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सीकरी की बावली में मिले ‘ठंडे कमरे’
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Updated Wed, 10 Feb 2016 02:01 AM IST
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मुगलिया शान को बयां करते फतेहपुर सीकरी के बुलंद दरवाजे और महल के पीछे बाबर की बावली में एएसआई को बेहद पुरानी जल प्रणाली और एसी जैसे कूलिंग चेंबर यानी ठंडे कमरे मिले हैं। हिरन मीनार के आगे कारवां सराय के पास चल रहे संरक्षण कार्य और साइंटिफिक क्लीयरेंस में पूरा वाटर सिस्टम खोज निकाला गया है। एएसआई अधिकारियों ने मंगलवार को इसका निरीक्षण किया।
कारवां सराय में मलबे से ढके हुए हम्माम की साइंटिफिक क्लीयरेंस में हर दिन नए रहस्य सामने आ रहे हैं। कभी सुरंग तो कभी भूमिगत कमरे मिल रहे हैं। मंगलवार को कारवां सराय के पास अष्टकोणीय चारदीवारी में मौजूद बाबर की बावली का एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. भुवन विक्रम ने निरीक्षण किया। सीनियर सीए मुनज्जर अली और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट केए कुबई के साथ उन्होंने बावली में चल रहे काम को देखा। यहां उन्हें अकबर कालीन 400 साल पुरानी जलप्रणाली मिली है। यहां काफी हिस्सा ध्वस्त हो चुका है। खोदाई के दौरान यहां 14 कोठरियां मिलीं। प्राइवेट बावली में वाटर सिस्टम के साथ कई कूलिंग चेंबर भी पाए गए हैं।
‘पिछले दिनों यहां संरक्षण कार्य शुरू कराया गया था। वाटर सिस्टम के साथ कूलिंग चेंबर मिलने से मुगलिया दौर की तकनीक का तो पता चलेगा ही, बावली के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। जल्द ही इस पूरे क्षेत्र का संरक्षण कराया जाएगा। हम्माम को पुरानी स्थिति में लाने का प्रयास होगा’।
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डा. भुवन विक्रम
अधीक्षण पुरातत्वविद्
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कारवां सराय में मलबे से ढके हुए हम्माम की साइंटिफिक क्लीयरेंस में हर दिन नए रहस्य सामने आ रहे हैं। कभी सुरंग तो कभी भूमिगत कमरे मिल रहे हैं। मंगलवार को कारवां सराय के पास अष्टकोणीय चारदीवारी में मौजूद बाबर की बावली का एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. भुवन विक्रम ने निरीक्षण किया। सीनियर सीए मुनज्जर अली और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट केए कुबई के साथ उन्होंने बावली में चल रहे काम को देखा। यहां उन्हें अकबर कालीन 400 साल पुरानी जलप्रणाली मिली है। यहां काफी हिस्सा ध्वस्त हो चुका है। खोदाई के दौरान यहां 14 कोठरियां मिलीं। प्राइवेट बावली में वाटर सिस्टम के साथ कई कूलिंग चेंबर भी पाए गए हैं।
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‘पिछले दिनों यहां संरक्षण कार्य शुरू कराया गया था। वाटर सिस्टम के साथ कूलिंग चेंबर मिलने से मुगलिया दौर की तकनीक का तो पता चलेगा ही, बावली के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। जल्द ही इस पूरे क्षेत्र का संरक्षण कराया जाएगा। हम्माम को पुरानी स्थिति में लाने का प्रयास होगा’।
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डा. भुवन विक्रम
अधीक्षण पुरातत्वविद्