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मंडी में नियम के विपरीत बना लीं पक्की दुकानें
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09एमएनपी-17-मंडी में अवैध रूप से बनाई गई पक्की दुकान
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। शहर की नवीन मंडी में सरकारी भूमि पर दबंगों ने नियम के विपरीत पक्की दुकानें बना डालीं हैं। वहीं, कुछ ने टिन शेड से गोदाम भी बनवा ली है। वहीं, जो जमीन खाली पड़ी है, उस पर भी उन्होंने मुड्डी लगा दी हैं। कब्जे को लेकर रोजाना मंडी में विवाद हो रहा है। उधर, मंडी प्रशासन मामले को लेकर मौन बना हुआ है।
नवीन मंडी में नीलामी चबूतरों व पक्की दुकानों के अलावा कई एकड़ भूमि खाली पड़ी हुई थी। इसमें भविष्य में दुकानों का निर्माण कराया जाना था। शायद अब इसकी कोई जरूरत न पड़े। अब दबंगों ने खुद ही आपस में सांठगांठ कर मंडी में बंटवारा कर लिया।
पहले से तो सैकड़ों दुकानें अवैध तरीके से बनी हुई हैं तो वहीं अब नई दुकानें भी बनने लगी हैं। कहीं व्यापारी पक्की दुकानों का निर्माण करा रहे हैं तो कहीं दिन शेड की दुकानें बनवाई जा रही हैं। मंडी प्रशासन इन सबको अवैध बताता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक मंडी समिति ने आंखें मूंद रखी हैं।
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मंडी में धड़ल्ले से दुकानों का निर्माण चल रहा है। इन पक्की दुकानों को हटाना मंडी प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा। मंडी में इसी कब्जे को लेकर रोजाना विवाद होते हैं। पुलिस और अधिकारी भी पहुंचते हैं, लेकिन सब केवल मामला रफा दफा करने की कोशिश करते हैं।
मंडी समिति द्वारा दुकानों का निर्माण कर उनकी खुली बैठक में नीलामी की जाती है। जो भी सबसे अधिक बोली लगाता है उसे ही दुकान दी जाती है। अमूमन एक दुकान की बोल लाखों में लगती है। ऐसे में दबंगों द्वारा जमीन पर कब्जा कर सरकारी खजाने को लाखों का नहीं बल्कि करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।
मंडी समिति द्वारा लाइसेंस लेने वाले आढ़ती तो भूमि का आवंटन किया जाता है। जिस पर वे व्यापार कर सकते हैं। नियम है कि उस जमीन पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। फिर भी सामान रखने के लिए बांस का टट्टर लगाने की अनुमति दे दी जाती है, हालांकि ये भी नियम विरुद्ध है। लेकिन पक्का निर्माण कराना पूरी तरह अवैध है।
मंडी में कब्जे की एक शिकायत मिली थी। इसके बाद सचिव को मंडी में सभी कब्जे चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। चाहे अवैध कब्जा हो या पक्का निर्माण हो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
-रजनीकांत, एसडीएम सदर।
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नवीन मंडी में नीलामी चबूतरों व पक्की दुकानों के अलावा कई एकड़ भूमि खाली पड़ी हुई थी। इसमें भविष्य में दुकानों का निर्माण कराया जाना था। शायद अब इसकी कोई जरूरत न पड़े। अब दबंगों ने खुद ही आपस में सांठगांठ कर मंडी में बंटवारा कर लिया।
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पहले से तो सैकड़ों दुकानें अवैध तरीके से बनी हुई हैं तो वहीं अब नई दुकानें भी बनने लगी हैं। कहीं व्यापारी पक्की दुकानों का निर्माण करा रहे हैं तो कहीं दिन शेड की दुकानें बनवाई जा रही हैं। मंडी प्रशासन इन सबको अवैध बताता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक मंडी समिति ने आंखें मूंद रखी हैं।
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मंडी में धड़ल्ले से दुकानों का निर्माण चल रहा है। इन पक्की दुकानों को हटाना मंडी प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा। मंडी में इसी कब्जे को लेकर रोजाना विवाद होते हैं। पुलिस और अधिकारी भी पहुंचते हैं, लेकिन सब केवल मामला रफा दफा करने की कोशिश करते हैं।
मंडी समिति द्वारा दुकानों का निर्माण कर उनकी खुली बैठक में नीलामी की जाती है। जो भी सबसे अधिक बोली लगाता है उसे ही दुकान दी जाती है। अमूमन एक दुकान की बोल लाखों में लगती है। ऐसे में दबंगों द्वारा जमीन पर कब्जा कर सरकारी खजाने को लाखों का नहीं बल्कि करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।
मंडी समिति द्वारा लाइसेंस लेने वाले आढ़ती तो भूमि का आवंटन किया जाता है। जिस पर वे व्यापार कर सकते हैं। नियम है कि उस जमीन पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। फिर भी सामान रखने के लिए बांस का टट्टर लगाने की अनुमति दे दी जाती है, हालांकि ये भी नियम विरुद्ध है। लेकिन पक्का निर्माण कराना पूरी तरह अवैध है।
मंडी में कब्जे की एक शिकायत मिली थी। इसके बाद सचिव को मंडी में सभी कब्जे चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। चाहे अवैध कब्जा हो या पक्का निर्माण हो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
-रजनीकांत, एसडीएम सदर।