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अब पुस्तकालय की पुस्तकों में खेल की तैयारी

Wed, 09 Oct 2019 11:21 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2019 11:21 PM IST
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books buying matter in mainpuri
आलीपुरखेड़ा में पुस्तकालय के लिए ले जाई जातीं पुस्तकें - फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। जिले में अब पुस्तकालय की पुस्तकों के नाम पर खेल की शुरुआत हो गई है। प्रधानाध्यापकों का आरोप है कि अधिकारियों ने दबाव बनाकर सहमति पत्र लेते हुए अपने चहेते ठेकेदार से पुस्तकों की खरीदारी कराना शुरू कर दिया है। शासनादेश के तहत प्रधानाध्यापकों को छात्र हित को ध्यान में रखते हुए आवश्यकता अनुसार पुस्तकों की खरीदारी करानी थी।
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शासन ने जिले के प्रत्येक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में पुस्तकालय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए शिक्षा सत्र 2018-19 के तहत पांच-पांच हजार रुपये की धनराशि प्रत्येक स्कूल के प्रधानाध्यापक के खाते में भेजी गई है।
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प्रधानाध्यापकों को स्वविवेक से विद्यालय के छात्र-छात्राओं की स्थिति के अनुसार एनबीटी (नेशनल बुक ट्रस्ट) तथा एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) से प्रकाशित पुस्तकों की खरीदारी करनी है। आरोप है कि खंड शिक्षाधिकारियों ने यहां भी कमीशन का खेल शुरू कर दिया है। प्रधानाध्यापकों से दबाव बनाकर सहमति पत्र लेते हुए अपनी मर्जी के ठेकेदार से पुस्तकें उपलब्ध कराए जाने का दबाव बनाया जा रहा है।
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ये हैं शासन के निर्देश
शासनादेश के तहत बेसिक शिक्षाधिकारी को जिला प्रशासन की मदद से एनबीटी और एनसीईआरटी की प्रदर्शनी लगवाने के निर्देश दिए गए थे। इससे जिले के प्रधानाध्यापक इन प्रदर्शनी से अपने विद्यालयों के लिए पुस्तकों की खरीदारी कर सकें। अब विभाग प्रदर्शनी न लगाकर अपनी पसंद के ठेकेदार से पुस्तकों को खरीदने का दबाव बना रहा है। इसके लिए प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाकर सहमति पत्र भी ले लिए गए हैं।
बेवर और सुल्तानगंज में अधिकारी बना रहे दबाव
आलीपुर खेड़ा। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि सुल्तानगंज विकास खंड में खंड शिक्षाधिकारी पुस्तकालय की पुस्तकें अपने चहेते विक्रेताओं से खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं। जबकि इन पुस्तकों की खरीदारी एनबीटी और एनसीईआरटी के माध्यम से प्रधानाध्यापकों को स्वविवेक से करनी है।

किसी भी प्रधानाध्यापक पर दबाव नहीं बनाया गया है। कई बार एनबीटी और एनसीईआरटी की पुस्तकों के लिए विज्ञापन निकलवाया गया है। इसके बाद भी पुस्तक विक्रेता रुचि नहीं ले रहे हैं। प्रधानाध्यापक अपने स्तर से भी पुस्तकें खरीद सकते हैं। इसके लिए कोई दबाव नहीं है। जहां दिक्कत आ रही है वहां जिला स्तर पर खरीदारी के लिए सहमति पत्र लिए गए हैं।
विजय प्रताप सिंह, बीएसए
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