मथुरा में कोरोना का खौफ: बैकुंठ द्वार से नहीं निकल सकेंगे भगवान रंगनाथ के भक्त, 185 वर्ष पुरानी है परंपरा
मथुरा में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे में रंगनाथ मंदिर प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि 13 जनवरी को बैकुंठ एकादशी पर मंदिर में बाहरी श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं होगा।
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मथुरा जनपद में कोरोना संक्रमण का बढ़ता असर मंदिरों के धार्मिक आयोजनों पर भी पड़ता दिख रहा है। उत्तर भारत के रंगनाथ मंदिर में होने वाले बैकुंठ एकादशी उत्सव पर श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। मंदिर प्रबंधन ने यह निर्णय तेजी से फैल रहे कोरोना के संक्रमण के कारण लिया है। पौष महीने की दूसरी एकादशी को रंगनाथ मंदिर में बैकुंठ उत्सव मनाया जाता है। इसके तहत भगवान रंग नाथ (विष्णु जी) माता गोदा जी (लक्ष्मी जी) के साथ पालकी में विराजमान होकर बैकुंठ द्वार से निकलते हैं। यह उत्सव बैकुंठ एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है। भगवान के द्वार से निकलने के साथ भक्त भी उनके पीछे-पीछे निकलते हैं।
वैसे तो रंगनाथ मंदिर में साल भर उत्सव होते रहते हैं। इनमें कुछ ऐसे उत्सव हैं जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ जुड़े हैं, उनमें से एक बैकुंठ उत्सव है। इसमें श्रद्धालु बैकुंठ एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में बैकुंठ द्वार से निकलते हैं और बैकुंठ वास की कामना करते हैं। यह परंपरा 185 वर्ष से चल रही है। इस बार परंपरा का निर्वहन तो होगा, लेकिन श्रद्धालु नहीं निकल पाएंगे।
कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए रंगनाथ मंदिर प्रबंधन ने इस बार बैकुंठ उत्सव 13 जनवरी को प्रात: के समय श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय मंदिर प्रबंधन ने आम श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विषम परिस्थितियों में लिया है। उत्सव का प्रसारण लाइव मंदिर के फेसबुक पेज पर किया जाएगा। मदिर में बाहरी श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।