{"_id":"5c4444e4bdec22736f4a701a","slug":"bsp-workers-protest-against-reshuffle-in-party-meeting","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सपा से गठबंधन के बाद बसपा में फेरबदल से आक्रोश, बैठक में हुआ बवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपा से गठबंधन के बाद बसपा में फेरबदल से आक्रोश, बैठक में हुआ बवाल
Sun, 20 Jan 2019 03:22 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 20 Jan 2019 03:22 PM IST
विज्ञापन
बीएसपी लोगो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सपा और बसपा के बीच गठबंधन के साथ ही बसपा में अब अंतर्कलह शुरू हो गई है। आगरा में बसपा जिलाध्यक्ष डॉ. भारतेंदु अरुण को अचानक हटाने के बाद शनिवार को बसपा ने मंडलीय कार्यालय पर आपात बैठक बुलाई।
विज्ञापन
इसमें कार्यकर्ताओं ने जोरदार हंगामा करते हुए इस फैसले का विरोध किया। आगरा सीट से लोकसभा प्रभारी मनोज सोनी और जोनल कार्डिनेटरों के खिलाफ नारेबाजी हुई और पुतला फूंकने का प्रयास किया गया। पुतला तो छीन लिया गया, लेकिन बसपा कार्यकर्ताओं में इसे लेकर जबरदस्त आक्रोश जताया।
विज्ञापन
कालिंदी विहार स्थित कार्यालय पर बैठक में मुख्य जोन इंचार्ज सुनील चित्तौड़ के साथ संतोष आनंद, संघप्रिय गौतम, पूर्व एमएलसी प्रताप सिंह बघेल कार्यकर्ताओं से रूबरू थे कि बाहर एत्मादपुर के कार्यकर्ता नारेबाजी करने लगे।
विज्ञापन
पुतला फूंकने का प्रयास
पुतला लेकर आए कार्यकर्ताओं से बसपा नेताओं ने इसे छीना और उन्हें बाहर से हटाया। कार्यकर्ता रविंद्र पारस को अचानक अध्यक्ष बनाने का विरोध कर रहे थे। एत्मादपुर से बसपा कार्यकर्ता छोटे लाल ने कहा कि यह फैसला गलत है। पार्टी के जोनल कार्डिनेटर ने कहा कि प्रत्याशी चुनना और जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी देना पार्टी नेताओं का काम है। कार्यकर्ता पार्टी के निर्णय को मानें।
संगठन पर लोकसभा प्रभारी को था अविश्वास
हाथरस से चुनाव लड़ चुके मनोज सोनी को जब पार्टी ने आगरा लोकसभा सीट के लिए प्रभारी बनाया, तभी आगरा के कार्यकर्ताओं में नाराजगी शुरू हो गई थी। बाहरी को प्रत्याशी बनाए जाने के खिलाफ कार्यकर्ता खुलेआम तो नहीं बोले, लेकिन अंदरखाने आक्रोश पनपता रहा।
कई बार लोकसभा प्रभारी मनोज सोनी ने संगठन द्वारा सहयोग न करने की बात उछाली तो जिलाध्यक्ष रहे डा. भारतेंदु अरुण को पद से ही हटा दिया गया। कार्यकर्ताओं से मनोज सोनी का संपर्क न होने के कारण संगठन के पदाधिकारी पहले ही यह मामला उठा चुके थे। इस वजह से आनन फानन में संगठन में बदलाव किया गया।
संगठन पर लोकसभा प्रभारी को था अविश्वास
हाथरस से चुनाव लड़ चुके मनोज सोनी को जब पार्टी ने आगरा लोकसभा सीट के लिए प्रभारी बनाया, तभी आगरा के कार्यकर्ताओं में नाराजगी शुरू हो गई थी। बाहरी को प्रत्याशी बनाए जाने के खिलाफ कार्यकर्ता खुलेआम तो नहीं बोले, लेकिन अंदरखाने आक्रोश पनपता रहा।
कई बार लोकसभा प्रभारी मनोज सोनी ने संगठन द्वारा सहयोग न करने की बात उछाली तो जिलाध्यक्ष रहे डा. भारतेंदु अरुण को पद से ही हटा दिया गया। कार्यकर्ताओं से मनोज सोनी का संपर्क न होने के कारण संगठन के पदाधिकारी पहले ही यह मामला उठा चुके थे। इस वजह से आनन फानन में संगठन में बदलाव किया गया।
एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र के कई कार्यकर्ता बाहरी प्रत्याशी के विरोध की मुहिम शुरू कर चुके हैं। आगरा सीट पर बाहरी बनाम स्थानीय का यह विरोध अभी और तेज होना है। पर्दे के पीछे से कई नेता उन्हें हवा दे रहे हैं।
हाथरस से आगरा आए मनोज सोनी की पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से दूरी इसकी बड़ी वजह है। लोकसभा प्रभारी की उपेक्षा के कारण कई सक्रिय नेता उनके कार्यक्रम लगाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे, वहीं कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि अभी उनके नाम की ही घोषणा नहीं हुई है।
हाथरस से आगरा आए मनोज सोनी की पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से दूरी इसकी बड़ी वजह है। लोकसभा प्रभारी की उपेक्षा के कारण कई सक्रिय नेता उनके कार्यक्रम लगाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे, वहीं कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि अभी उनके नाम की ही घोषणा नहीं हुई है।