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महागठबंधन: बसपा के कोटे में जा सकती हैं यह दोनों सीटें, जानें राजनीतिक इतिहास
Sat, 12 Jan 2019 05:34 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 12 Jan 2019 05:34 PM IST
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मायावती और अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा के बीच महागठबंधन हो गया है। दोनों पार्टियां 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। जबकि कांग्रेस के लिए गठबंधन न होते हुए भी अमेठी व रायबरेली की सीट छोड़ दी गई हैं। दो सीटें अन्य दलों को दी जाएंगीं। लखनऊ में शनिवार को अखिलेश यादव और मायावती ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महागठबंधन का एलान कर दिया।
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महागठबंधन में और कौन-कौन से दल शामिल होंगे, दोनों नेताओं ने इसका जिक्र नहीं किया है। हालांकि मथुरा में रालोद प्रमुख अजित सिंह ने महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की बात कहे चुके हैं, लेकिन वो दो सीटों पर मानेंगे या नहीं, यह तो देखने वाली बात है। फिलहाल 38 सीटों में आगरा की दो सीटें बसपा के खाते में जा सकती हैं।
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सीट बंटवारे में सबसे ज्यादा जोर इस पर दिया गया है कि 2014 केचुनाव में कौन दल दूसरे नंबर पर रहा। ज्यादातर सीटें उसी को दी गई हैं। आगरा में दोनों सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर रही थी। आगरा में नारायन सुमन उम्मीदवार थे, फतेहपुर सीकरी में सीमा उपाध्याय।
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2014 में दोनों सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर
सीमा 2009 में चुनाव जीती थीं। उस वक्त प्रदेश में बसपा की सरकार थी। वहीं 2014 में दोनों ही सीटों पर सपा तीसरे स्थान पर रही थी। जबकि बसपा तीसरे नंबर पर। इस बार तीसरे और दूसरे स्थान पर रहे दलों का गठबंधन होने गया है। ऐसे में यह दोनों सीटें बसपा के खाते में पक्की मानी जा रही हैं।
आगरा सीट पर 2014 का परिणाम
आगरा सीट पर 2014 का परिणाम
| पार्टी | प्रत्याशी | वोट मिले | प्रतिशत में |
| भाजपा | रामशंकर कठेरिया | 582716 | 54.53 |
| बसपा | नारायण सिंह सुमन | 283453 | 26.48 |
| सपा | महाराज सिंह | 134708 | 12.58 |
| कांग्रेस | उपेंद्र सिंह | 34834 | 3.25 |
कभी कांग्रेस का गढ़ थी, फिर भाजपा की हो गई
आगरा लोकसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। बाद में भाजपा का गढ़ बन गई। बीच में दो बार सपा की साइकिल चली। यह सीट 1957 से 2004 तक अनारक्षित रही। 1957 से 1971 तक लगातार तीन बार कांग्रेस के सेठ अचल सिंह जीते। 1977 में बीएलडी के शंभूनाथ चतुर्वेदी सांसद बने।
1980 में निहाल सिंह कांग्रेस आई के टिकट पर जीते, 1984 में कांग्रेस के। 1989 में जनता दल से अजय सिंह सांसद बने। 1991, 1995, 1998 में लगातार तीन बार भाजपा के भवानी शंकर रावत जीते। 1999 और 2004 में सपा के राज बब्बर जीते। 2009 में सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। तब और 2014 में भाजपा के रामशंकर कठेरिया जीते।
1980 में निहाल सिंह कांग्रेस आई के टिकट पर जीते, 1984 में कांग्रेस के। 1989 में जनता दल से अजय सिंह सांसद बने। 1991, 1995, 1998 में लगातार तीन बार भाजपा के भवानी शंकर रावत जीते। 1999 और 2004 में सपा के राज बब्बर जीते। 2009 में सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। तब और 2014 में भाजपा के रामशंकर कठेरिया जीते।
पहली बार बसपा जीती, दूसरी बार भाजपा
फतेहपुर लोकसभा सीट का गठन 2009 के परिसीमन में हुआ। पहले चुनाव में बसपा की सीमा उपाध्याय जीतीं। दूसरे में भाजपा के चौधरी बाबूलाल जीते। 2009 से पहले आगरा जनपद की पांच विधान सभा सीटें आगरा लोकसभा क्षेत्र में थीं। अन्य चार सीटें फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र में थीं।
फतेहपुर सीकरी पर 2014 का परिणाम
बसपा जिलाध्यक्ष डॉ भारतेंदु अरुण ने कहा कि गठबंधन की स्थिति में हमारे प्रत्याशियों की जीत का अंतर काफी होगा। दोनों ही सीटें भारी अंतर से जीतेंगे, क्योंकि अब भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर काम कर रहा है। हमारी तैयारी पूरी है।
फतेहपुर सीकरी पर 2014 का परिणाम
| पार्टी | प्रत्याशी | वोट मिले | प्रतिशत में |
| भाजपा | चौधरी बाबूलाल | 426589 | 44.06 |
| बसपा | सीमा उपाध्याय | 253483 | 26.18 |
| सपा | पक्षालिका सिंह | 213397 | 22.04 |
| रालोद | अमर सिंह | 24185 | 2.50 |
बसपा जिलाध्यक्ष डॉ भारतेंदु अरुण ने कहा कि गठबंधन की स्थिति में हमारे प्रत्याशियों की जीत का अंतर काफी होगा। दोनों ही सीटें भारी अंतर से जीतेंगे, क्योंकि अब भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर काम कर रहा है। हमारी तैयारी पूरी है।