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दिल्ली रूट पर बसों की संख्या हुई आधी, यात्री को बढ़ी हैं मुश्किलें
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कासगंज बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करते बस यात्री।
- फोटो : KASGANJ
कासगंज। नगर से दिल्ली जाने वाले यात्री खासे परेशान हैं। घंटे भर से अधिक के इंतजार के बाद भी बस नहीं मिल पा रही हैं। इसका कारण 31 बसों का चुनाव ड्यूटी पर जाना बताया जा रहा है। इस असर सर्वाधिक दिल्ली मार्ग पर पड़ा है। पहले यहां से 45-50 बसें दिल्ली जातीं थी, अब यह संख्या 22-25 है।
बस स्टैंड से सबसे अधिक बसों दिल्ली रूट पर लगाई जाती हैं। चुनाव से पूर्व 45 से 50 बसों को दिल्ली रूट पर लगाया जाता था। चुनावों की ड्यूटी में 31 बसों के चलते जाने से इस मार्ग पर 22 से 25 बसों को ही लगाया जा रहा है। इससे दिल्ली और अलीगढ़ जाने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आगरा, बरेली, मथुरा के रूट से भी बसों की संख्या को घटाया गया है। ऐसे में घंटों इंतजार के बाद ही यात्रियों को बसें मिल पा रही हैं।
निजी बसों या डग्गामार वाहनों से करनी पड़ रही
जब घंटो इंतजार के बाद यात्रियों को बसें नहीं मिलती हैं तो यात्री निजी बसों या डग्गामार वाहनों में यात्रा करने को मजबूर होते हैं। जिन यात्रियों को अधिक दूर नहीं जाना होता है वह बसों का इंतजार करने के स्थान पर डग्गेमार वाहन या निजी बसों से ही यात्रा करना बेहतर समझते हैं। इसका वाहन संचालक पूरा फायदा उठा रहे हैं। मोहनपुरा, नदरई, एटा, सोरोंजी आदि स्थानों पर यात्री डग्गेमार वाहनों एवं निजी बसों से ही यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं।
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बस स्टैंड से सबसे अधिक बसों दिल्ली रूट पर लगाई जाती हैं। चुनाव से पूर्व 45 से 50 बसों को दिल्ली रूट पर लगाया जाता था। चुनावों की ड्यूटी में 31 बसों के चलते जाने से इस मार्ग पर 22 से 25 बसों को ही लगाया जा रहा है। इससे दिल्ली और अलीगढ़ जाने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आगरा, बरेली, मथुरा के रूट से भी बसों की संख्या को घटाया गया है। ऐसे में घंटों इंतजार के बाद ही यात्रियों को बसें मिल पा रही हैं।
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निजी बसों या डग्गामार वाहनों से करनी पड़ रही
जब घंटो इंतजार के बाद यात्रियों को बसें नहीं मिलती हैं तो यात्री निजी बसों या डग्गामार वाहनों में यात्रा करने को मजबूर होते हैं। जिन यात्रियों को अधिक दूर नहीं जाना होता है वह बसों का इंतजार करने के स्थान पर डग्गेमार वाहन या निजी बसों से ही यात्रा करना बेहतर समझते हैं। इसका वाहन संचालक पूरा फायदा उठा रहे हैं। मोहनपुरा, नदरई, एटा, सोरोंजी आदि स्थानों पर यात्री डग्गेमार वाहनों एवं निजी बसों से ही यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं।
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