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UP: आगरा किला और सीकरी के लिए सीईसी दो माह में दाखिल करेगी रिपोर्ट; 5 किमी दायरे में पेड़ कटाई के नए नियम

Wed, 07 May 2025 09:09 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 07 May 2025 09:09 AM IST
सार

ताजमहल के पांच किमी दायरे में पेड़ों की कटाई की तरह आगरा किला और फतेहपुर सीकरी में भी नियम बनाए जाएंगे। कमेटी को दो माह के अंदर दोनों स्मारकों के पास पेड़ों की कटाई पर रोक के नियम और शर्तों का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट के सामने दाखिल करना होगा।
 

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CEC will submit report for Agra Fort and Sikri in two months New rules for tree felling within 5 km radius
आगरा किला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

ताजमहल से 5 किमी की हवाई दूरी के अंदर पेड़ों को काटने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। यूनेस्को के विश्व धरोहर स्मारकों आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के पास पेड़ों की कटाई रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी से रिपोर्ट तलब की है। कमेटी को दो माह के अंदर दोनों स्मारकों के पास पेड़ों की कटाई पर रोक के नियम और शर्तों का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट के सामने दाखिल करना होगा।
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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल और टीटीजेड में पेड़ों को काटने की याचिका 13381/1984 के मामले में दिए गए आदेश को अपलोड किया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी से पूछा है कि आगरा किला और फतेहपुर सीकरी की सुरक्षा के लिए पेड़ों की कटाई पर क्या प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। सीईसी दो महीने की अवधि के भीतर न्यायालय के समक्ष एक रिपोर्ट दाखिल करेगी।
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पहले शर्तों का पालन फिर काट सकेंगे पेड़
कोर्ट ने पेड़ों को काटने की अनुमति देने से इंकार किया और सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की सिफारिशों के साथ कुछ शर्तें भी जोड़ी हैं। इसमें कहा गया है कि टीटीजेड के अंदर, पर ताज के 5 किमी से बाहर के क्षेत्र में अनुमति प्रदान करते समय डीएफओ और सीईसी तब तक अनुमति नहीं देंगे, जब तक वनारोपण की सभी शर्तों का पालन नहीं हो जाता। तब तक वास्तविक पेड़ों को गिराने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्हें यह सत्यापित करके देना होगा।

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अनुमति दी तो भी कोर्ट को 15 दिन में बताना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि डीएफओ और सीईसी पेड़ काटने की अनुमति देते हैं तो 15 दिन के अंदर कोर्ट के सामने विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। जब शर्तों का पालन कर दिया जाएगा, तब नई रिपोर्ट दायर की जाएगी। पेड़ों की छंटाई और काट छांट से पहले और बाद की तस्वीरों को अपलोड करने की व्यवस्था जारी रहेगी।

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केसी जैन की याचिका की खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने एग्रो फॉरेस्ट्री के तहत निजी भूमि पर पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति प्राप्त करने की शर्त में ढील देने की मांग वाली केसी जैन की याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि अगर एग्रो फॉरेस्ट्री के तहत पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जाती है तो 1984 से सुप्रीम कोर्ट के दिए गए आदेश पूरी तरह से विफल हो जाएंगे। लोगों को इससे बिना अनुमति के पूरी तरह से विकसित पेड़ों को काटने का लाइसेंस मिल जाएगा। इससे टीटीजेड में पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। केसी जैन की याचिका आगरा को आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने के उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत है। इसलिए उनके आवेदन खारिज किए जाते हैं।
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