बैलगाड़ी से कीजिए ब्रज भ्रमण: मथुरा में गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर हुआ ट्रायल, प्रदूषण मुक्त होगा सफर
मथुरा आने वाले पर्यटक जल्द ही बैलगाड़ी में बैठकर ब्रज भ्रमण का आनंद ले सकेंगे। इसके लिए बुधवार को गोवर्धन में गिरिराज परिक्रमा मार्ग पर बैलगाड़ी संचालन का ट्रायल किया गया।
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मथुरा में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से गोवर्धन-छटीकरा मार्ग पर श्रीकृष्ण गोशाला संचालित है। इस गोशाला में करीब 4,500 गोवंश का पालन हो रहा है। गोशाला के व्यवस्थापक हेमंत यादव और गोरक्षा दल के आगरा मंडल संयोजक गौतम खंडेलवाल ने गोवंशों को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम शुरू की है। अब एक बैल कम से कम 10 गोवंश के भरण पोषण की व्यवस्था करेगा। इसके लिए गोशाला में बैलगाड़ियां तैयार कराई जा रही हैं। मंगलवार को गिरिराज परिक्रमा मार्ग पर बैलगाड़ी का ट्रायल किया गया।
गोल्फ कार्ट की तर्ज पर बनाई गई बैलगाड़ियां
बैलगाड़ी 10 सीटर गोल्फ कार्ट की तर्ज पर बनाई गई है। 10 यात्री सवार होकर यात्रा कर सकते हैं। यह गाड़ी लोहे के फ्रेम पर प्लाईबोर्ड से तैयार की गई है। इसमें करीब दो सौ किलो लोहा और छह बोर्ड प्रयुक्त किए गए हैं। इसकी छत धान की पराली व डाब के फूस से तैयार की गई है। गर्मी से बचाव को खश की टटिया चारों तरफ लगाई जाएंगी। एक गाड़ी में करीब 30 हजार का खर्च आता है।
बैलगाड़ी संचालन की ग्वारिया प्रताप सिंह, तेज सिंह और गब्बर बैलों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। सात कोस परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं को कोई किराया नहीं देना होगा। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से गोवंश की सेवा में दान दे सकेंगे। देवेंद्र यादव ने बताया कि गोवंश से खुद अपने वंश का पालन करा आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की गई है। बुधवार को ट्रायल के तौर पर दो बैलगाड़ियों का संचालन गिरिराज परिक्रमा मार्ग पर किया गया है। संतों ने इसका शुभारंभ किया।
प्राचीन भारतीय परिवहन की रीढ़ है बैलगाड़ी
गौतम खंडेलवाल कहते हैं कि बैल गाड़ी प्राचीन भारतीय परिवहन की रीढ़ है लेकिन वर्तमान समय में मानव तेजी से विकास पथ पर अग्रसर है, जो काबिल-ए-तारीफ़ भी है। पर सृष्टि के गूढ़ रहस्यों की खोज में हम कहीं न कहीं अपनी प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। पचास वर्ष पूर्व ब्रज में आधुनिकता की दौड़-भाग नहीं थी, बैलगाड़ियों का चलन था। इससे धार्मिक महत्व के साथ प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति भी मिलेगी।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पर्यटकों को लुभाने के लिए एक नया प्रयास है। इससे गोशालाओं में गोवंश की देखरेख में भी मदद मिलेगी। परिक्रमा मार्ग में बैलगाड़ियां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनेंगी।