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Budget 2021: ताजनगरी के पर्यटन को परवाज मिली न जूते को चमक, उद्यमियों में निराशा

Tue, 02 Feb 2021 09:37 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 02 Feb 2021 09:37 AM IST
सार

  • कोरोना काल में भारी संकट झेलने वाले ताजनगरी के उद्योगों को आम बजट में राहत पैकेज मिलने की उम्मीद थी। खासकर पर्यटन और जूता उद्यमी आस लगाए बैठे थे। लेकिन निराशा ही मिली। सरकार के पास पर्यटन के लिए कोई योजना नहीं है। न ही जूता निर्यात के लिए कोई छूट मिली है। उद्यमियों का कहना है कि बजट ने उन्हें निराश किया। 

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ताजमहल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के पर्यटन उद्यमी सुबह 11 बजे से टीवी पर आम बजट देख रहे थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने पर्यटन शब्द तक नहीं बोला। इस पर उद्यमियों की प्रतिक्रिया आई कि यह बहुत ही निराशाजनक बजट है। मार्च से अब तक ज्यादातर होटल बंद हैं तो कई एंपोरियमों के ताले अब तक नहीं खुल पाए हैं।

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ताजनगरी में पर्यटन उद्योग से चार लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। यहां 650 से ज्यादा होटल, 500 से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं। पर्यटन से जुड़े कारोबारियों, गाइड, फोटोग्राफर, एंपोरियम, शिल्पी, सभी की निगाहें बजट पर थीं कि कोरोना से प्रभावित पर्यटन को शायद वित्त मंत्री की वैक्सीन मिले।
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'पर्यटन उद्योग को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान'
पर्यटन मित्र के अध्यक्ष राजीव तिवारी ने कहा कि कोरोना से सबसे ज्यादा नुकसान पर्यटन उद्योग हुआ। फिलहाल एक साल तक और विदेशी पर्यटक आने की उम्मीद नहीं, लेकिन इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों को कोई तात्कालिक राहत नहीं दी गई। बेहद खराब बजट पेश किया गया।

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टूरिज्म गिल्ड के अध्यक्ष हरी सुकुमार ने कहा कि पर्यटन उद्योग के लिए बेहद निराशाजनक बजट है। एक साल से इंडस्ट्री में ताले लगे हैं, जबकि अन्य उद्योग फिर भी पटरी पर आने लगे। पर्यटन को दोबारा पैरों पर खड़ा करने की कोई बात तक बजट में नहीं की गई। 

होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश वाधवा ने कहा कि जो सबसे ज्यादा कोरोना काल में परेशान हुए, उनकी बजट में कोई बात नहीं की। सरकार के एजेंडे में पर्यटन विकास है ही नहीं। पांच साल के बजट में देखिए, पर्यटन इनकी प्राथमिकता में है ही नहीं।

होटल एसोसिएशन के महासचिव अवनीश शिरोमणि ने कहा कि इस बजट में भी पर्यटन उद्योग के साथ छलावा किया गया। न कोई टैक्स में राहत न ही कोई पैकेज। हर सेक्टर को कुछ न कुछ मिला है, केवल पर्यटन की झोली खाली रही। 10 फीसदी जीडीपी हिस्सेदारी वाले उद्योग को दरकिनार कर किया।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स सुनील सी. गुप्ता ने कहा कि बड़ी उम्मीदें थीं, जो चकनाचूर हो गईं। पर्यटन को कुछ तो राहत दी होती। लाखों लोग बेहाल हैं। होटल, एंपोरियमों, रेस्टोरेंटो में एक साल बाद भी ताले हैं, पर सरकार इन सबको लेकर संजीदा नहीं, बजट में कोई प्रावधान नहीं किया।

जूता निर्यात उद्योग को बड़ा झटका

आम बजट में लेदर पर आयात शुल्क बढ़ाने से जूता निर्यात उद्योग को बड़ा झटका लगा है। लॉकडाउन के कारण पहले ही कराह रहे उद्यमियों को राहत मिलने के बजाय उनपर और बोझ डालने का काम किया है। शुल्क बढ़ने से जूते की लागत में इजाफा होगा, साथ ही बांग्लादेश जैसा छोटा देश निर्यात के मामले में और आगे निकल सकता है।

आगरा शू मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने बताया कि जूते को बनाने में वेट ब्लू लेदर और अनफिनिश्ड लेदर का प्रयोग होता है। इसे रशिया, बंगलादेश आदि देशों से आयात किया जाता है। अभी तक इस पर शुल्क नहीं लग रहा था। लेकिन अब इस पर 10 फीसदी की देयता होगी। ऐसे में कच्चा माल महंगा मिलने से जूते की लागत 20 फीसदी तक बढ़ जाएगी। ऐसा होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हम अपने सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी बांग्लादेश से और पीछे छूट जाएंगे। जिसका निर्यात हमसे काफी ज्यादा है।

आगरा में कारोबार
- 150 जूता निर्यात इकाई
- 3 लाख लोगों को रोजगार
- 3375 करोड़ रुपये का निर्यात
- लॉकडाउन से 1500 करोड़ रुपये का नुकसान
 

शुल्क बढ़ाकर चिंता में डाला
एफमैक अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि जूता इंडस्ट्री के लिए बेहद निराशाजनक बजट है। ये वो समय था जब हमें राहत देकर चीन से उद्योग का झटका देना था। लेकिन शुल्क बढ़ाकर और हमें चिंता में डाल दिया है। इससे प्रतिस्पर्धा में टिकना मुश्किल होगा। 20 वर्षों से शुल्क पर मिल रही छूट को बनाए रखना चाहिए था। 

कच्चे चमड़े पर पहली बार कर लगा
उपाध्यक्ष राजेश सहगल ने कहा कि आज से पूर्व कभी भी कच्चे चमड़े पर किसी सरकार ने कर नहीं लगाया है। बजट में 10 फीसदी का कर लगाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारे उत्पाद की कीमत अन्य देशों की अपेक्षा महंगी हो जाएगी, जिससे उसे बेच पाना बहुत मुश्किल हो जायेगा। 

कोई आर्थिक प्रोत्साहन नहीं
निर्यातक जितेंद्र त्रिलोकानी ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते जो चक्र प्रभावित हुआ था। जिसके चलते छोटे बड़े उद्योग आर्थिक संकट में आ गए थे, उसे दोबारा पटरी पर लाने के लिए बजट में कोई आर्थिक प्रोत्साहन दिखाई नहीं दिया। क्योंकि अभी भी उद्योग बुरी तरह प्रभावित हैं। इन्हें ऑक्सीजन देने की आवश्यकता की। 
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