एक्सक्लूसिव: आगरा जिले के देहात क्षेत्र का पानी है दूषित, जिसे पीने से लोग हो रहे विकलांग
- देहात के पानी में हड्डियां कमजोर करने वाला फ्लोराइड सामान्य से ढाई गुना
- जल निगम की रिपोर्ट में खुलासा, पानी में आर्सेनिक भी दोगुना, पैदा करता है चर्म रोग
विस्तार
आगरा जिले के देहात क्षेत्र के पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक जैसे खतरनाक तत्वों की मात्रा सामान्य से ज्यादा मिली है। फ्लोराइड जहां हड्डियां खराब करता है, वहीं आर्सेनिक से चर्मरोग होते हैं। इतना ही नहीं, पूर्णत: घुले हुए ठोस पदार्थ (टीडीएस) भी मानक से ज्यादा पाए गए हैं, जो पानी का स्वाद खराब करते हैं, इनकी वजह से ही पानी खारा है। यह खुलासा जल निगम की लैब की रिपोर्ट से हुआ है।
जल निगम के लैब प्रभारी संजय उपमन ने बताया कि पिछले 11 महीनों में 15 ब्लॉक के 200 गांवों से 3500 नमूने लिए गए। 80 फीसदी से ज्यादा में फ्लोराइड की मात्रा अधिक और 50 फीसदी से ज्यादा में आर्सेनिक अधिक मिला।
टीडीएस की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से निर्धारित 1600 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) की तुलना में 2000 से 2200 पीपीएम पाई गई। फ्लोराइड की मात्रा सामान्य 1.5 पीपीएम से अधिक 2.0 से 2.5 पीपीएम पाई गई। कुछ गांवों के पानी में कठोरता भी सामान्य 600 पीपीएम से सवा और डेढ़ गुना अधिक निकला।
सात ब्लॉक में स्थिति ज्यादा खराब
फतेहपुर सीकरी, अछनेरा, अकोला, बिचपुरी, बरौली अहीर, खंदौली, एत्मादपुर की स्थिति ज्यादा खराब है। इन ब्लॉक के पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से डेढ़ गुना से दोगुना पाई गई।
- 200 गांवों में की गई है जांच
- 11 महीनों में लिए गए नमूने
- 3500 नमूनों की जांच की गई
- 80 फीसदी में फ्लोराइड ज्यादा
पचगई में विकलांग हो रहे लोग
ग्वालियर रोड स्थित पट्टी पचगई और पचगई खेड़ा गांवों में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से कई गुना ज्यादा है। यहां पिछले 15 सालों से इस पानी के प्रयोग के कारण लोगों की हड्डियां खराब हो रही हैं। कई लोगों को हाथ और पैर मुड़ गए हैं। चलना-फिरना तक मुश्किल हो गया। इसके बाद जल निगम ने इसी साल पानी की टंकी बनवाई है। इसमें शोधन के बाद पानी की सप्लाई होगी।
जल निगम एक्सईएन ने बताया कि शासन के निर्देश पर ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक घर में साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए सर्वे किया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 2021 में वहां पानी के कनेक्शन दिए जाएंगे, जहां का पानी साफ या पीने योग्य नहीं है। ऐसे इलाकों में पानी के नमूनों की जांच संख्या बढ़ाने के लिए वैन भी चलाना शुरू कर दिया गया हैा
पानी की खराबी से हड्डी और त्वचा के रोगी बढ़े हैं
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आशीष गौतम का कहना है कि पानी में खतरनाक तत्वों के होने से जिले में हड्डी और त्वचा के रोगी बढ़े हैं। पिछले पांच सालों का चार्ट देखें तो ऐसे मरीजों की संख्या दोगुना से ज्यादा हो गई है। जैसे-जैसे पानी की स्थिति खराब हो रही है, वैसे-वैसे मरीज बढ़ रहे हैं।
सलाह : पानी को उबालकर पीएं... फिटकरी-चूना मिलाएं
1. पानी की कठोरता को कम करने के लिए इसे उबालने के बाद कुछ समय के लिए छोड़ दें। कठोर तत्व तली में चले जाएं। तली का पानी न पीएं।
2. फ्लोराइड की मात्रा कम करने के लिए पांच लीटर पानी में एक ग्राम फिटकरी और आधा ग्राम चूना मिलाकर एक घंटे के लिए किसी बर्तन में भरकर रख दें। कुछ देर बाद उसमें फ्लोराइड की मात्रा सामान्य हो जाएगी।
3. आर्सेनिक को दूर करने के लिए आरओ की जरूरत है। जल निगम की ओर से देहात में दस एफआरओ लगवाए गए हैं। इनसे पानी लिया जा सकता है।
(जैसा जल निगम के अधिशासी अभियंता आरके शर्मा ने बताया)