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ईंट-भट्ठा मालिकों को 10 करोड़ की चोट

Mon, 16 Nov 2020 07:35 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 16 Nov 2020 07:35 PM IST
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Brick business
मथुरा। कोसीकलां में जलमग्न पथाई ईंट। - फोटो : KOSI
कोसीकलां (मथुरा)। बेमौसम की बारिश सीजन शुरू होते ही ईंट व्यवसाय पर भी गाज बनकर गिरी है। क्षेत्र के करीब 40 ईंट-भट्ठों में पाथकर रखी र्गइं कच्ची ईंटें नष्ट हो गई हैं। इससे ईंट-भट्ठा मालिकों को करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगा है। भट्ठा मालिकों को हुए इस नुकसान के चलते इस उद्योग से जुड़े मजदूरों को भी मेहनताना मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
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भट्ठा संचालकों के अनुसार मौजूदा समय में चल रहे ईंट के रेट में भी खासा इजाफा होने के आसार हैं। पथी ईंट के खराब होने से हुए नुकसान व इसकी दोबारा भराई, पथाई व निकासी में होने वाली देरी से ईंट के दामों में बढ़ोत्तरी होना तय है। ईंट-भठ्ठा संचालित करने वाले निखिल गुप्ता ने बताया कि बारिश में करीब 5 लाख से अधिक कर्च्ची ईंटें बेकार हो गई हैं। हम लोगों को श्रमिकों को खाने का तो भुगतान करना पड़ रहा है।
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अंकित गुप्ता के अनुसार हर साल जनवरी के पहले हफ्ते से ही ईंट की भराई शुरू हो जाती है। सीजन शुरू होते ही बारिश से ईंट की पथाई प्रभावित हो गई। रविवार की तेज बारिश से तैयार रखी सारी कच्ची ईंट बह गईं। इससे भट्ठों पर रखी लाखों की संख्या में कच्ची ईंट बर्बाद हो गई हैं।
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महंगा हो सकता है आशियाना बनवाना
ईंट भट्ठा यूनियन के जिला उपाध्यक्ष धर्मवीर अग्रवाल ने बताया कि बारिश होने के बाद अब ईंट की भराई और फिर इसकी निकासी में लगभग एक माह से अधिक का समय लग जाएगा। खराब हो गई ईंट को दोबारा पथवाना होगा और फिर इसकी भराई हो पाएगी। इस बीच ईंट तैयार न हो पाने से इसके दामों में बढ़ोत्तरी होना तो तय है। इससे आम आदमी के लिए आशियाना बना पाना काफी मंहगा पड़ सकता है।
लॉकडाउन में चालू रहे ईंट-भठ्ठा
लॉकडाउन में भी सरकार द्वारा ईंट-भठ्ठा चालू रखे गए। सरकार ने मजदूरों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इन्हें बंद नहीं कराया। सरकार का मानना था कि ईंट-भट्ठों पर हजारों की संख्या में मजदूर काम करते हैं, लॉकडाउन के कारण भट्ठों के बंद होने से मजदूरों की रोजी-रोटी छिन जाती। भट्टा मालिकों ने मजदूरों की पूरी सुविधाओं का ध्यान रखा।

ईंट-भट्ठों की स्थिति
क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 40 से अधिक ईंट-भट्ठे संचालित हैं। इनमें करीब 80 करोड़ सालाना का व्यवसाय होता है। इन भट्ठों में लगभग 15 से 20 हजार मजदूर काम करते हैं। इन सभी से सरकार को लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि राजस्व के रूप में प्राप्त होती है।
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