकर हत्या कर दी थी। इस मामले में कश्मीर के 11 वर्षीय पुत्र गजेंद्र ने पुलिस को पिता के खिलाफ गवाही दी थी। पुलिस ने गजेंद्र को भी मुकदमे में चश्मदीद गवाह बनाया था। आठ साल बाद जब अदालत में गवाही हुई तो गजेंद्र 18 साल का हो गया। उसके पिता आठ साल से जेल में बंद थे। गजेंद्र जब भी अदालत आता तो अपने पिता से मिलता। धीरे-धीरे पिता पुत्र के बीच की दूरी मिटने लगी। स्पेशल जज ईसी एक्ट की कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के दौरान गजेंद्र की गवाही हुई तो वह पुलिस को दी गई गवाही से मुकर गया। उसने पुलिस को दी गई गवाही को अदालत में झुठला दिया। पिता को सजा से बचाने के लिए पुत्र द्वारा अदालत में दी गई झूठी गवाही भी काम नहीं आई। पिता को जब सजा हुई तो वह अदालत में ही रोने लगा।
विज्ञापन
पड़ोसी ने रिपोर्ट लिखाकर दी गवाही
कश्मीर ने जब अपनी मां नारायणी देवी की हत्या की तो उसके 11 साल के पुत्र गजेंद्र और सात साल के पुत्र रमन ने रोते हुए पड़ोसी राकेश कुमार के घर पहुंचकर पूरी बात बताई थी। राकेश ने ही पुलिस को सूचना दी थी। कश्मीर की पत्नी घर पर नहीं थी। राकेश की सूचना और तहरीर पर ही पुलिस ने कश्मीर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। राकेश ने कश्मीर के खिलाफ अदालत में भी गवाही दी।
विज्ञापन