भिक्षावृत्ति में खो रहा बचपन: ताजनगरी के प्रमुखों चौराहों पर भीख मांगते नजर आते हैं मासूम बच्चे
बाल विकास के नारों और दावों के बीच बचपन की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, जो लोगों के दिलों को झकझोर देती हैं। इनमें बच्चों द्वारा भिक्षावृत्ति की तस्वीरें सरकार और समाज को शर्मसार करती हैं। आगरा के प्रमुख चौराहों पर बच्चे भीख मांगते नजर आते हैं और भिक्षावृत्ति रोकने के अभियान कागजों में चल रहा है।
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आगरा के सूरसदन चौराहे पर पांच साल की बच्ची बैठी हुई थी। हाथ में कपड़े का एक टुकड़ा पकड़े हुई थी। तभी रेड लाइट पर एक कार रुकती है। वह दौड़ पड़ती है। पहले कपड़े से शीशा साफ करती है, बाद में इशारा करके रुपये मांगने लगती है। कार सवार उसे रुपये देकर चला जाता है। ग्रीन लाइट होने पर वह सड़क से हटकर फुटपाथ पर रेड लाइट होने के इंतजार में बैठ जाती है। यह दृश्य एक दिन का नहीं एमजी रोड के चौराहों पर आम हो गया है।
भगवान टाकीज, सूरसदन तिराहे, हरीपर्वत, साईं का तकिया, आगरा क्लब के आसपास बच्चों के साथ आए महिला और पुरुष भी रहते हैं। लोगों से रुपये मांगकर बच्चे इन्हीं लोगों को देते हैं। पुलिस ने पिछले दिनों भिक्षावृत्ति रोकने के लिए अभियान चलाया। कई बच्चों को रेस्क्यू करके पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया गया। लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। अभियान के बंद होते ही फिर से बच्चों से भिक्षावृत्ति कराई जाने लगी।
दूसरे जिले के बच्चों से मंगवाई जा रही भीख
सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस ने बताया कि वह भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों से बात कर चुके हैं। कई बार बच्चे दूसरे जिले के होते हैं। उन्हें कुछ लोग लेकर आते हैं और भिक्षावृत्ति कराते हैं। पुलिस अभियान चलाती है तो ये लोग कुछ दिनों के लिए चले जाते हैं।
कूड़ा बीनकर नशा करने वाले भी
नरेश पारस ने बताया कि लावारिस और कूड़ा बेचने वाले बच्चों में नशे की समस्या भी बढ़ रही है। शहर में रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और प्रमुख चौराहों पर कूड़ा बीनने वाले किशोर भी नजर आते हैं। यह कूड़े को बेचकर पंक्चर जोड़ने वाला ट्यूब, व्हाइटनर खरीदकर लाते हैं। इसको कपड़े में डालकर सूंघते हैं। कई बार कूड़े से रुपये नहीं मिल पाने पर चोरी तक करते हैं।
जागरूकता के बाद चलाएंगे अभियान
एसपी सिटी विकास कुमार ने बताया कि एंटी बैगर एक्ट में कार्रवाई की जाती है। इसके लिए मानव तस्करी निरोधक थाना अपने स्तर से समय-समय पर अभियान चलाता है। रविवार को जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। भीख मांगने वाले बच्चों से बात की जाएगी। उनके मां-बाप को समझाया जाएगा। इसके बाद कार्रवाई करेंगे। कोई गैंग मिलता है तो उस पर कार्रवाई करेंगे। बच्चों के परिजन नहीं मिलेंगे तो उन्हें आश्रय प्रदान कराया जाएगा।