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स्मृति शेष: छोटे चौधरी के बारे में ताजनगरी में मशहूर हैं कई किस्से, अजित रुके तो लोगों ने गांव का नाम अजित गढ़ रख दिया
Sat, 08 May 2021 12:26 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 08 May 2021 12:26 AM IST
सार
पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कप्तान सिंह चाहर के मुताबिक चौधरी चरण सिंह ने आगरा में अपने राजनीतिक जीवन की आखिरी जनसभा 25 फरवरी 2017 को चाहरवाटी डिग्री कॉलेज के प्रांगण में पूर्व मंत्री नारायण सिंह सुमन के समर्थन में की थी।
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चौधरी अजित सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अजित सिंह के निधन से उनके समर्थकों व पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। आगरा में उनके कई किस्से मशहूर हैं। रालोद जिलाध्यक्ष डॉ. मालती सिंह का 1985-86 में पदयात्रा पर निकले अजित सिंह ने बगलघूसा में रात्रि विश्राम किया, लोगों ने गांव को बदलकर अजित गढ़ कर दिया। आगरा में हवाई अड्डे के लिए उनके प्रयासों को याद किया जाएगा।
पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कप्तान सिंह चाहर के मुताबिक चौधरी चरण सिंह ने आगरा में अपने राजनीतिक जीवन की आखिरी जनसभा 25 फरवरी 2017 को चाहरवाटी डिग्री कॉलेज के प्रांगण में पूर्व मंत्री नारायण सिंह सुमन के समर्थन में की थी।
रालोद की जिलाध्यक्ष डॉ. मालती सिंह का कहना है कि गरीब, मजदूर और किसानों के लिए उम्रभर संघर्ष करने वाले इस नेता ने जो रिक्त स्थान छोड़ा है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। आगरा में हवाई अड्डा के निर्माण के लिए उनके प्रयास को हमेशा याद रखा जाएगा। चौधरी अजित सिंह वर्ष 1985-86 में प्रदेश की पदयात्रा पर निकले थे, आगरा में बगलघूसा नाम के गांव में रात्रि विश्राम किया था, तब से वहां की जनता ने गांव का नाम बदलकर उनके नाम पर अजित गढ़ रखा था।
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पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कप्तान सिंह चाहर के मुताबिक चौधरी चरण सिंह ने आगरा में अपने राजनीतिक जीवन की आखिरी जनसभा 25 फरवरी 2017 को चाहरवाटी डिग्री कॉलेज के प्रांगण में पूर्व मंत्री नारायण सिंह सुमन के समर्थन में की थी।
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रालोद की जिलाध्यक्ष डॉ. मालती सिंह का कहना है कि गरीब, मजदूर और किसानों के लिए उम्रभर संघर्ष करने वाले इस नेता ने जो रिक्त स्थान छोड़ा है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। आगरा में हवाई अड्डा के निर्माण के लिए उनके प्रयास को हमेशा याद रखा जाएगा। चौधरी अजित सिंह वर्ष 1985-86 में प्रदेश की पदयात्रा पर निकले थे, आगरा में बगलघूसा नाम के गांव में रात्रि विश्राम किया था, तब से वहां की जनता ने गांव का नाम बदलकर उनके नाम पर अजित गढ़ रखा था।
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रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निधन पर शोक व्यक्त किया
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निधन पर पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कप्तान सिंह चाहर, पूर्व मंडल अध्यक्ष नरेंद्र बघेल, चौधरी गोपीचंद, चौधरी दिलीप सिंह, मुकेश पहलवान, रामवीर सिंह, यदुवीर सिंह चाहर, अशोक चाहर आदि ने दु:ख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि देश के किसानों व गरीबों ने अपना हितैषी खो दिया है। शिक्षाविद् डॉ. केएस राना ने बताया कि वह हाईकोर्ट बैंच की स्थापना के लिए अधिवक्ताओं के साथ चौधरी अजित सिंह से मिले थे। औटा के अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह व अन्य पदाधिकारियों ने भी शोक व्यक्त किया है।
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निधन पर पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कप्तान सिंह चाहर, पूर्व मंडल अध्यक्ष नरेंद्र बघेल, चौधरी गोपीचंद, चौधरी दिलीप सिंह, मुकेश पहलवान, रामवीर सिंह, यदुवीर सिंह चाहर, अशोक चाहर आदि ने दु:ख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि देश के किसानों व गरीबों ने अपना हितैषी खो दिया है। शिक्षाविद् डॉ. केएस राना ने बताया कि वह हाईकोर्ट बैंच की स्थापना के लिए अधिवक्ताओं के साथ चौधरी अजित सिंह से मिले थे। औटा के अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह व अन्य पदाधिकारियों ने भी शोक व्यक्त किया है।