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आगरा: खून बढ़ाने में इस्तेमाल होने वाले इस इंजक्शन की कालाबाजारी, मुंबई पुलिस ने मारा छापा; छह घंटे चली जांच

Sun, 03 Dec 2023 02:41 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 03 Dec 2023 02:41 PM IST
सार

मुंबई में नकली इंजेक्शन की खेप पहुंचाई जा रही थी। इस मामले में मुंबई पुलिस ने आगरा में गोलू फार्मा पर छापा मारा। यहां छह घंटे जांच चली। 
 

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Black marketing of injection used to increase blood Mumbai Police raided investigation lasted six hours
इंजक्शन की कालाबाजारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

खून बढ़ाने के नकली इंजेक्शन मुंबई में पकड़े गए हैं। इसकी जांच करने आई मुंबई पुलिस ने आगरा में फव्वारा स्थित गोलू फार्मा पर दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकाॅर्ड 6 घंटे तक खंगाले। फर्जीवाड़े की आशंका पर टीम ने रिकाॅर्ड जब्त किए हैं। जांच के लिए दो दवाओं का नमूने भी लिए हैं।

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सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि मुंबई में ओरोफर-एससीएम इंजेक्शन पकड़े गए। औषधि विभाग की जांच में ये इंजेक्शन नकली मिले। मुकदमा दर्ज होने पर मुंबई पुलिस की जांच में ये इंजेक्शन दिल्ली की कान्हा फार्मा ने मुंबई में कालाबाजारी की थी। शनिवार को मुंबई पुलिस की तीन सदस्यीय टीम और आगरा के औषधि निरीक्षक कपिल शर्मा ने दोपहर करीब 12 से शाम 6 बजे तक फव्वारा स्थित गोलू फार्मा पर जांच की। मौके पर संचालक संजय सिंह मिले। ओरोफर-एससीएम इंजेक्शन की जानकारी मांगी तो उन्होंने दिल्ली के कान्हा फार्मा को दो इंजेक्शन बेचने के बिल दिखाए। टीम ने भंडारण दवाओं की खरीद-बिक्री का कंप्यूटर में रिकाॅर्ड खंगाले। संबंधित इंजेक्शन बरामद नहीं हुआ। टीम ने जांच के लिए रिकाॅर्ड जब्त किए हैं। संदिग्ध प्रतीत हो रहीं दर्द और एसिडिटी दवा के नमूने लिए हैं।
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तीन हजार नकली इंजेक्शन की कालाबाजारी
मुंबई पुलिस की टीम ने बताया कि कंपनी की निर्माण इकाई पुणे में है। मुंबई में करीब सालभर पहले 3000 से अधिक इंजेक्शन नकली पकड़े थे। एक इंजेक्शन की कीमत 1800-1900 रुपये हैं। जांच में ये इंजेक्शन दिल्ली के कान्हा फार्मा ने कालाबाजारी की थी। इसके संचालक पर केस दर्ज कर लिया। इसके संचालक ने गोलू फार्मा से 3000 इंजेक्शन की खरीद की जानकारी दी। यहां जांच में महज दो इंजेक्शन बिक्री के बिल दिखाए हैं, दिल्ली की फर्म केवल दो इंजेक्शन ही खरीदेगी। ऐसे में कालाबाजारी की पूरी आशंका है। नोटिस दिया है, जांच जारी है।
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आठ तरह की दवाओं का स्टॉक मिला
सहायक आयुक्त औषधि ने बताया कि गोलू फार्मा का लाइसेंस 2021 का है। जांच में यहां 8 तरह की दवाओं के खरीद के बिल तो मिले हैं, लेकिन इनकी बिक्री के बिल नहीं दिखाए। ये दवाएं स्टोर में ही भंडारित मिलीं। टीम ने संचालक से पूछा कि जब बिक्री नहीं हुई तो इनका स्टॉक क्यों, इस पर संचालक ने कहा कि दुकान नियमित नहीं खुल पा रही है। मामला संदिग्ध लग रहा है।

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