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वन संरक्षक के खिलाफ सीबीसीआईडी जांच
ब्यूरो अमर उजाला, लखनऊ/आगरा
Updated Thu, 03 Dec 2015 01:04 AM IST
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वन संरक्षक (आगरा) विष्णु सिंह के खिलाफ सीबीसीआईडी जांच होगी। उन पर मुख्य वन संरक्षक के फर्जी दस्तखत से जांच रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है। इस मामले में सीबीसीआईडी जांच के लिए वन विभाग ने गृह विभाग को अपनी संस्तुति भेज दी है। जल्द ही जांच शुरू होने की उम्मीद है।
वन संरक्षक विष्णु सिंह पर मुख्य वन संरक्षक (आगरा) एके जैन ने अवैध कटान और जंगल की जमीन पर कब्जा करवाने वालों को बचाने का आरोप लगाया था। इस मामले में मुख्य वन संरक्षक जैन ने अपने स्तर से जांच की थी। बाद में जैन के फर्जी दस्तखत से शासन को एक पत्र भेजा गया, जिसमें विष्णु सिंह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। यह मामला मुख्य वन संरक्षक जैन की जानकारी में आया तो उन्होंने ऐसा कोई पत्र भेजने से इंकार किया।
शासन ने इस फर्जीवाड़े की जांच मंडलायुक्त की अगुवाई में गठित एक कमेटी को सौंपी।
जैन ने एक पीसीओ के सीसीटीवी फुटेज भी दिखाए, जिसमें कथित तौर पर विष्णु सिंह को फर्जी लेटर भेजते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं एके जैन ने निष्पक्ष जांच के लिए सीएम अखिलेश यादव तक को पत्र लिखा।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद कमिश्नर की अगुवाई वाली कमेटी ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में असमर्थता जताते हुए सीबीसीआईडी जांच कराने की जरूरत बताई। यहां बता दें कि हाल ही में विष्णु सिंह को मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति दे दी गई है।
सचिव (वन) सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि वन विभाग ने विष्णु सिंह के खिलाफ गृह विभाग से सीबीसीआईडी जांच की संस्तुति कर दी है। अब आगे का कोई निर्णय गृह विभाग को लेना है।
आईएफएस एके जानू को भी जल्द मिलेगा आरोप पत्र
वन भूमि से पेड़ कटवाने के बाद जमीन बिल्डर को सौंपने के मामले में तत्कालीन डीएफओ एके जानू को भी जल्द आरोप पत्र दिया जाएगा। सचिव (वन) सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि आरोप पत्र तैयार कर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि शासन के किसी भी अधिकारी की मंशा किसी भी आरोपी अधिकारी को बचाने की नहीं है। लेकिन, नियमानुसार कार्रवाई करने में थोड़ा वक्त लग जाता है। यहां बता दें कि मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने अपनी रिपोर्ट में एके जानू पर अवैध कटान के साथ जंगल की जमीन बिल्डर को सौंपने का आरोप लगाया गया, जबकि विष्णु सिंह पर उन्हें बचाने का आरोप है।
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वन संरक्षक विष्णु सिंह पर मुख्य वन संरक्षक (आगरा) एके जैन ने अवैध कटान और जंगल की जमीन पर कब्जा करवाने वालों को बचाने का आरोप लगाया था। इस मामले में मुख्य वन संरक्षक जैन ने अपने स्तर से जांच की थी। बाद में जैन के फर्जी दस्तखत से शासन को एक पत्र भेजा गया, जिसमें विष्णु सिंह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। यह मामला मुख्य वन संरक्षक जैन की जानकारी में आया तो उन्होंने ऐसा कोई पत्र भेजने से इंकार किया।
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शासन ने इस फर्जीवाड़े की जांच मंडलायुक्त की अगुवाई में गठित एक कमेटी को सौंपी।
जैन ने एक पीसीओ के सीसीटीवी फुटेज भी दिखाए, जिसमें कथित तौर पर विष्णु सिंह को फर्जी लेटर भेजते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं एके जैन ने निष्पक्ष जांच के लिए सीएम अखिलेश यादव तक को पत्र लिखा।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद कमिश्नर की अगुवाई वाली कमेटी ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में असमर्थता जताते हुए सीबीसीआईडी जांच कराने की जरूरत बताई। यहां बता दें कि हाल ही में विष्णु सिंह को मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति दे दी गई है।
सचिव (वन) सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि वन विभाग ने विष्णु सिंह के खिलाफ गृह विभाग से सीबीसीआईडी जांच की संस्तुति कर दी है। अब आगे का कोई निर्णय गृह विभाग को लेना है।
आईएफएस एके जानू को भी जल्द मिलेगा आरोप पत्र
वन भूमि से पेड़ कटवाने के बाद जमीन बिल्डर को सौंपने के मामले में तत्कालीन डीएफओ एके जानू को भी जल्द आरोप पत्र दिया जाएगा। सचिव (वन) सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि आरोप पत्र तैयार कर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि शासन के किसी भी अधिकारी की मंशा किसी भी आरोपी अधिकारी को बचाने की नहीं है। लेकिन, नियमानुसार कार्रवाई करने में थोड़ा वक्त लग जाता है। यहां बता दें कि मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने अपनी रिपोर्ट में एके जानू पर अवैध कटान के साथ जंगल की जमीन बिल्डर को सौंपने का आरोप लगाया गया, जबकि विष्णु सिंह पर उन्हें बचाने का आरोप है।