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Agra: बहन के नाम 30 बीघा खेत की वसीयत करने पर साधु की हत्या, साक्ष्यों के आभाव में 38 वर्ष बाद आरोपी बरी

Tue, 31 Jan 2023 07:49 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Tue, 31 Jan 2023 07:49 PM IST
सार

आगरा जिले में एक साधु की हत्या के मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया। मामला 38 वर्षों से चल रहा था। साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने पर कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया।  
 

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court acquitted accused in murder of monk for bequeathing 30 bighas of land to his sister in Agra
कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में अविवाहित एवं सन्यास ले चुके भाई ने अपनी जमीन जायदाद बहन के नाम वसीयत कर दी। यह बात अन्य भाइयों को ठीक नहीं लगी। बहन ने कहा कि इस बात से खफा होकर उसके अन्य भाइयों ने  उसके साधु भाई की हत्या कर दी। कोर्ट में यह मामला 38 सालों तक चला। इसके बाद मुख्य आरोपियों की मौत हो गई। इस पर कोर्ट ने सुनवाई के बाद साक्ष्य न प्रस्तुत कर पाने पर अन्य आरोपियों को भी बरी कर दिया।  

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बहन ने 27 फरवरी 1985 को भाई की हत्या की तहरीर दी

मामला एत्मादपुर थाना क्षेत्र के भीकनपुर बाकरपुर गांव का है। गांव निवासी जगदीश नरायन पचौरी की पत्नी वादनी मिथलेश कुमारी ने 21 मई 1985 को डीआईजी को शिकायती पत्र दिया। बताया कि बताया कि उसके चार भाई थे। इसमें से रामचरन अविवाहित था। उनके हिस्से में तीस बीघा जमीन थी। वह सन्यास लेकर साधु हो गये थे। 

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बताया कि उसके भाई रामचरन लाल पुत्र सालिगराम ने अपनी जायदाद उसके नाम वसीयत कर दी थी। यह बात अन्य भाइयों बाबूलाल, जंगजीत वगैरह को पता चल गई। इस पर उन्होंने 27 फरवरी 1985 को भाई की हत्या करवा दी। इसके बाद उसने पुलिस को तहरीर दी।

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कोर्ट ने समाप्त कर दी मुकदमा की कार्यवाही

वादनी की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी भाई बाबूलाल भतीजे अनिल एवं सत्य निकंदन, मानिकचंद पुत्र पोहप सिंह निवासीगण- भीकनपुर गांव, थाना-एत्मादपुर, जिला-आगरा तथा  जंगजीत शर्मा पुत्र खूबीराम निवासी नगला केशोराम गांव, थाना-टूंडला, जिला-फिरोजाबाद एवं रामवीर पुत्र हरिप्रसाद निवासी- एलई गांव, थाना-टूंडला, जिला-फिरोजाबाद के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद अदालत में हत्या, आपराधिक षड्यंत्र एवं आरोप में आरोप पत्र दाखिल किया।

      
अभियोजन पक्ष की तरफ से मामले की पुष्टि के लिए वादिनी मिथलेश कुमारी तथा उसके पति जगदीश नरायन पचौरी, राजाराम, सेवती लाल, मुरारीलाल एवं भवानी सिंह को अदालत में पेश किया। यह मामला लंबे समय से चल रहा था। इसी बीच आरोपी बाबूलाल, सत्य निकंदन एवं जंगजीत शर्मा की मौत हो गई। इस पर अदालत ने उनके विरुद्ध मुकदमा की कार्यवाही समाप्त कर दी।  

38 वर्ष बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला

घटना के 38 वर्ष बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रवीन कुमार श्रीवास्तव एवं अशोक कुमार गौतम के तर्क एवं गवाहों के बयान में विरोधाभास मिला। इस पर अपर जिला जज-14, विकास वर्मा ने आरोपी अनिल, मानिकचंद एवं रामवीर को भी बरी कर दिया।

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