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कोरोना संक्रमण की लापरवाही इन मरीजों पर पड़ी भारी, देरी से अस्पताल लाने पर हुईं 72 मौतें, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Wed, 02 Dec 2020 09:53 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 02 Dec 2020 09:53 AM IST
सार
- गंभीर थी हालत
- सीधे आईसीयू में भर्ती किया गया था
- वेंटिलेटर पर रखे गए थे
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कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
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विस्तार
एसएन मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान दम तोड़ने वाले आगरा और आसपास के जिलों के 202 संक्रमितों में 72 ऐसे रहे जिन्हें बहुत देरी से लाया गया। इनकी हालत बिगड़ चुकी थी, सीधे आईसीयू में रखा गया और वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। चिकित्सकों का कहना है कि इनकी मृत्यू की एक प्रमुख वजह इन्हें देरी से लाया जाना रही।
Corona Virus Agra: कोरोना वायरस के 95 मरीज मिले, 9326 पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा
एसएन कॉलेज में कोरोना वायरस के 2,165 मरीजों का इलाज हुआ है। यहां 202 मृतकों में से आगरा के 150 मरीज थे। मैनपुरी, मथुरा, फिरोजाबाद समेत अन्य शहरों के 52 मृतक थे। एसएन की डैथ ऑडिट में लगभग 35 फीसदी मरीजों की जान अस्पताल में देरी से आने पर हुई।
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समंक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे डॉ. अजित चाहर ने बताया कि इन 72 मरीजों की ऑक्सीजन स्तर कम था, सांस फूल रही थी। रक्चाप कम मिला और मधुमेह जैसी बीमारियां भी थी। अगर ये पहले लाए जाते तो जान बचने की संभावना अधिक रहती। इनमें 55 से 65 साल के मरीज अधिक रहे। इनकी मौत पांच दिनों के भीतर ही हो गई। 20 प्रतिशत दो दिन में ही दम तोड़ दिया।
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Corona Virus Agra: कोरोना वायरस के 95 मरीज मिले, 9326 पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा
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एसएन कॉलेज में कोरोना वायरस के 2,165 मरीजों का इलाज हुआ है। यहां 202 मृतकों में से आगरा के 150 मरीज थे। मैनपुरी, मथुरा, फिरोजाबाद समेत अन्य शहरों के 52 मृतक थे। एसएन की डैथ ऑडिट में लगभग 35 फीसदी मरीजों की जान अस्पताल में देरी से आने पर हुई।
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समंक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे डॉ. अजित चाहर ने बताया कि इन 72 मरीजों की ऑक्सीजन स्तर कम था, सांस फूल रही थी। रक्चाप कम मिला और मधुमेह जैसी बीमारियां भी थी। अगर ये पहले लाए जाते तो जान बचने की संभावना अधिक रहती। इनमें 55 से 65 साल के मरीज अधिक रहे। इनकी मौत पांच दिनों के भीतर ही हो गई। 20 प्रतिशत दो दिन में ही दम तोड़ दिया।
पहले से कई गंभीर बीमारियां भी थी : डॉ. आशीष गौतम
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि मृतकों में 35 फीसदी बेहद ही नाजुक हालत में लाए, आईसीयू में रखने से लाभ नहीं मिला। मृतकों में अधिक उम्र, मोटापा, अनियंत्रित मधुमेह, कम रक्तचाप जैसी वजह रहीं। जल्दी लाने पर कई जानें बचाई जा सकती थीं।
देर से अस्पताल में भर्ती कराने से बढ़ा मौत का आंकड़ा: डॉ. संजय काला
एसएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि लगभग आधे मरीज अस्पताल में देर से भर्ती किए गए, इसमें से करीब 35 फीसदी ने दम तोड़ दिया, बाकी के मरीजों को बचाने में डॉक्टर सफल रहे। इस कारण संक्रमण से होने वाली मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। होम आइसोलेशन के मरीजों को परेशानी होने पर चिकित्सक से परामर्श लेकर तत्काल भर्ती कराएं।
होम आइसोलेशन में इन लक्षणों पर अस्पताल में कराएं भर्ती
- रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 95 से कम हो।
- तेज बुखार हो और खांसी बंद नहीं हो रही हो।
- चलने-खाने और नहाने में सांस फूल रही हो।
- बेचैनी- घबराहट हो रही हो, सांस लेने में दिक्कत।
- मरीज का रक्तचाप कम हो रहा हो।
( जैसा एसएन के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया )
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि मृतकों में 35 फीसदी बेहद ही नाजुक हालत में लाए, आईसीयू में रखने से लाभ नहीं मिला। मृतकों में अधिक उम्र, मोटापा, अनियंत्रित मधुमेह, कम रक्तचाप जैसी वजह रहीं। जल्दी लाने पर कई जानें बचाई जा सकती थीं।
देर से अस्पताल में भर्ती कराने से बढ़ा मौत का आंकड़ा: डॉ. संजय काला
एसएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि लगभग आधे मरीज अस्पताल में देर से भर्ती किए गए, इसमें से करीब 35 फीसदी ने दम तोड़ दिया, बाकी के मरीजों को बचाने में डॉक्टर सफल रहे। इस कारण संक्रमण से होने वाली मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। होम आइसोलेशन के मरीजों को परेशानी होने पर चिकित्सक से परामर्श लेकर तत्काल भर्ती कराएं।
होम आइसोलेशन में इन लक्षणों पर अस्पताल में कराएं भर्ती
- रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 95 से कम हो।
- तेज बुखार हो और खांसी बंद नहीं हो रही हो।
- चलने-खाने और नहाने में सांस फूल रही हो।
- बेचैनी- घबराहट हो रही हो, सांस लेने में दिक्कत।
- मरीज का रक्तचाप कम हो रहा हो।
( जैसा एसएन के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया )