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Agra News: गवाही से पहले हो गई वादी की मौत, प्रत्यक्षदर्शी भी मुकरे; साक्ष्य के अभाव में हत्या के छह आरोपी बरी

Wed, 30 Aug 2023 12:39 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Wed, 30 Aug 2023 12:39 PM IST
सार

आगरा में गवाही से पहले वादी की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शी भी गवाही से मुकर गए। साक्ष्य के अभाव में हत्या के छह आरोपी कोर्ट से बरी कर दिए गए। 

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court acquitted six accused of murder In Agra after turned away from eyewitness testimony
कोर्ट का आदेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में 15 साल पहले युवक की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी थी। दोनों आंखें भी निकाल ली। लाश को बाबरपुर के जगंलों में फेंक दिया। कोर्ट में प्रत्यक्षदर्शी गवाही से मुकर गए। अपर जिला जज-1 विनोद कुमार बरनवाल ने हत्या कर साक्ष्य मिटाने के आरोपी भोजा, मोनू, धर्मेंद्र, राकेश, भूपेंद्र और राजेश को बरी करने के आदेश दे दिए।

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थाना सिकंदरा में दर्ज चर्चित हत्याकांड में शिवाकुंज निवासी राजवीर सिंह ने तहरीर दी। बताया कि 9 नवंबर 2007 को उनका 22 वर्षीय बेटा सोनू अचानक गायब हो गया। पुलिस ने मामले में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली। 11 नवंबर 2007 को कॉलोनी के निवासी वीरपाल सिंह और एसके चौहान ने उन्हें बताया कि उसके बेटे को आरोपी भोजा , मोनू , धर्मेंद्र, राकेश, भूपेंद्र और राजेश बाबर पुर के जंगल की तरफ ले गए हैं। वह उनसे घर जाने कि जिद कर रहा था। 
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आरोपी उसे जबरन घसीट कर जंगल की तरफ ले गए। पड़ोसी के बताने पर वह पुलिस को लेकर बाबरपुर के जंगल में बेटे की तलाश करने पहुंचे। वहां उन्हें बेटे सोनू की रक्त रंजित लाश मिली। हत्यारों ने धारदार हथियार से गर्दन काटकर दोनों आँखें भी निकाल ली। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर सिकंदरा के शिवाकुंज निवासी भोजा, राकेश और उसके दो बेटे मोनू एवं धर्मेंद्र, भूपेंद्र शिकोहाबाद निवासी राजेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

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मुकदमे में गवाही दर्ज होने से पूर्व वादी मुकदमा राजवीर सिंह की मौत हो गई। उनकी गवाही भी नहीं हो सकी। प्रत्यक्षदर्शी वीर बहादुर सिंह ,चंद्रप्रकाश शर्मा, सिपाही रामअवतार सिंह, शिवनाथ सिंह, जगमोहन, अशोक, शैलेंद्र प्रताप सिंह, तत्कालीन थानाध्यक्ष सिकंदरा राजेश कुमार और डॉ एससी जैन की अभियोजन पक्ष ने गवाही दर्ज कराई। मगर, प्रत्यक्षदर्शी वीरपाल सिंह सहित जगमोहन,भूपेंद्र और अशोक कुमार पूर्व गवाही से मुकर गए। आरोपियों के अधिवक्ता रामनिवास परमार और दीपक कुमार शर्मा के तर्क पर अदालत ने आरोपियों को बरी करने के आदेश दे दिए।
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