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छठ पूजा: नहाय खाय के साथ सूर्य उपासना का पर्व शुरू, यमुना घाटों पर लगेगा आस्था का मेला
Thu, 31 Oct 2019 04:45 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 31 Oct 2019 04:45 PM IST
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छठ पूजा (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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सूर्य उपासना का पर्व (छठ पूजा) गुरुवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया है। श्रद्धालु व्रत, पूजा और सेवा के जरिये छठ मैया को मनाने में लग जाएंगे। चार दिनों तक पूजा चलेगी। ब्रज में भी यह पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। दो नवंबर की शाम और और तीन की सुबह यमुना के घाटों पर मेला लगेगा। श्रद्धालु अस्ताचलगामी और उदयाचलगामी सूर्य की उपासना कर अर्घ्य देंगे।
यह पर्व मुख्य रूप से यह भोजपुर क्षेत्र का माना जाता था, अब पूरे देश मनाया जाता है। आगरा-मथुरा भी में व्रतियों व उपासकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यमुना के सभी घाटों पर अच्छीखासी भीड़ होने लगी है। मेला भी लगता है।
घरों में छठ पूजन की तैयारियां गत कई दिनों से चल रही थी। पूजा के पहले दिन नहाय-खाय में व्रती महिलाएं चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी खाएंगी। इसका सेवन शुद्धीकरण के लिए किया जाता है। शुद्ध होने के बाद ही छठ पूजन की तमाम तैयारियां की जाती हैं।
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यह पर्व मुख्य रूप से यह भोजपुर क्षेत्र का माना जाता था, अब पूरे देश मनाया जाता है। आगरा-मथुरा भी में व्रतियों व उपासकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यमुना के सभी घाटों पर अच्छीखासी भीड़ होने लगी है। मेला भी लगता है।
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घरों में छठ पूजन की तैयारियां गत कई दिनों से चल रही थी। पूजा के पहले दिन नहाय-खाय में व्रती महिलाएं चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी खाएंगी। इसका सेवन शुद्धीकरण के लिए किया जाता है। शुद्ध होने के बाद ही छठ पूजन की तमाम तैयारियां की जाती हैं।
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यमुना घाटों पर होंगे कार्यक्रम
आगरा के बल्केश्वर, रामबाग, हाथीघाट, कैलाश घाट, पोइया घाट, दशहरा घाट पर श्रद्धालु पूजन के लिए पहुंचेंगे। घाटों पर सफाई शुरू कर दी गई है। वहीं मथुरा के रिफाइनरी टाउनशिप, यमुना के विश्राम घाट, बैराज घाट, कोयला अलीपुर घाट पर छठ पूजा के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति के अध्यक्ष शंभूनाथ चौबे ने बताया कि नहाये-खाये के बाद एक नवंबर को खरना होगा। इसे छोटी छठ भी कहते हैं। इस दिन महिलाएं दिन में व्रत रखती हैं और शाम को रोटी और खीर खाकर व्रत खोलती हैं।
दो नवंबर को पूरे दिन और रात महिलाएं निर्जल व्रत रहेंगी। तीन की सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद यह अपना व्रत खोलेंगी। आखिरी दिन घाटों पर पूजन के बाद महिलाएं घर में लेपन के लिए नदी का जल और मिट्टी अपने साथ ले जाती हैं। घर में पूजापाठ करके आसपास के लोगों को प्रसाद वितरित करती हैं।
पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति के अध्यक्ष शंभूनाथ चौबे ने बताया कि नहाये-खाये के बाद एक नवंबर को खरना होगा। इसे छोटी छठ भी कहते हैं। इस दिन महिलाएं दिन में व्रत रखती हैं और शाम को रोटी और खीर खाकर व्रत खोलती हैं।
दो नवंबर को पूरे दिन और रात महिलाएं निर्जल व्रत रहेंगी। तीन की सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद यह अपना व्रत खोलेंगी। आखिरी दिन घाटों पर पूजन के बाद महिलाएं घर में लेपन के लिए नदी का जल और मिट्टी अपने साथ ले जाती हैं। घर में पूजापाठ करके आसपास के लोगों को प्रसाद वितरित करती हैं।
चार दिवसीय पर्व है छठ पूजा
पहला दिन - 31 अक्तूबर - नहाय खाय
छठ पूजा की शुरूआत पहले दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के साथ हो जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले स्नान आदि कर नए वस्त्र धारण करते हैं। शाकाहारी भोजन करते हैं। सामूहिक भोजन की परंपरा है।
दूसरा दिन - 1 नवंबर - खरना
छठ पूजा के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रत रखा जाता है। इस दिन शाम के समय एक बार भोजन ग्रहण करने का प्रावधान है। इसे खरना कहा जाता है। इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं। शाम को चावल व गुड़ की खीर बनाकर खाई जाती है।
तीसरा दिन- 2 नवंबर - सायंकालीन अर्घ्य
छठ पूजा के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भी निर्जला व्रत रखा जाता है। छठ पूजा का प्रसाद तैयार करते हैं। इस दिन व्रती शाम के समय किसी नदी, तालाब पर जाकर पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। और रात भर जागरण किया जाता है।
चौथा दिन- 3 नवंबर - प्रात:कालीन अर्घ्य
छठ पूजा के चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह भी पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। परिक्रमा भी करते हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है।
छठ पूजा की शुरूआत पहले दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के साथ हो जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले स्नान आदि कर नए वस्त्र धारण करते हैं। शाकाहारी भोजन करते हैं। सामूहिक भोजन की परंपरा है।
दूसरा दिन - 1 नवंबर - खरना
छठ पूजा के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रत रखा जाता है। इस दिन शाम के समय एक बार भोजन ग्रहण करने का प्रावधान है। इसे खरना कहा जाता है। इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं। शाम को चावल व गुड़ की खीर बनाकर खाई जाती है।
तीसरा दिन- 2 नवंबर - सायंकालीन अर्घ्य
छठ पूजा के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भी निर्जला व्रत रखा जाता है। छठ पूजा का प्रसाद तैयार करते हैं। इस दिन व्रती शाम के समय किसी नदी, तालाब पर जाकर पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। और रात भर जागरण किया जाता है।
चौथा दिन- 3 नवंबर - प्रात:कालीन अर्घ्य
छठ पूजा के चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह भी पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। परिक्रमा भी करते हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है।
छठ मैया पूरी करती हैं मुराद
‘छठ मैया का व्रत रोगों से मुक्ति पाने और संतान की सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए रखा जाता है। सच्चे मन से व्रत रखने पर मैया मनोकामना जरूर पूरी करती हैं। जिसकी मनोकामना पूरी होती है वह कोसी भरते हैं।’ - मालती चौबे, श्रद्धालु
‘छठ मैया के प्रति श्रद्धा ही है, बहुत से श्रद्धालु दंडवत करते हुए घाटों पर पहुंचते हैं। इसमें अधिकतर मनोकामना पूरी होने पर भी दंडवत करते हैं। छठ मैया की कृपा से मेरे पति का व्यापार अच्छा चल रहा है।’ - कंचन तिवारी, श्रद्धालु
‘छठ मैया की कृपा से परिवार में कोई कमी नहीं है। इस पर्व में व्रतियों की सेवा करने वालों को भी बहुत लाभ मिलता है। लोग व्रतियों की सेवा के लिए आतुर रहते हैं। ’ - प्रभा शर्मा
‘छठ पर्व का वर्ष भर इंतजार रहता है। पूजा के लिए सामग्री तैयार करने और पूजा में शामिल होने की खुशी को शब्दों में बया नहीं किया जा सकता है। मैया की कृपा से जीवन में सब कुछ अच्छा हो रहा है।’ - अनुराधा दुबे, श्रद्धालु
‘छठ मैया के प्रति श्रद्धा ही है, बहुत से श्रद्धालु दंडवत करते हुए घाटों पर पहुंचते हैं। इसमें अधिकतर मनोकामना पूरी होने पर भी दंडवत करते हैं। छठ मैया की कृपा से मेरे पति का व्यापार अच्छा चल रहा है।’ - कंचन तिवारी, श्रद्धालु
‘छठ मैया की कृपा से परिवार में कोई कमी नहीं है। इस पर्व में व्रतियों की सेवा करने वालों को भी बहुत लाभ मिलता है। लोग व्रतियों की सेवा के लिए आतुर रहते हैं। ’ - प्रभा शर्मा
‘छठ पर्व का वर्ष भर इंतजार रहता है। पूजा के लिए सामग्री तैयार करने और पूजा में शामिल होने की खुशी को शब्दों में बया नहीं किया जा सकता है। मैया की कृपा से जीवन में सब कुछ अच्छा हो रहा है।’ - अनुराधा दुबे, श्रद्धालु