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उपस्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कराकर भूला स्वास्थ्य महकमा
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कासगंज के नगला टीका का बंद पड़ा उपस्वास्थ्य केंद्र
- फोटो : KASGANJ
कासगंज।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति काफी बदहाल है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए उपस्वास्थ्य केंद्र शोपीस बने हुए हैं। इन केंद्रों पर वर्षों से ताले लटके हैं। इनमें जगह जगह झाड़ियां उग आई हैं। गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को भी ऐसे में काफी दिक्कतें रहती है।
शासन से गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना संचालित कर रखी है। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर होने वाली जांच, टीकाकरण एवं बच्चों को टीकाकरण आदि की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों मेें जगह जगह 169 उपस्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से जिले में आठ उपस्वास्थ्य केंद्र ही ऐसे है जिन पर गर्भवती महिलाओं को निर्धारित सुविधा मिल पाती है। शेष उपस्वास्थ्य केेंद्रों की स्थिति काफी खराब है। इन उपस्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात एएनएम वर्षों से नहीं पहुंची हैं। भवन परिसर खस्ताहाल हो चुके हैं। उपस्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाएं न मिल पाने से गर्भवती महिलाओं को काफी दिक्कतें रहती हैं। उन्हें अपनी आवश्यक जांच तक के लिए विकास खंड स्तर पर संचालित हो रहे सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, महिला चिकित्सालय, जिला चिकित्सालय की दौड़ लगानी होती है।
जिले में गर्भवती महिलाएं 60499
उपस्वास्थ्य केंद्रों पर क्या सुविधाएं हैं निर्धारित
-गर्भवती महिलाओं के यूरिन की जांच
-गर्भवती महिलाओं के रक्त की जांच
-गर्भवती महिलाओं के ब्लड प्रेशर की स्थिति
-गर्भवती महिलाओं को प्रसव कराने
-बच्चों के लिए टीकाकरण की व्यवस्था
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग
जिले का स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। जिससे मरीजों को काफी समस्या रहती है।
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उपस्वास्थ्य केंद्रों पर एएनएम की तैनाती है। बच्चों में होने वाले टीकाकरण के लिए प्रत्येक बुधवार को एएनएम ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचती हैं। इसके अलावा अभियान के दौरान भी गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों का टीकाकरण किया जाता है। डा. अविनाश डिप्टी सीएमओ
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जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति काफी बदहाल है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए उपस्वास्थ्य केंद्र शोपीस बने हुए हैं। इन केंद्रों पर वर्षों से ताले लटके हैं। इनमें जगह जगह झाड़ियां उग आई हैं। गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को भी ऐसे में काफी दिक्कतें रहती है।
शासन से गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना संचालित कर रखी है। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर होने वाली जांच, टीकाकरण एवं बच्चों को टीकाकरण आदि की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों मेें जगह जगह 169 उपस्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से जिले में आठ उपस्वास्थ्य केंद्र ही ऐसे है जिन पर गर्भवती महिलाओं को निर्धारित सुविधा मिल पाती है। शेष उपस्वास्थ्य केेंद्रों की स्थिति काफी खराब है। इन उपस्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात एएनएम वर्षों से नहीं पहुंची हैं। भवन परिसर खस्ताहाल हो चुके हैं। उपस्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाएं न मिल पाने से गर्भवती महिलाओं को काफी दिक्कतें रहती हैं। उन्हें अपनी आवश्यक जांच तक के लिए विकास खंड स्तर पर संचालित हो रहे सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, महिला चिकित्सालय, जिला चिकित्सालय की दौड़ लगानी होती है।
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जिले में गर्भवती महिलाएं 60499
उपस्वास्थ्य केंद्रों पर क्या सुविधाएं हैं निर्धारित
-गर्भवती महिलाओं के यूरिन की जांच
-गर्भवती महिलाओं के रक्त की जांच
-गर्भवती महिलाओं के ब्लड प्रेशर की स्थिति
-गर्भवती महिलाओं को प्रसव कराने
-बच्चों के लिए टीकाकरण की व्यवस्था
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग
जिले का स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। जिससे मरीजों को काफी समस्या रहती है।
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उपस्वास्थ्य केंद्रों पर एएनएम की तैनाती है। बच्चों में होने वाले टीकाकरण के लिए प्रत्येक बुधवार को एएनएम ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचती हैं। इसके अलावा अभियान के दौरान भी गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों का टीकाकरण किया जाता है। डा. अविनाश डिप्टी सीएमओ