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लोकसभा चुनाव: ब्रज में चुनौती भरा रहा है चुनावी गठबंधन का इतिहास, कभी फेल तो कभी हुआ पास
Thu, 14 Mar 2019 02:16 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 14 Mar 2019 02:16 PM IST
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गठबंधन का गणित कभी पास हो जाता है तो कभी फेल। ब्रज में चुनावी दोस्ती का फल कुछ खट्टा तो कुछ मीठा रहा है। हर चुनाव में कोई न कोई सियासी जोड़ी बनी है। ब्रज के मतदाताओं ने इसकी कड़ी परीक्षा ली है। वही गठबंधन सफल हुआ है जो जनभावनाओं का ख्याल रखकर बनाया गया है। 2004 से 2014 तक के चुनावों में गठबंधन की परीक्षा के नतीजों पर पेश है रिपोर्ट....।
2014 : एक भी सीट पर नहीं गली रालोद-कांग्रेस की दाल
पिछले लोकसभा चुनाव में गठबंधन हुआ रालोद और कांग्रेस में। उस समय केंद्र में जाट आरक्षण अध्यादेश लाया गया था। साथ ही प्रदेश में मुजफ्फरनगर दंगे का असर था। मोदी लहर भी चल रही थी। नतीजा यह हुआ कि ब्रज में न रालोद का खाता खुला, न ही कांग्रेस का।
रालोद के जयंत चौधरी मथुरा से हारे, अमर सिंह फतेहपुर सीकरी से। गठबंधन में महान दल भी था। एटा से इसके उम्मीदवार जोगेंद्र सिंह भदौरिया हारे। फिरोजाबाद में कांग्रेस के अतुल चतुर्वेदी की करारी शिकस्त हुई। मैनपुरी से गठबंधन का प्रत्याशी ही नहीं था। आगरा से कांग्रेस के उपेंद्र सिंह हारे।
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2014 : एक भी सीट पर नहीं गली रालोद-कांग्रेस की दाल
पिछले लोकसभा चुनाव में गठबंधन हुआ रालोद और कांग्रेस में। उस समय केंद्र में जाट आरक्षण अध्यादेश लाया गया था। साथ ही प्रदेश में मुजफ्फरनगर दंगे का असर था। मोदी लहर भी चल रही थी। नतीजा यह हुआ कि ब्रज में न रालोद का खाता खुला, न ही कांग्रेस का।
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रालोद के जयंत चौधरी मथुरा से हारे, अमर सिंह फतेहपुर सीकरी से। गठबंधन में महान दल भी था। एटा से इसके उम्मीदवार जोगेंद्र सिंह भदौरिया हारे। फिरोजाबाद में कांग्रेस के अतुल चतुर्वेदी की करारी शिकस्त हुई। मैनपुरी से गठबंधन का प्रत्याशी ही नहीं था। आगरा से कांग्रेस के उपेंद्र सिंह हारे।
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2009 : रालोद को फायदा, भाजपा को नहीं
2009 में गठबंधन था रालोद और भाजपा का गठबंधन हुआ। यह दोस्ती रालोद को खूब रास आई। उसके प्रत्याशी सात सीटों पर उतरे थे। पांच पर जीत मिली। ब्रज में मथुरा से जयंत चौधरी जीते थे। भाजपा को गठबंधन का खास फायदा नहीं हुआ।
सीकरी से राजा अरिदमन सिंह को हार मिली। मैनपुरी से बीजेपी की तृप्ति शाक्य हारीं। फिरोजाबाद में बीपी चौहान हारे। आगरा से रामशंकर कठेरिया को जीत मिली। एटा में डॉक्टर श्याम सिंह शाक्य को हार का मुंह देखना पड़ा।
2009 : ज्यादा नहीं चल पाई मुलायम सिंह और कल्याण सिंह की दोस्ती
2009 के लोकसभा चुनाव में जब सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और हिंदु हृदय सम्राट की छवि वाले कल्याण सिंह की दोस्ती हुई तो प्रदेश नहीं, देश भर में लोग दंग रह गए थे। कल्याण सिंह भाजपा छोड़ चुके थे। इससे पहले दोनों ने लंबे समय तक एक दूसरे के विरोध में राजनीति की।
ब्रज में इस दोस्ती का समीकरण फिट बैठा। कल्याण सिंह ने जन क्रांति पार्टी बनाई थी। एटा से कल्याण सिंह जीते, मैनपुरी से सपा से मुलायम सिंह यादव जीते। फिरोजाबाद से अखिलेश यादव, मथुरा, आगरा से गठबंधन को शिकस्त मिली।
सीकरी से राजा अरिदमन सिंह को हार मिली। मैनपुरी से बीजेपी की तृप्ति शाक्य हारीं। फिरोजाबाद में बीपी चौहान हारे। आगरा से रामशंकर कठेरिया को जीत मिली। एटा में डॉक्टर श्याम सिंह शाक्य को हार का मुंह देखना पड़ा।
2009 : ज्यादा नहीं चल पाई मुलायम सिंह और कल्याण सिंह की दोस्ती
2009 के लोकसभा चुनाव में जब सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और हिंदु हृदय सम्राट की छवि वाले कल्याण सिंह की दोस्ती हुई तो प्रदेश नहीं, देश भर में लोग दंग रह गए थे। कल्याण सिंह भाजपा छोड़ चुके थे। इससे पहले दोनों ने लंबे समय तक एक दूसरे के विरोध में राजनीति की।
ब्रज में इस दोस्ती का समीकरण फिट बैठा। कल्याण सिंह ने जन क्रांति पार्टी बनाई थी। एटा से कल्याण सिंह जीते, मैनपुरी से सपा से मुलायम सिंह यादव जीते। फिरोजाबाद से अखिलेश यादव, मथुरा, आगरा से गठबंधन को शिकस्त मिली।
2004 : मुलायम सिंह को खूब रास आई छोटे चौधरी की दोस्ती
ब्रज में सबसे हिट गठबंधन सपा और रालोद का रहा। हालांकि इसमें फायदा सिर्फ सपा का हुआ। उस समय ब्रज क्षेत्र में पांच सीटें थीं। इनमें से चार सपा ने जीतीं। मैनपुरी से मुलायम जीते, फिरोजाबाद से रामजी लाल सुमन, आगरा से राज बब्बर और एटा से डॉ. देवेंद्र सिंह यादव।
मथुरा से रालोद की डॉ. ज्ञानवती सिंह हार गई थीं। रालोद उस चुनाव में प्रदेश में सिर्फ तीन सीटें जीत पाया था। बागपत से चौधरी अजित सिंह जीते थे, कैराना से अनुराधा चौधरी और बिजनौर से मुंशीराम पाल।
मथुरा से रालोद की डॉ. ज्ञानवती सिंह हार गई थीं। रालोद उस चुनाव में प्रदेश में सिर्फ तीन सीटें जीत पाया था। बागपत से चौधरी अजित सिंह जीते थे, कैराना से अनुराधा चौधरी और बिजनौर से मुंशीराम पाल।