फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   civic

आधी आबादी के जिम्मे आबादी नियंत्रण

Wed, 10 Jul 2019 11:00 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jul 2019 11:00 PM IST
विज्ञापन
civic
एटा। हमारे समाज को पुरुष प्रधान माना जाता है, लेकिन परिवार नियोजन के मामले में महिलाओं पर सारा दारोमदार है। जिले में आधी आबादी पर ही आबादी नियंत्रण का जिम्मा है। जनसंख्या नियंत्रण को चल रहे कार्यक्रमों की हकीकत पर गौर करें तो जिले में नसबंदी और परिवार नियोजन योजनाएं पूरी तरह से फ्लॉप साबित हो रही हैं। जिले में नसंबदी कराने में पुरुष फिसड्डी हैं। जबकि बीते तीन माह में 59 महिलाओं ने नसबंदी कराई है। जबकि किसी भी पुरुष की नसबंदी नहीं हुई। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण महज दिखावा बनकर रह गया है।
विज्ञापन

जिले में स्वास्थ्य विभाग जनसंख्या नियंत्रण और परिवार कल्याण कार्यक्रम को लेकर तमाम योजनाएं संचालित कर रहा है। जिसमें नसबंदी, कॉपर टी समेत तमाम गर्भनिरोधक उपाय के बारे में दपंतियों को जानकारी दी जाती है। नसबंदी के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में स्वास्थ्य विभाग को 1718 महिला पुरुषों की नसबंदी करनी है, लेकिन जिले में तीन महीने में 59 महिलाओं और एक पुरुष की नसबंदी की जा सकी है। इससे साफ जाहिर है कि परिवार नियोजन को लेकर जिले में जागरूकता कहां तक कारगर साबित हो रही है। जिले मेें जनसंख्या नियंत्रण के आंकड़े को लेकर सीएमओ डा. एके अग्रवाल कहते हैं कि जनसंख्या और परिवार कल्याण कार्यक्रमों को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। सभी सीएचसी-पीएचसी पर इसे लेकर जागरूकता कार्यक्रम करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन

संकुचित धारणा से पुरुष पीछे
नसबंदी के पुरुषों का पीछे होना संकुचित मानसिकता को दर्शाता है। काउंसलर अंजू सक्सेना कहती हैं कि नसबंदी को लेकर पुरुषों में नकारात्मकता रहती है। महिलाओं की नसबंदी कराकर वे सोचते हैं कि अब परिवार नियोजन हो सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। दंपति को मिलकर इस पर विचार करने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

1645878 है जिले की कुल जनसंख्या
59 महिलाओं ने कराई है नसबंदी
1634 महिलाओं का मिला है लक्ष्य
84 पुरुषों की नसबंदी का मिला लक्ष्य
साल भर नहीं आती याद
एटा। जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिला जनसंख्या नियंत्रण में लगातार पिछड़ता जा रहा है। इसके चलते जिले की प्रजनन दर 4.2 हो गई है। प्रतिदिन जन्म ले रहे बच्चों की संख्या के हिसाब से पुरुषों को भी अपनी नसबंदी करानी चाहिए। जबकि पुरुष मामले में काफी पीछे है। इसमें विभाग और प्रशासन की भी कमी है। साल भर कार्यक्रम भले ही होते रहें लेकिन जागरूकता का अभाव रहता है, इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों के पुरुष इसे नहीं अपनाते।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed