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फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी का मामला, जांच के लिए विश्वविद्यालय पहुंची सीबीआई, खंगाले रिकॉर्ड

Fri, 15 Mar 2019 11:06 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 15 Mar 2019 11:06 AM IST
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CBI team reach agra university for probe in fake certificates
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर चार लोगों ने उत्तराखंड में नौकरी पाई है। शिकायत होने पर सीबीआई मामले की जांच कर रही है। देहरादून से दो सदस्यीय टीम गुरुवार को विश्वविद्यालय में जांच के लिए पहुंचीं। चार्ट रूम में गई। प्रथम दृष्टया प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं।
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सीबीआई टीम ने जिन चार अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र की जांच करने आई है, उनकी माध्यमिक शिक्षा के प्रमाणपत्र भी फर्जी बताए जा रहे हैं। सभी ने सेंट्रल बोर्ड फॉर सेकेंडरी एजूकेशन, मध्य भारत का प्रमाणपत्र लगाया है। इसके बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीए के प्रमाणपत्र लगाए हैं, जो कि वर्ष 2006, 07 और 2009 के हैं। 
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इन सत्रों के चार्टों की एसआईटी पहले से जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई के प्रमाणपत्र दिखाते ही विश्वविद्यालय के स्टाफ ने उसे फर्जी बता दिया। कुलसचिव की मुहर और अक्षर अलग हैं। कुलसचिव केएन सिंह का कहना है कि देहरादून से सीबीआई टीम जांच के लिए आई थी, उसे जांच में सहयोग प्रदान किया गया। 
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प्रभारी के नहीं हैं हस्ताक्षर 

विश्वविद्यालय के सूत्रों के मुताबिक सीबीआई जिन चार प्रमाणपत्रों की जांच करने आई थी, सभी फर्जी हैं। विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी की मुहर प्रमाणपत्रों पर लगी हुई है। प्रथम दृष्टया यह फर्जी लगा। मुहर काफी मोटी लगी हुई। सबसे खास बात यह है कि वर्ष 2016 में प्रमाणपत्र विश्वविद्यालय से जारी दिखाए गए हैं। वर्ष 2016 के सेक्शन प्रभारी का हस्ताक्षर प्रमाणपत्रों पर नहीं है। 

संबंधित वर्षों की चल रही एसआईटी जांच 

सीबीआई जिन प्रमाणपत्रों की जांच करने पहुंची थी, ये वर्ष 2006, 07 और 09 के हैं। बीए के प्रमाणपत्र हैं। इन वर्षों के चार्टों में हुए फर्जीवाड़े की एसआईटी जांच कर रही है। इन वर्षों का प्रमाणपत्र लगाया जाना भी संदेह के घेरे में है। 

जांच के लिए फिर आएगी टीम

प्रमाणपत्रों की जांच के लिए पहुंची टीम को विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जांच में सहयोग दिया गया। चार्ट रूम में भेजा गया। वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया। टीम के सदस्यों ने जांच के लिए दोबारा आने की बात कही। 

फर्जी प्रमाणपत्र भी सत्यापित कर दिए गए

विश्वविद्यालय में पहले फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का रैकेट चल रहा था। कई मामले सामने आ चुके हैं। यही नहीं, विश्वविद्यालय में फर्जी प्रमाणपत्रों को सत्यापित भी किया जा चुका है। उसके आधार पर बड़ी संख्या में लोगों ने शिक्षा विभाग और अन्य स्थानों पर नौकरियां भी पाईं। शिकायत पर दोबारा सत्यापन कराया गया तो प्रमाणपत्र फर्जी निकले। 
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