{"_id":"57017b324f1c1b012cc811c2","slug":"chambal-crocodail","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंबल में घड़ियालों की नेस्टिंग शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंबल में घड़ियालों की नेस्टिंग शुरू
चंबल में घड़ियालों की नेस्टिंग शुरू
Updated Mon, 04 Apr 2016 01:51 AM IST
विज्ञापन
चंबल में घड़ियालों की नेस्टिंग शुरू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंबल नदी में घड़ियालों की नेस्टिंग शुरू हो गई है। सियार से अंडों को बचाने के लिए वनकर्मी जाली लगा रहे हैं। लोकेशन ट्रेस करने के लिए जीपीएस से नेस्टिंग की रीडिंग ली जा रही है।
बता दें कि चंबल नदी में 1979 से घड़ियालों के संरक्षण की परियोजना चल रही है। इनके अंडे पहले कुकरैल प्रजनन केन्द्र लखनऊ और देवरी मुरैना ले जाए जाते थे। वहां से घड़ियाल शिशुओं को लाकर नदी में छोड़ा जाता था। बीते एक दशक से चंबल में ही नेस्टिंग और हैचिंग की प्रक्रिया होने लगी है। इन दिनों नेस्टिंग सीजन शुरू हो गया है। बाह रेन्ज में रेहा से उदयपुर खुर्द तक चंबल की बालू में नेस्टिंग स्पॉट चिह्नित कर अंडों पर वनकर्मी जाली लगा रहे हैं। नन्दगवां घाट पर नेस्टिंग की गयी है। सहायक वन्य जीव प्रतिपालक मुमताज कुमार ने बताया कि सियार से घड़ियालों के अंडों को नुकसान की आशंका रहती है। इसलिए जाली लगाई जा रही है। हैचिंग पीरियड शुरू होते ही जाली को हटा दिया जाएगा। रेन्जर वन्य जीव बाह आरके शर्मा ने बताया कि चंबल में निगरानी बढ़ा दी गयी है। घड़ियालों के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। बालू में अंडों को सुरक्षित रखने के लिए जाली लगाकर जीपीएस से लोकेशन लगातार ट्रेस की जायेगी।
-------
कछुओं की नेस्टिंग का काम पूरा
चंबल में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का भी संरक्षण हो रहा है। करीब एक पखवाडे़ तक कछुओं की नेस्टिंग का काम चला। रेंजर ने बताया कि कछुओं की नेस्टिंग का काम लगभग पूरा हो गया है। अब घड़ियालों की नेस्टिंग पर नजर टिकी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि चंबल नदी में 1979 से घड़ियालों के संरक्षण की परियोजना चल रही है। इनके अंडे पहले कुकरैल प्रजनन केन्द्र लखनऊ और देवरी मुरैना ले जाए जाते थे। वहां से घड़ियाल शिशुओं को लाकर नदी में छोड़ा जाता था। बीते एक दशक से चंबल में ही नेस्टिंग और हैचिंग की प्रक्रिया होने लगी है। इन दिनों नेस्टिंग सीजन शुरू हो गया है। बाह रेन्ज में रेहा से उदयपुर खुर्द तक चंबल की बालू में नेस्टिंग स्पॉट चिह्नित कर अंडों पर वनकर्मी जाली लगा रहे हैं। नन्दगवां घाट पर नेस्टिंग की गयी है। सहायक वन्य जीव प्रतिपालक मुमताज कुमार ने बताया कि सियार से घड़ियालों के अंडों को नुकसान की आशंका रहती है। इसलिए जाली लगाई जा रही है। हैचिंग पीरियड शुरू होते ही जाली को हटा दिया जाएगा। रेन्जर वन्य जीव बाह आरके शर्मा ने बताया कि चंबल में निगरानी बढ़ा दी गयी है। घड़ियालों के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। बालू में अंडों को सुरक्षित रखने के लिए जाली लगाकर जीपीएस से लोकेशन लगातार ट्रेस की जायेगी।
विज्ञापन
-------
कछुओं की नेस्टिंग का काम पूरा
चंबल में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का भी संरक्षण हो रहा है। करीब एक पखवाडे़ तक कछुओं की नेस्टिंग का काम चला। रेंजर ने बताया कि कछुओं की नेस्टिंग का काम लगभग पूरा हो गया है। अब घड़ियालों की नेस्टिंग पर नजर टिकी हुई है।
विज्ञापन