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जन्माष्टमी: देवकी ने जायौ लल्ला, नन्द के घर ऐसे मनाया गया आनंद
टीम डिजिटल/अमर उजाला नंदगांव (मथुरा)
Updated Wed, 16 Aug 2017 03:07 AM IST
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नंदभवन
- फोटो : amar ujala
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मान्यता है कि कंस के भय के चलते नंदबाबा गोकुल में कन्हैया का जन्मोत्सव नहीं मना सके थे। इसीलिए नंदगांव वास के दौरान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। नंदभवन में आज भी कृष्ण जन्म महोत्सव विभिन्न लीलाओं के साथ मनाया जाता है।
नंदगांव-बरसाना की विशेष परंपरा के अनुसार पंचागों की काल गणना के उलट रक्षा बंधन के ठीक आठ दिन बाद यहां श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। 15 अगस्त को अष्टमी की संध्या से ही बरसाना के गोस्वामी समाज के लोग नंदभवन पहुंचे। यहां समाज गायन हुआ। संयुक्त समाज गायन के दौरान लाला के जन्म की बधाइयां गाई।
बरसाना गोस्वामी समाज को बधाई के उपहार स्वरूप लड्डू भेंट किए। रात 10 बजे मंदिर प्रांगण में ढांढ़ पुरोहित द्वारा नंदबाबा की वंशावली का बखान किया गया। मध्यरात्रि को मंदिर में पंचामृत से लाला के श्री विग्रह का गुप्त अभिषेक हुआ। ठीक 12 बजे मंदिर के पट भक्तों के लिए खोल दिए गए।
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पट खुलते ही नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयघोष से मंदिर प्रांगण गूंज उठा। आज 16 अगस्त नवमी को दधिकांधव, मल्ल युद्ध, बांस बधाई, भांड़ लीला, शंकर लीला आदि का मंचन किया जाएगा। नंद महोत्सव के दौरान श्री कृष्ण बलराम को रजत के हिंडोले में बाहर जगमोहन में विराजमान किया जाएगा।
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नंदगांव-बरसाना की विशेष परंपरा के अनुसार पंचागों की काल गणना के उलट रक्षा बंधन के ठीक आठ दिन बाद यहां श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। 15 अगस्त को अष्टमी की संध्या से ही बरसाना के गोस्वामी समाज के लोग नंदभवन पहुंचे। यहां समाज गायन हुआ। संयुक्त समाज गायन के दौरान लाला के जन्म की बधाइयां गाई।
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बरसाना गोस्वामी समाज को बधाई के उपहार स्वरूप लड्डू भेंट किए। रात 10 बजे मंदिर प्रांगण में ढांढ़ पुरोहित द्वारा नंदबाबा की वंशावली का बखान किया गया। मध्यरात्रि को मंदिर में पंचामृत से लाला के श्री विग्रह का गुप्त अभिषेक हुआ। ठीक 12 बजे मंदिर के पट भक्तों के लिए खोल दिए गए।
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पट खुलते ही नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयघोष से मंदिर प्रांगण गूंज उठा। आज 16 अगस्त नवमी को दधिकांधव, मल्ल युद्ध, बांस बधाई, भांड़ लीला, शंकर लीला आदि का मंचन किया जाएगा। नंद महोत्सव के दौरान श्री कृष्ण बलराम को रजत के हिंडोले में बाहर जगमोहन में विराजमान किया जाएगा।
नहीं होते अभिषेक के दर्शन
नंदबाबा मंदिर में अभिषेक के दर्शन न करा कर कृष्ण-बलराम का शृंगार कर मां यशोदा के सिर पर प्रसूता की तरह पट्टी बाँध कर दर्शन कराए जाते हैं। गुप्त रूप से ठाकुर जी का अभिषेक कराया जाता है। इसका सौभाग्य सेवायतों को ही प्राप्त होता है।
श्रीकृष्ण की सुरक्षा के लिए नंदगांव में बसे थे नंदबाबा
मथुरा में कंस के कारागार में अवतरण के बाद श्री कृष्ण को वसुदेव जी द्वारा नंद के घर गोकुल पहुंचा दिया गया। गोकुल में कंस के राक्षसों से असुरक्षित जान नंदबाबा ने शांडिल्य ऋषि से परामर्श किया। ऋषि ने नंदबाबा को श्री कृष्ण के लिए नंदीश्वर पर्वत को सुरक्षित स्थान बताया। ऋषि ने बताया कि नंदीश्वर पर्वत की परछाईं जितनी परिधि में जाएगी उतना स्थान श्री कृष्ण के लिए सुरक्षित है। इस स्थान पर कंस के भेजे राक्षस भस्म हो जाएंगे। ऋषि के परामर्श के अनुसार नंदबाबा ने सपरिवार नंदीश्वर पर्वत के समीप आकर नंदगांव बसाया। नंदबाबा मंदिर के सेवायत राकेश गोस्वामी ने बताया कि श्रीमद भागवत में नंदगांव का वर्णन नंदब्रज नाम से है। श्री कृष्ण ने अधिकांश लीलाएं माखन चोरी, गोचारण, कालीदह, गोवर्धन लीला आदि लीलाएं नंदगांव निवास के दौरान ही की हैं। कंस को मारने के लिए श्री कृष्ण अक्रूर के साथ नंदगांव से ही गए।