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Agra News: निजी वाहनों में यात्री को बैठाना पड़ेगा महंगा, कॉमर्शियल वाहन में होगा तब्दील
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निजी कार
आगरा। निजी वाहनों में भाड़े पर यात्रियों को बैठाना महंगा पड़ सकता है। संभागीय परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों के लिए खिलाफ अभियान चला रहा है। आय बढ़ाने के लिए हर माह 500 निजी वाहनों को कॉमर्शियल में तब्दील करने का लक्ष्य शासन से दिया गया है। नवंबर माह में 11 वाहनों को कॉमर्शियल की श्रेणी में लाया गया है। वहीं अभियान के तहत पकड़े गए 40 वाहन बंद पड़े हैं।
संभागीय परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल की नजर निजी वाहनों पर है। कई वाहन बिना परमिट के यात्रियों को बैठाकर कमाई कर रहे हैं, इससे विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है। शासन के स्तर से हर माह ऐसे करीब 500 वाहनों को कॉमर्शियल करने का आदेश दिया गया है। इसी के तहत अभियान चलाया जा रहा है। इससे वाहन स्वामियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
नवंबर से अब तक अभियान के तहत 40 वाहनों को पकड़ा गया है। वाहन स्वामी जुर्माना जमा करने को तैयार है लेकिन कॉमर्शियल में नहीं बदलवाना चाहते। इस वजह से आरटीओ अधिकारियों के सामने परेशानी खड़ी हो रही है। हर रोज वाहन स्वामी इस समस्या पर आरटीओ कार्यालय के चक्कर काट रहे है। एआरटीओ (प्रवर्तन) आलोक कुमार ने बताया कि अब तक 11 निजी वाहनों को कॉमर्शियल किया गया है। यह वाहन बिना परमिट के यात्री बैठाकर किराया वसूल रहे थे। अभियान के तहत पकड़े जाने वाले वाहन को कॉमर्शियल में तब्दील करने का निर्देश है। इस वजह से जुर्माना जमा कराकर वाहन नहीं छोड़ सकते हैं।
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स्कूली वाहनों पर रखी जा रही नजर
आरटीओ अधिकारियों को निजी वाहनों का प्रयोग स्कूली वाहन में करने की लगातार शिकायत मिल रही है। इसके बाद भी अधिकारी कार्रवाई करने से पीछे हट रहे हैं। इस संबंध में आरटीओ अधिकारियों ने स्कूल संचालकों के साथ बैठक भी की है लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। आरटीओ अधिकारियों का कहना है कि स्कूली वाहनों पर नजर रखी जा रही है। अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से दौड़ रहे
ग्रामीण क्षेत्रों में निजी वाहनों का प्रयोग धड़ल्ले से कॉमर्शियल में किया जा रहा है। वहां पर कार्रवाई करना आरटीओ अधिकारियों के लिए चुनौती बना हुआ है। पिछले वर्ष एत्मादपुर क्षेत्र में एक एआरटीओ को ग्रामीणों ने चेकिंग के दौरान घेर लिया था, तो सैंया टोल पर भी एक एआरटीओ के साथ अभद्रता हो चुकी है। इस वजह से अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं।
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संभागीय परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल की नजर निजी वाहनों पर है। कई वाहन बिना परमिट के यात्रियों को बैठाकर कमाई कर रहे हैं, इससे विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है। शासन के स्तर से हर माह ऐसे करीब 500 वाहनों को कॉमर्शियल करने का आदेश दिया गया है। इसी के तहत अभियान चलाया जा रहा है। इससे वाहन स्वामियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
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नवंबर से अब तक अभियान के तहत 40 वाहनों को पकड़ा गया है। वाहन स्वामी जुर्माना जमा करने को तैयार है लेकिन कॉमर्शियल में नहीं बदलवाना चाहते। इस वजह से आरटीओ अधिकारियों के सामने परेशानी खड़ी हो रही है। हर रोज वाहन स्वामी इस समस्या पर आरटीओ कार्यालय के चक्कर काट रहे है। एआरटीओ (प्रवर्तन) आलोक कुमार ने बताया कि अब तक 11 निजी वाहनों को कॉमर्शियल किया गया है। यह वाहन बिना परमिट के यात्री बैठाकर किराया वसूल रहे थे। अभियान के तहत पकड़े जाने वाले वाहन को कॉमर्शियल में तब्दील करने का निर्देश है। इस वजह से जुर्माना जमा कराकर वाहन नहीं छोड़ सकते हैं।
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स्कूली वाहनों पर रखी जा रही नजर
आरटीओ अधिकारियों को निजी वाहनों का प्रयोग स्कूली वाहन में करने की लगातार शिकायत मिल रही है। इसके बाद भी अधिकारी कार्रवाई करने से पीछे हट रहे हैं। इस संबंध में आरटीओ अधिकारियों ने स्कूल संचालकों के साथ बैठक भी की है लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। आरटीओ अधिकारियों का कहना है कि स्कूली वाहनों पर नजर रखी जा रही है। अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से दौड़ रहे
ग्रामीण क्षेत्रों में निजी वाहनों का प्रयोग धड़ल्ले से कॉमर्शियल में किया जा रहा है। वहां पर कार्रवाई करना आरटीओ अधिकारियों के लिए चुनौती बना हुआ है। पिछले वर्ष एत्मादपुर क्षेत्र में एक एआरटीओ को ग्रामीणों ने चेकिंग के दौरान घेर लिया था, तो सैंया टोल पर भी एक एआरटीओ के साथ अभद्रता हो चुकी है। इस वजह से अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं।