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Chandra Grahan 2022: जल्द लगेगा चंद्र ग्रहण, इस दिन बदल जाएगा जन्मभूमि और द्वारिकाधीश मंदिर में दर्शन का समय

Fri, 04 Nov 2022 12:05 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 04 Nov 2022 12:05 AM IST
सार

मंदिर ठाकुर द्वारिकाधीश के दर्शन का समय देवोत्त्थान एकादशी से परिवर्तित होने जा रहा है। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि देवोत्थान एकादशी के दिन से दर्शन के सायंकाल के समय में परिवर्तन हो रहा है।
 

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Chandra Grahan 2022 Lunar eclipse will soon time of darshan in Janmabhoomi and Dwarkadhish temple will change
चंद्र ग्रहण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण पड़ेगा। ये चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा। इस दिन से श्रीकृष्ण जन्मभूमि और ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर में दर्शन का समय बदल जाएगा। 

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मथुरा में चंद्रग्रहण पर आठ नवंबर को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मंदिर के समय में परिवर्तन किया गया है। श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को सभी मंदिर प्रात: 5:00 बजे मंगला आरती के साथ खुलेंगे। तदोपरांत ठाकुरजी को माखन-मिश्री भोग, बाल-भोग एवं राजभोग अर्पित करने के पश्चात प्रात: 8:00 बजे मंदिर के पट बंद हो जाएंगे। 
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उन्होंने बताया कि सायंकाल ग्रहण मोक्ष के पश्चात श्रीठाकुरजी को स्नान आदि के बाद नूतन वस्त्र, आभूषण धारण कराए जाएंगे। सायं 7:30 बजे से ठाकुरजी के दर्शन भक्तों को पुन: प्राप्त होंगे। शयन आरती के उपरांत मंदिर के पट रात्रि 9:00 बजे बंद होंगे। लीलामंच पर भजन-गायन होगा जो ग्रहण मोक्ष सायं 6:18 बजे तक चलेगा। गायक जगदीश ब्रजवासी दोपहर 2:00 बजे से भजन प्रस्तुत करेंगे। प्रात: 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक श्रीकृष्ण संकीर्तन मंडल के रसिक भक्तजन भजन गायन करेंगे। संवाद

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द्वारिकाधीश मंदिर का समय

मंदिर ठाकुर द्वारिकाधीश के दर्शन का समय देवोत्त्थान एकादशी से परिवर्तित होने जा रहा है। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि देवोत्थान एकादशी के दिन से दर्शन के सायंकाल के समय में परिवर्तन हो रहा है। मंगला, शृंगार, ग्वाल और राजभोग के दर्शन नियमानुसार पूर्ववत रहेंगे। उध्यापन के दर्शन शाम 7:30 बजे, मंडप के दर्शन रात्रि 8:15 बजे, जागरण की झांकी रात्रि 10:00 और 11:45 बजे तुलसी शालिग्राम का विवाह होगा। 



तत्पश्चात मंगला, शृंगार, ग्वाल, राजभोग के दर्शन प्रात: काल को सुबह 4:30 बजे से 5:00 बजे तक अर्थात 5 नवंबर को सुबह की कोई झांकी नहीं होगी। सायंकाल से दर्शन का परिवर्तित समय प्रभावी होगा। इसमें 3:30 बजे से 3:50 बजे तक अध्यापन के दर्शन होंगे। भोग के दर्शन 4:20 से 4:40 तक, संध्या आरती 4:55 से 5:10 तक और शयन के दर्शन 6:00 बजे से 7:00 बजे तक होंगे।

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