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कोरोना वायरस से चिंता में लोग, सामान्य छींक-खांसी से घबराए, मानिए मनोचिकित्सक की सलाह

Sun, 15 Mar 2020 11:07 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sun, 15 Mar 2020 11:07 AM IST
सार

जरूरत से ज्यादा सावधानी, बेवजह बार-बार धो रहे हाथ 
 

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Corona Virus Patients Come To Psychiatrists For Advice
जिला अस्पताल में कोरोना की जांच टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केस स्टडी एक: 
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दयालबाग निवासी 40 साल के युवक कोरोना वायरस के डर से तनाव में हैं। पिछले सात दिन से लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दिया है। घर से कम ही निकल रहे हैं। किसी के छींकने-खांसने पर फर्श की सफाई और हाथ बार-बार धो रहे हैं।

केस स्टडी दो: 
खंदारी क्षेत्र का 35 साल का युवक मनोचिकित्सक के पास पहुंचा। बच्चे को जुकाम-खांसी होने पर यह तनाव में आ गए। कोरोना वायरस की आशंका पर बार-बार हाथ धुला रहे हैं। बच्चे को घर पर भी मास्क लगा दिया है, खुद भी मास्क लगाए रहते हैं। 
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Corona Virus Patients Come To Psychiatrists For Advice
हाथ धोने की जानकारी देते डॉ. कैलाश सारस्वत - फोटो : अमर उजाला
आगरा कोरोना वायरस के मरीज मिलने के बाद इस बीमारी के खौफ से लोग तनाव में आ गए हैं। किसी के सामान्य छींकने-खांसने पर कोरोना वायरस की आशंका से भयभीत हैं। उनको बीमारी तो नहीं लग जाएगी, यह सोचकर जरूरत से ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं। चिकित्सक इनको पूर्वाग्रह और गंभीर एंजाइटी डिसआर्डर के शिकार बता रहे हैं। ऐसे मरीज मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। 

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के शहर में सात मरीज मिले हैं, रोजाना इसकी आशंका पर औसतन 30 के नमूने भी लिए जा रहे हैं। बचाव के लिए छींकते-खांसते समय रुमाल लगाने और हाथों को साबुन से धोने के लिए गाइड लाइन भी जारी की है।

ऐसे में कई लोग पूर्वाग्रह और गंभीर एंजाइटी के शिकार हो गए हैं और जरूरत से ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं। दिनचर्या भी बदल गई है। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाए बिना ही हाथों को बार-बार धो रहे हैं। मिलने-जुलना भी कम कर दिया है। बच्चों के जरा छींक-खांसने से चिंतित होकर बार-बार सेनेटाइज भी कर रहे हैं।  
 

Corona Virus Patients Come To Psychiatrists For Advice
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग व डॉ. दिनेश राठौर - फोटो : अमर उजाला
तनाव से बेवजह बार-बार धो रहे हाथ: डॉ. यूसी गर्ग
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि संक्रमित मरीज के सीधे संपर्क में आने से खतरा है, लेकिन ऐसे लोग भी हैं जो बेवजह तनाव में हैं। हाथों को बार-बार धोना, पड़ोसियों से मिलना तक बंद कर दिया है। यह पूर्वाग्रह के शिकार हो गए हैं। पिछले एक सप्ताह से एक-दो मरीज रोज आ रहे हैं।

सहानुभूति नहीं काउंसिलिंग की जरूरत: डॉ. दिनेश राठौर
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि इस बीमारी के बढ़ते मामलों से लोग तनाव में आ गए हैं। अनहोनी या किसी के जरिये उनको-परिवार के सदस्यों को बीमारी न लग जाए, यह सोचकर गंभीर एंजाइटी डिसआर्डर के शिकार हैं। ऐसे लोगों को सहानुभूति नहीं विशेषज्ञ की काउंसिलिंग की जरूरत है। 
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