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जीवन में धर्मपूर्वक आचरण करें

Sun, 19 Sep 2021 09:23 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 19 Sep 2021 09:23 PM IST
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Brahmacharya means enjoying the soul
मैनपुरी। दशलक्षण महापर्व के दसवें दिन श्री अजितनाथ जिनालय कटरा में प्रतिज्ञा श्री, परीक्षा श्री, प्रेक्षा श्री के सानिध्य में दशलक्षण महामंडल विधान का उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म विधान हुआ। विधान का सौभाग्य सौधर्म इंद्र अरुण कुमार, अतुल कुमार जैन कटरा परिवार को मिला। अनंत चतुर्दशी महापर्व पर भगवान वासुपूज्य जी का निर्वाण लाडू चलाने का सौभाग्य पुनीत कुमार जैन परिवार को मिला।
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प्रतिज्ञा श्री ने कहा कि ब्रह्मचर्य का अर्थ है चेतन आत्मा का भोग करना। बाहर की ओर जाती हुई उपयोग की परणीत को स्व की ओर मोड़ देना, अपने ही उपयोग के द्वारा अपनी ही आत्मा का अवलोकन करना यही ब्रह्मचर्य व्रत है। अपनी आत्मा में रमण करना ही ब्रह्मचर्य है। ब्रह्मचर्य व्रत अत्यंत कठिन व्रत है इसे पालने का अर्थ है तलवार की धार पर चलना। पाश्र्वनाथ जिनालय लोहाई मंदिर में बृहद शांति धारा एवं अभिषेक हुआ। भगवान वासुपूज्य का निर्वाण लाडू चढ़ाकर विधान कराया गया।
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जीवन में धर्मपूर्वक आचरण करें
भोगांव। जैन मंदिरों में अनंत चतुर्दशी पर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भगवान अनंतनाथ की आराधना करके तीर्थंकर वासुपूज्य का निर्वाण लाडू चढ़ाया। महिलाओं ने निर्जल व्रत रखकर आत्म कल्याण की कामना की। शांतिधारा करके विश्वशांति की कामना की गई। निखिल शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति को जीवन में धर्मपूर्वक आचरण करना चाहिए। जन्म मरण के दुखों से पार पाने के लिए तथा मोक्ष सुख प्राप्त करने के लिए धर्म पालना चाहिए। नलिन कुमार जैन, राकेश जैन, योगेश जैन, अशेष जैन, आशू जैन, मनीष जैन, आरसी जैन, गौरव जैन, नवीन जैन, चक्रेश जैन, सौरभ जैन कुल्लू, शैंकी जैन, संजय जैन, प्रवीण जैन मौजूद रहे।
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ब्रह्मचर्य के बिना आत्म सिद्धि संभव नही
करहल। श्री दिगंबर जैन नसिया जी में विहसंत सागर महाराज के सानिध्य में वासपूज्य भगवान का निर्वाण महोत्सव लाड़ू चढ़ा कर मनाया गया।
विहसंत सागर महाराज ने कहा कि समस्त साधनाओं में ब्रह्मचर्य को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। ब्रह्मचर्य व्रत के बिना कोई आत्म सिद्धि संभव नहीं है। आध्यात्म का आनंद और आत्मा की उपलब्धि बिना ब्रह्मचर्य के असंभव है। जिसकी आत्म दृष्टि प्रकट हो जाती है वही ब्रहचारी बन सकता है। जो देह आत्म बोध से सम्पन्न होता है वह कभी अपने जीवन में आत्म ब्रहम को जीवित नहीं रख सकता। जिसका देह आत्म का भ्रम टूट जाता है वही अपने जीवन में आत्म ब्रह्मचर्य उत्पन्न कर परमार्थ के मार्ग पर चलते हैं।

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12 किलो का लाडू चढ़ाया
घिरोर। जैन पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन जैन पारसनाथ दिगंबर मंदिर में वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक पर 12 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ाकर अनंत चतुर्दशी पर्व मनाया गया। सुबह भगवान का अभिषेक किया गया। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा करके वासुपूज्य भगवान सहित चौबीसों भगवान की पूजा अर्चना की गई। नरेश जैन परिवार द्वारा 12 किलो का वासुपूज्य भगवान का निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। यतींद्र जैन, नरेश जैन, भुवनेंद्र जैन, दीपक जैन, जितेंद्र जैन, प्रदीप जैन, अभिषेक जैन, राकेश जैन, सुशील जैन, विकास जैन मौजूद रहे
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