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एयरपोर्ट को ‘शहर की संसद’ की हरी झंडी
अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 23 Apr 2016 01:20 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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शहर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के प्रस्ताव को शहर की ‘संसद ने हरी झंडी’ दे दी है। नगर निगम सदन की कार्यवाही के दौरान पार्षदों ने ध्वनिमत से इसे पास कर दिया है। इससे पहले जलकल का बजट बिना चर्चा के सदन में पास किए जाने पर काफी हंगामा हुआ। भाजपा, बसपा सहित सपा पार्षदों ने महापौर इंद्रजीत सिंह आर्य के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
शुक्रवार को नगर निगम के विशेष सदन में शहर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के प्रस्ताव रखा गया। कांग्रेस पार्षद दल के नेता शिरोमणि सिंह ने इस प्रस्ताव को पढ़ा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा शहर के नागरिकों के हित से सीधा संबंध रखता है। लंबे समय से इस पर आम सहमति है। भारत और राज्य सरकार ने भी इसे स्वीकार किया है। कहा कि ताजमहल की वजह से तमाम उद्योगों को शहर से खत्म कर दिया गया है, सिर्फ पर्यटन ही बचा है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के अभाव में ये भी फल-फूल नहीं पा रहा। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटन जगत को काफी लाभ मिलेगा। सभी दलों के पार्षदों ने अंतरराष्ट्रीय जरूरत पर प्रकाश डालते हुए इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया। मगर, इससे पहले सदन में जमकर हंगामा हुआ। बसपा पार्षदों ने सदन में होते हुए भी उपस्थित पंजिका पर हस्ताक्षर नहीं किए। 18 अप्रैल को सदन की कार्यवाही के दौरान बिना चर्चा किए जलकल का बजट पास करने के विरोध में महापौर के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। सपा पार्षदों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि बसपा पार्षद पहले औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर सदन में उपस्थित हों, इसके बाद वे चर्चा में भाग लें। इस पर दोनों दलों के पार्षदों में जमकर कहासुनी हो गई। महापौर के हस्तक्षेप के बाद ही वे शांत हुए। भाजपा पार्षदों ने भी इसका विरोध किया।
अनुपस्थित रहे सांसद-विधायक
नगर निगम सदन में एयरपोर्ट का प्रस्ताव पास होने से सीधा तो कोई लाभ नहीं होने वाला लेकिन इतने गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए न तो विशेष आमंत्रित सदस्य सांसद और न ही विधायक मौजूद थे। हालांकि सदन की तरफ से इन सभी को बैठक से पूर्व ही सूचना भेज दी जाती है, इसके बावजूद इनकी गैरमौजूदगी पर पार्षदों ने सवाल उठाए।
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महापौर के खिलाफ सपा
पार्षद ने खोला मोर्चा
सदन में जलकल का मुद्दा शुरू से अंत तक छाया रहा। सपा पार्षद भी इस पर खुलकर महापौर के सामने आ गए। हेमंत प्रजापति ने महापौर पर जनता की अनदेखी और अधिकारियों की मनमानी का आरोप लगाते हुए सदन में आंखों पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया। उनका कहना था कि जलकल अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप हैं, इसके बावजूद जलकल का बजट बिना चर्चा के कैसे पास कर दिया गया। महापौर ने बताया कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की जा रही है। इसकी रिपोर्ट आते ही सदन में इस पर चर्चा की जाएगी। इस आश्वासन के बाद ही हेमंत ने अपनी आंखों से पट्टी खोली।
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शुक्रवार को नगर निगम के विशेष सदन में शहर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के प्रस्ताव रखा गया। कांग्रेस पार्षद दल के नेता शिरोमणि सिंह ने इस प्रस्ताव को पढ़ा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा शहर के नागरिकों के हित से सीधा संबंध रखता है। लंबे समय से इस पर आम सहमति है। भारत और राज्य सरकार ने भी इसे स्वीकार किया है। कहा कि ताजमहल की वजह से तमाम उद्योगों को शहर से खत्म कर दिया गया है, सिर्फ पर्यटन ही बचा है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के अभाव में ये भी फल-फूल नहीं पा रहा। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटन जगत को काफी लाभ मिलेगा। सभी दलों के पार्षदों ने अंतरराष्ट्रीय जरूरत पर प्रकाश डालते हुए इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया। मगर, इससे पहले सदन में जमकर हंगामा हुआ। बसपा पार्षदों ने सदन में होते हुए भी उपस्थित पंजिका पर हस्ताक्षर नहीं किए। 18 अप्रैल को सदन की कार्यवाही के दौरान बिना चर्चा किए जलकल का बजट पास करने के विरोध में महापौर के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। सपा पार्षदों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि बसपा पार्षद पहले औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर सदन में उपस्थित हों, इसके बाद वे चर्चा में भाग लें। इस पर दोनों दलों के पार्षदों में जमकर कहासुनी हो गई। महापौर के हस्तक्षेप के बाद ही वे शांत हुए। भाजपा पार्षदों ने भी इसका विरोध किया।
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अनुपस्थित रहे सांसद-विधायक
नगर निगम सदन में एयरपोर्ट का प्रस्ताव पास होने से सीधा तो कोई लाभ नहीं होने वाला लेकिन इतने गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए न तो विशेष आमंत्रित सदस्य सांसद और न ही विधायक मौजूद थे। हालांकि सदन की तरफ से इन सभी को बैठक से पूर्व ही सूचना भेज दी जाती है, इसके बावजूद इनकी गैरमौजूदगी पर पार्षदों ने सवाल उठाए।
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महापौर के खिलाफ सपा
पार्षद ने खोला मोर्चा
सदन में जलकल का मुद्दा शुरू से अंत तक छाया रहा। सपा पार्षद भी इस पर खुलकर महापौर के सामने आ गए। हेमंत प्रजापति ने महापौर पर जनता की अनदेखी और अधिकारियों की मनमानी का आरोप लगाते हुए सदन में आंखों पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया। उनका कहना था कि जलकल अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप हैं, इसके बावजूद जलकल का बजट बिना चर्चा के कैसे पास कर दिया गया। महापौर ने बताया कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की जा रही है। इसकी रिपोर्ट आते ही सदन में इस पर चर्चा की जाएगी। इस आश्वासन के बाद ही हेमंत ने अपनी आंखों से पट्टी खोली।