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UP News: बीआईएस से 44 लाख श्रमिकों सहित 1.50 करोड़ रोजगार पर संकट, कारोबारियों की उड़ी नींद
Thu, 08 Aug 2024 09:23 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Thu, 08 Aug 2024 09:23 AM IST
सार
आगरा शू मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने जीएसटी व बीआईएस से राहत की मांग की है। प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र भेजा है।
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प्रदर्शन करते कारोबारी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में आगरा शू मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की मांग पर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजा है। इसमें जीएसटी और बीआईएस से राहत पर विचार करने के लिए कहा गया है। जीएसटी व बीआईएस से प्रदेश में आगरा सहित अन्य जिलों में 44 लाख श्रमिकों और 1.50 करोड़ रोजगार पर संकट है।
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एक हजार रुपये से अधिक मूल्य के जूते पर जीएसटी पांच से बढ़कर 12 प्रतिशत है। घटाकर पांच प्रतिशत करने की मांग हो रही है। बीआईएस से असंगठित क्षेत्र प्रभावित है। बड़े ग्रुप ने ऑर्डर कैंसिल कर दिए हैं। ये सभी बातें एसोसिएशन अध्यक्ष उपेंद्र सिंह लवली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पिछले दिनों लखनऊ में मुलाकात के दौरान बताई थीं।
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मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को इस संबंध में निर्देश दिए। जिसके बाद वित्त मंत्री ने जूता इकाइयों की समस्या के बारे में केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखा है। जिसमें कहा कि आगरा, कानपुर, बरेली व अन्य जिलों में असंगठित क्षेत्र में 44 लाख श्रमिक कार्यरत हैं। 1.50 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। बीआईएस की बाध्यता से इस पर संकट है।
अध्यक्ष उपेंद्र सिंह लवली ने बताया कि हमने बीआईएस को स्वैच्छिक करने का अनुरोध किया था। 85 प्रतिशत उपभोक्ता सस्ता जूता पहनता है। केंद्रीय भीम युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष सोमदत्त पिप्पल का कहना है कि बीआईएस के कारण घरेलू कारखानों पर ताले लटकने की नौबत आ गई है।
कहा कि माल रुका पड़ा है। सप्लाई ठप है। लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। भीम युवा व्यापार मंडल अध्यक्ष प्रदीप कुमार पिप्पल ने बताया कि बीआईएस रद्द नहीं हुआ तो आगरा का जूता कारोबार बर्बाद हो जाएगा।