ये कैसा पौधारोपण: तीन साल में 1.11 करोड़ पौधे लगाने का दावा, हरियाली एक मीटर भी न बढ़ी, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
टीटीजेड क्षेत्र में वनावरण 33 प्रतिशत होना चाहिए। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार साल 2011 में आगरा में हरियाली 6.84 फीसदी थी जो अब 2021 की रिपोर्ट में गिरकर 6.5 फीसदी रह गई। 10 वर्ष में 0.34 फीसदी वन क्षेत्र घटा है।
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ताज ट्रिपेजियम जोन में शामिल आगरा में 2019 से 2021 के बीच तीन साल में 1.11 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया गया। लेकिन जब फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट जारी हुई तो इसमें आगरा का वन क्षेत्र एक मीटर भी नहीं बढ़ा। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में आगरा का वन क्षेत्र 262.62 वर्ग किमी था। 2021 में भी इतना ही है। जीपीएस और आधुनिक सेटेलाइट इमेज के आधार पर किए गए सर्वे में पूरे ताज ट्रिपेजियम जोन में वन क्षेत्र नहीं बढ़ा, केवल झाड़ियों की संख्या में 0.52 फीसदी का इजाफा हुआ है।
कागजों में लगे, हकीकत में ठूंठ भी न दिखे
वन विभाग ने संरक्षित वन क्षेत्रों और खाली कराई गई 90 हेक्टेयर जमीन पर पौधरोपण के दावे किए। साथ ही अन्य विभागों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई। सभी ने कागजों में पौधरोपण की रिपोर्ट भेजी, लेकिन हकीकत में गड्ढे खाली दिखे, उनमें ठूंठ भी न नजर आए। अवधपुरी, मारुति एस्टेट रोड, अलबतिया रोड, जीआईसी मैदान, खंदारी चौराहे केपास आईएएस हॉस्टल केसामने, कोठी मीना बाजार मैदान, इनर रिंग रोड, फतेहाबाद रोड पर पौधरोपण के दावों के उलट न तो सड़क किनारे और न ही डिवाइडर पर पौधे नजर आए।
तीन साल में पौधरोपण का दावा
वर्ष पौधे
2019 28.00 लाख
2020 37.50 लाख
2021 45.74 लाख
कुल 111.24 लाख
वन विभाग, ग्राम्य विकास विभाग ने 27 विभागों को दी थी जिम्मेदारी
वर्ष 2020 में वन विभाग ने 14.24 लाख, ग्राम्य विकास विभाग ने 16.37 लाख और वर्ष 2021 में वन विभाग ने 12 लाख, ग्राम्य विकास विभाग ने 14 लाख पौधे लगवाने के दावे किए थे। इन्होंने नगर विकास, पंचायती राज, रेलवे, पुलिस, शिक्षा, विश्वविद्यालय, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एडीए, राजस्व विभाग समेत 27 विभागों को पौधे लगाने की जिम्मेदारी दी थी।
10 वर्ष में 0.34 फीसदी से घटा वनक्षेत्र
30 दिसंबर, 1996 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी में आगरा मंडल के आगरा, फीरोजाबाद, मथुरा अलीगढ़ मंडल के हाथरस, एटा और राजस्थान के भरतपुर जिले का 10,400 वर्ग किमी क्षेत्र आता है। टीटीजेड क्षेत्र में वनावरण 33 प्रतिशत होना चाहिए। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार साल 2011 में आगरा में हरियाली 6.84 फीसदी थी जो अब 2021 की रिपोर्ट में गिरकर 6.5 फीसदी रह गई। 10 वर्ष में 0.34 फीसदी वन क्षेत्र घटा है। 4041 वर्ग क्षेत्रफल में फैले आगरा में 62.68 वर्ग किमी में मध्यम घनत्व वाले वन और 199 वर्ग किमी में ओपन फॉरेस्ट है। बाकी झाड़ियों का हिस्सा है। आगरा में कुल 262.62 वर्ग किमी में हरियाली पाई गई।
2011 से 2021 के बीच दस साल में आगरा में 14 किमी जंगल में कमी आई है। वन क्षेत्र वर्ष 2011 में 276 किमी से घटकर अब वर्ष 2021 की रिपोर्ट में 262.62 वर्ग किमी रह गया है। इस अवधि में यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ एक्सप्रेसवे, माल रोड चौड़ीकरण, रेलवे लाइन बिछाने और बिजली परियोजनाओं के साथ आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट आदि में 1.40 लाख पेड़ काट दिए गए जो 100 साल तक पुराने थे।
साल हरित क्षेत्र किमी
2011 6.84% 276.00
2013 6.78% 273.00
2015 6.75% 273.00
2017 6.73% 272.00
2019 6.50% 262.60
2021 6.50% 262.62
हमने अन्य विभागों से पौधरोपण की रिपोर्ट मांगी है। इनमें से कुछ जगहों पर शिकायतें मिली हैं, जिन पर विचार के लिए 28 जनवरी को पर्यावरण समिति की बैठक होनी है। कोशिश है कि जहां पौधरोपण हुआ है, वहां पौधे जीवित बने रहें। - अखिलेश पांडेय, डीएफओ
10 वर्ष लगते हैं पेड़ बनने में
आगरा में कई विकास कार्यों के लिए पुराने पेड़ काटे गए हैं। उनकी जगह जो पौधे लगे हैं, उन्हें पेड़ बनने में कम से कम 10 वर्ष का समय चाहिए। इसलिए नई रिपोर्ट में न कमी और न बढ़ोत्तरी दिखाई है। इसमें पुराने आंकड़े शामिल किए गए हैं। - राकेश चंद्रा, वन संरक्षक आगरा मंडल
रिपोर्ट ने विभागों की पोल खोली
फॉरेस्ट सर्वे की रिपोर्ट ने सरकारी विभागों की पोल खोलकर रख दी है। एक इंच भी हरियाली का न बढ़ना बताता है कि मानसून में हर वर्ष लाखों पौधे केवल कागज पर लगाए जा रहे हैं। ये बेहद शर्मनाक हालात है, टीटीजेड चेयरमैन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। - डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद
दावों की ऑडिट कराई जाए
बेहद चिंताजनक रिपोर्ट है। हर साल लाखों पौधे लगाने के जो दावे किए गए हैं, उनकी ऑडिट कराई जाए। इसमें तकनीक का इस्तेमाल हो और जो विभाग दोषी है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। - उमेश शर्मा, सदस्य, टीटीजेड अथॉरिटी