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Agra News: सीईसी की रिपोर्ट से गहराया पच्चीकारी व जूता कारोबार पर संकट
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आगरा। ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के बारे में सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) की नवीनतम रिपोर्ट संख्या 61 ने आगरा के औद्योगिक भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। रिपोर्ट में ताजमहल से 10 किलोमीटर की हवाई दूरी के भीतर उद्योगों की स्थापना और विस्तार पर कड़े प्रतिबंध प्रस्तावित किए हैं। सिफारिशें लागू हुईं तो अर्थव्यवस्था की रीढ़ जूता उद्योग और सदियों पुरानी पच्चीकारी कला (इनले वर्क) का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जैन के अनुसार, सीईसी ने 10 किलोमीटर के दायरे में केवल उन्हीं उद्योगों को अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है जिनका एयर पॉल्यूशन स्कोर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 30 से कम हो। मुगलकालीन पच्चीकारी कला, जिसका स्कोर पहले शून्य था, उसे अब 30 कर दिया गया है। ऐसे में 30 से कम की शर्त के कारण नई इकाइयों की स्थापना और इस विरासत को बचाना असंभव हो जाएगा।
यही स्थिति जूता उद्योग की है। सीपीसीबी 2016 के पुराने मानकों के कारण इस उद्योग के विस्तार में तकनीकी बाधाएं आएंगी। प्रस्तावित 10 किलोमीटर का दायरा लगभग 300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, जिसमें नुनिहाई और फाउंड्री नगर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। कांच और चूड़ी उद्योग का स्कोर 60 होने के कारण वे इस दायरे में पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएंगे, जिससे लाखों श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
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वैज्ञानिक साक्ष्यों की अनदेखी
केसी जैन ने तर्क दिया कि आईआईटी कानपुर के अध्ययनों (2019-2021) में स्पष्ट हो चुका है कि ताजमहल के प्रदूषण के मुख्य कारक धूल, वाहन उत्सर्जन और बायोमास हैं, न कि स्वच्छ ईंधन पर आधारित उद्योग। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है लेकिन विकास और रोजगार की बलि देकर नहीं। राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पक्ष रखना चाहिए।
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वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जैन के अनुसार, सीईसी ने 10 किलोमीटर के दायरे में केवल उन्हीं उद्योगों को अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है जिनका एयर पॉल्यूशन स्कोर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 30 से कम हो। मुगलकालीन पच्चीकारी कला, जिसका स्कोर पहले शून्य था, उसे अब 30 कर दिया गया है। ऐसे में 30 से कम की शर्त के कारण नई इकाइयों की स्थापना और इस विरासत को बचाना असंभव हो जाएगा।
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यही स्थिति जूता उद्योग की है। सीपीसीबी 2016 के पुराने मानकों के कारण इस उद्योग के विस्तार में तकनीकी बाधाएं आएंगी। प्रस्तावित 10 किलोमीटर का दायरा लगभग 300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, जिसमें नुनिहाई और फाउंड्री नगर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। कांच और चूड़ी उद्योग का स्कोर 60 होने के कारण वे इस दायरे में पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएंगे, जिससे लाखों श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
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वैज्ञानिक साक्ष्यों की अनदेखी
केसी जैन ने तर्क दिया कि आईआईटी कानपुर के अध्ययनों (2019-2021) में स्पष्ट हो चुका है कि ताजमहल के प्रदूषण के मुख्य कारक धूल, वाहन उत्सर्जन और बायोमास हैं, न कि स्वच्छ ईंधन पर आधारित उद्योग। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है लेकिन विकास और रोजगार की बलि देकर नहीं। राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पक्ष रखना चाहिए।