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नहर से तालाब व बरसाती नदियों को जोड़ने की जिले में चल रही कवायद
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कासगंज। जिले में पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) को सुधारने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड लाइव फंड) ने नहर से तालाब और बरसाती नदियों को जोड़ने की कवायद शुरू की है। इससे पर्यावरण तो सुधरेगा ही। साथ ही भूजल संचयन के स्रोत तैयार होंगे।
इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने ब्लू प्रिंट तैयार किया है। इससे नहर के पानी का तालाबों और बरसाती नदियों में भी प्रयोग किया जा सके। जिले में 345 किलोमीटर नहरों का नेटवर्क है। जब किसानों को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता नहीं होती तो उस दौरान इन नहरों के पानी को तालाबों और बरसाती नदियों में दिया जाएगा। नहरों पर पानी की निगरानी के लिए हाइड्रोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम तैयार किया गया है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और सिंचाई विभाग की टीम ने यह योजना बनाई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने इसके लिए वित्तीय स्वीकृति भी दी है। जिले में इस योजना पर कार्य किया जाएगा। यदि योजना सफल हुई तो पर्यावरण और भूजल संचयन के लिए लाभकारी रहेगी।
क्या बोले डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी
कासगंज। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सीनियर कोआर्डिनेटर राजेश कुमार बाजपेयी और एसोसिएट डायरेक्टर नितिन कौशल ने बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और सिंचाई विभाग ने नहरों के पानी का सदुपयोग करने के लिए यह प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिससे नहर के पानी से सूखे तालाबों व बरसाती नदियों को पुनर्जीवित किया जाएगा। पहले चरण में 7 छोटी नहरें और 3 रजबहा इस प्रोजेक्ट में शामिल किए जा रहे हैं। रजबहा की निकटतम नदियों व तालाबों को पानी दिया जाएगा।
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भूजल स्तर व पर्यावरण को देखते हुए नहरों के पानी को तालाबों व बरसाती नदियों तक ले जाने के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। यह प्रोजेक्ट कितने अच्छे परिणाम देगा। इसके परिणाम आने पर इसका विस्तार किया जाएगा। फिलहाल सूख रही दरियावगंज झील में रजबहा के माध्यम से पानी दिया गया है। - हर्षिता माथुर, जिलाधिकारी।
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इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने ब्लू प्रिंट तैयार किया है। इससे नहर के पानी का तालाबों और बरसाती नदियों में भी प्रयोग किया जा सके। जिले में 345 किलोमीटर नहरों का नेटवर्क है। जब किसानों को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता नहीं होती तो उस दौरान इन नहरों के पानी को तालाबों और बरसाती नदियों में दिया जाएगा। नहरों पर पानी की निगरानी के लिए हाइड्रोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम तैयार किया गया है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और सिंचाई विभाग की टीम ने यह योजना बनाई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने इसके लिए वित्तीय स्वीकृति भी दी है। जिले में इस योजना पर कार्य किया जाएगा। यदि योजना सफल हुई तो पर्यावरण और भूजल संचयन के लिए लाभकारी रहेगी।
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क्या बोले डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी
कासगंज। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सीनियर कोआर्डिनेटर राजेश कुमार बाजपेयी और एसोसिएट डायरेक्टर नितिन कौशल ने बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और सिंचाई विभाग ने नहरों के पानी का सदुपयोग करने के लिए यह प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिससे नहर के पानी से सूखे तालाबों व बरसाती नदियों को पुनर्जीवित किया जाएगा। पहले चरण में 7 छोटी नहरें और 3 रजबहा इस प्रोजेक्ट में शामिल किए जा रहे हैं। रजबहा की निकटतम नदियों व तालाबों को पानी दिया जाएगा।
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भूजल स्तर व पर्यावरण को देखते हुए नहरों के पानी को तालाबों व बरसाती नदियों तक ले जाने के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। यह प्रोजेक्ट कितने अच्छे परिणाम देगा। इसके परिणाम आने पर इसका विस्तार किया जाएगा। फिलहाल सूख रही दरियावगंज झील में रजबहा के माध्यम से पानी दिया गया है। - हर्षिता माथुर, जिलाधिकारी।