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Agra University: उपभोक्ता आयोग ने दिए निर्देश, जल्द छात्रा को डिग्री देगा आंबेडकर विश्वविद्यालय
Fri, 18 Jul 2025 09:53 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 18 Jul 2025 09:53 AM IST
सार
बीएससी की परीक्षा पास करने वाली छात्रा ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। इस मामले में उपभोक्ता आयोग ने विवि को प्रभावित छात्रा को दो महीने के अंदर डिग्री देने के निर्देश दिए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वर्ष 2010 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से बीएससी की परीक्षा पास करने वाली छात्रा को आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से जल्दी ही डिग्री उपलब्ध करा दी जाएगी। करीब 15 वर्ष पुराने इस प्रकरण में डिग्री न देने पर उपभोक्ता आयोग ने विवि को प्रभावित छात्रा को दो महीने के अंदर डिग्री देने के निर्देश दिए हैं।
घटनाक्रम करीब 15 वर्ष पुराना है। मैनपुरी के थाना कुर्रा की श्वेता मिश्रा दीवानी में वकालत करती हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि से संबद्ध बाबूराम पीपी कॉलेज करहल से बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। बाद में उपाधि पाने के लिए तय 500 रुपये की फीस भी ऑनलाइन जमा कर दी। इसके बाद भी उन्हें उपाधि नहीं दी गई।
कई बार विवि में संपर्क करने पर जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में याचिका दायर की गई। इस पर कोर्ट ने विवि को दो महीने में छात्रा को उपाधि देने का आदेश दिया है। इस संबंध में कुलपति प्रो. आशुरानी का कहना है कि प्रकरण उनके कार्यकाल से पूर्व का है। मामला उनके संज्ञान में आया है, उन्होंने अधीनस्थों को छात्रा की उपाधि देने के लिए निर्देशित कर दिया है।
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घटनाक्रम करीब 15 वर्ष पुराना है। मैनपुरी के थाना कुर्रा की श्वेता मिश्रा दीवानी में वकालत करती हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि से संबद्ध बाबूराम पीपी कॉलेज करहल से बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। बाद में उपाधि पाने के लिए तय 500 रुपये की फीस भी ऑनलाइन जमा कर दी। इसके बाद भी उन्हें उपाधि नहीं दी गई।
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कई बार विवि में संपर्क करने पर जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में याचिका दायर की गई। इस पर कोर्ट ने विवि को दो महीने में छात्रा को उपाधि देने का आदेश दिया है। इस संबंध में कुलपति प्रो. आशुरानी का कहना है कि प्रकरण उनके कार्यकाल से पूर्व का है। मामला उनके संज्ञान में आया है, उन्होंने अधीनस्थों को छात्रा की उपाधि देने के लिए निर्देशित कर दिया है।
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