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ब्रज का बतरस: साहब के उड़े तोते, नेताजी की न बची कुर्सी, इश्क का स्टेयरिंग...हंसी से लोटपोट कर देगा कुटाई कांड
Mon, 02 Nov 2026 09:01 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 02 Nov 2026 09:01 AM IST
सार
‘ब्रज का बतरस’ के इस अंक में चुनावी माहौल के बीच अफसरों पर दबाव बनाने वाले नेताओं, लखनऊ के फोन से घबराए साहबों और चुनाव हारकर घर बैठे नेताजी के किस्से हैं। इश्क के चक्कर में साहब को गाड़ी का स्टेयरिंग महबूबा के भाई को सौंपना पड़ा।
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ब्रज का बतरस।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
साहब के तोतेपढ़े-लिखों के चुनाव में दिनभर साहेबान निष्पक्षता का चोला ओढ़े सुकून से घूमते रहे, मानो मतदान नहीं कोई पिकनिक चल रही हो। गिनती के शुरुआती दौर तक सब अमन-चैन था, पर जैसे ही दूसरे राउंड में सत्ताधारी खेमे की जमीन खिसकती दिखी, राजधानी से दबाव के तार खिंच गए। शाम ढलते ही दफ्तरों के सन्नाटे को चीरते हुए जैसे ही साहब लोगों के फोन घनघनाए, अफसरों की रंगत ही उड़ गई। जो साहब दिनभर कायदे-कानून की दुहाई दे रहे थे, फोन पर लखनऊ का पारा भांपते ही उनके तोते एक झटके में फुर्र हो गए।
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माननीय की मात
टिकट हाथ आते ही नेताजी खुद को मानसिक तौर पर माननीय समझ बैठे और बिना बात अफसरों पर धौंस जमाने लगे। सीधे काम में भी जब चुनाव ड्यूटी वाले साहब ने जी-हुजूरी नहीं की, तो नेताजी ने इसे अपनी शान में गुस्ताखी मानकर लखनऊ से तबादले का फरमान जारी करवा दिया। पर दांव उलटा पड़ गया। चुनाव आयोग ने तबादले पर वीटो जड़ दिया और अफसर बिरादरी भी अंदरखाने लामबंद हो गई। नतीजा यह निकला कि साहब की कुर्सी तो अपनी जगह कायम रही, मगर वक्त से पहले माननीय बने नेताजी चुनाव हारकर सीधे घर बैठ गए।
टिकट हाथ आते ही नेताजी खुद को मानसिक तौर पर माननीय समझ बैठे और बिना बात अफसरों पर धौंस जमाने लगे। सीधे काम में भी जब चुनाव ड्यूटी वाले साहब ने जी-हुजूरी नहीं की, तो नेताजी ने इसे अपनी शान में गुस्ताखी मानकर लखनऊ से तबादले का फरमान जारी करवा दिया। पर दांव उलटा पड़ गया। चुनाव आयोग ने तबादले पर वीटो जड़ दिया और अफसर बिरादरी भी अंदरखाने लामबंद हो गई। नतीजा यह निकला कि साहब की कुर्सी तो अपनी जगह कायम रही, मगर वक्त से पहले माननीय बने नेताजी चुनाव हारकर सीधे घर बैठ गए।
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इश्क का स्टेयरिंग
महकमे में हुकूमत और दिल में कई-कई हुस्नपरस्तों को पनाह देने वाले रंगीनमिजाज साहब की नैया आखिरकार भंवर में फंस ही गई। कई किश्तियों की सवारी करने वाले साहब के पसीने तब छूटे, जब एक बेबाक माशूका ने रोज दफ्तर धमककर उनकी पूरी ''रासलीला'' का सरेआम ढिंढोरा पीटना शुरू कर दिया। साहब के छिपने और गच्चा देने के सारे नुस्खे धरे रह गए, जब बात महकमे की चहारदीवारी से निकलकर चौराहे पर आने लगी। आखिरकार साहब को झुकना पड़ा और मामला तब जाकर शांत हुआ, जब महबूबा के भाई के हाथों में साहब की गाड़ी का स्टेयरिंग थमा दिया गया।
महकमे में हुकूमत और दिल में कई-कई हुस्नपरस्तों को पनाह देने वाले रंगीनमिजाज साहब की नैया आखिरकार भंवर में फंस ही गई। कई किश्तियों की सवारी करने वाले साहब के पसीने तब छूटे, जब एक बेबाक माशूका ने रोज दफ्तर धमककर उनकी पूरी ''रासलीला'' का सरेआम ढिंढोरा पीटना शुरू कर दिया। साहब के छिपने और गच्चा देने के सारे नुस्खे धरे रह गए, जब बात महकमे की चहारदीवारी से निकलकर चौराहे पर आने लगी। आखिरकार साहब को झुकना पड़ा और मामला तब जाकर शांत हुआ, जब महबूबा के भाई के हाथों में साहब की गाड़ी का स्टेयरिंग थमा दिया गया।
बधाई का बोझ
त्योहार की आड़ में चुनावी दावेदारों ने बिजली के खंभों को शुभकामनाओं के ऐसे भारी लंगरों से लाद दिया है कि पोल भी कराह उठे हैं। जनता भले ही महंगाई से त्रस्त हो लेकिन नेताजी अपनी ही पार्टी वालों से होड़ लगाकर जबरिया बालिश्त भर बड़े होर्डिंग थोपने में जुटे हैं। होड़ ऐसी अंधी है मानो पोस्टर की चौड़ाई से ही विधानसभा का टिकट और जीत तय होनी हो। बस में झूलते एक चतुर मुसाफिर ने खिड़की से झांकते हुए चुटकी ली। नेताजी जीत गए तो यह सारा खर्चा निधि से सूद समेत वसूलेंगे और हारे तो ठेकेदारों पर मोथरी कुल्हाड़ी चलाकर कसर पूरी करेंगे!
त्योहार की आड़ में चुनावी दावेदारों ने बिजली के खंभों को शुभकामनाओं के ऐसे भारी लंगरों से लाद दिया है कि पोल भी कराह उठे हैं। जनता भले ही महंगाई से त्रस्त हो लेकिन नेताजी अपनी ही पार्टी वालों से होड़ लगाकर जबरिया बालिश्त भर बड़े होर्डिंग थोपने में जुटे हैं। होड़ ऐसी अंधी है मानो पोस्टर की चौड़ाई से ही विधानसभा का टिकट और जीत तय होनी हो। बस में झूलते एक चतुर मुसाफिर ने खिड़की से झांकते हुए चुटकी ली। नेताजी जीत गए तो यह सारा खर्चा निधि से सूद समेत वसूलेंगे और हारे तो ठेकेदारों पर मोथरी कुल्हाड़ी चलाकर कसर पूरी करेंगे!
कुटाई कांड
सत्ता की हनक में हारे हुए नेता ने जीतने वाले को थप्पड़ जड़ दिया। जवाब में समर्थकों ने ऐसी कुटाई कि हाल बताने लायक नहीं बचे। आखिर में जीतने वालों ने खुद कुर्ता फाड़कर जोरदार इमोशन कार्ड खेल दिया। ब्रज में अब इस नौटंकी और ड्रामे की चर्चा हर नुक्कड़ पर हो रही है।
सत्ता की हनक में हारे हुए नेता ने जीतने वाले को थप्पड़ जड़ दिया। जवाब में समर्थकों ने ऐसी कुटाई कि हाल बताने लायक नहीं बचे। आखिर में जीतने वालों ने खुद कुर्ता फाड़कर जोरदार इमोशन कार्ड खेल दिया। ब्रज में अब इस नौटंकी और ड्रामे की चर्चा हर नुक्कड़ पर हो रही है।